अहमदाबाद: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज हल्दिया बल्क टर्मिनल (HBT) को चालू किया और इसे औपचारिक रूप से राष्ट्र को समर्पित किया।
4 एमएमटीपीए (MMTPA) की वार्षिक क्षमता के साथ ड्राई बल्क कार्गो को संभालने के लिए डिज़ाइन किया गया यह टर्मिनल हुगली नदी पर एक पूरी तरह से स्वचालित बल्क सुविधा है। सीधे रेल संपर्क से जुड़ा यह टर्मिनल भारत के पूर्वी समुद्री गलियारे के माध्यम से बल्क कार्गो की आवाजाही के लिए एक बड़ा ढांचागत अपग्रेड है।
एपीएसईजेड (APSEZ) के पूर्णकालिक निदेशक और सीईओ श्री अश्वनी गुप्ता ने कहा कि हल्दिया बल्क टर्मिनल एक अगली पीढ़ी की सुविधा है जो हुगली में पूर्ण मशीनीकरण और प्रत्यक्ष रेल निकासी की सुविधा लाती है।
उन्होंने बताया कि उन्नत स्वचालित प्रणालियों के माध्यम से यह जेटी डंपिंग को खत्म कर और माल के नुकसान को कम कर स्वच्छ तथा सुरक्षित संचालन सुनिश्चित कर रहा है। यह टर्मिनल पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड की औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट के हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स (HDC) के भीतर स्थित इस टर्मिनल को 30 साल की रियायत के तहत डीबीएफओटी (DBFOT) मॉडल के माध्यम से विकसित किया गया है। एचडीसी बल्क टर्मिनल लिमिटेड द्वारा इसका निर्माण 14 जुलाई 2023 से शुरू होकर आज कमीशनिंग की तैयारी तक अपने निर्धारित समय के भीतर पूरा किया गया है।
हुगली नदी के पश्चिमी तट पर रणनीतिक रूप से स्थित यह टर्मिनल आयातित कोयले और विभिन्न ड्राई बल्क वस्तुओं को संभालने के लिए सुसज्जित है। भारत के ड्राई बल्क आयात (जैसे कोयला, बॉक्साइट और चूना पत्थर) का लगभग 60% हिस्सा पूर्वी तट पर आता है, जिससे हल्दिया पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के इस्पात, एल्यूमीनियम और बिजली उद्योगों के लिए सबसे कुशल बंदरगाह बन जाता है।
इस क्षमता विस्तार से इन उद्योगों के लिए रसद लागत और टर्नअराउंड समय में काफी कमी आएगी।
निर्माण शुरू होने के बाद से एपीएसईजेड ने 2,000 टन क्षमता वाले रेलवे वैगन लोडिंग सिस्टम (RWLS) की स्थापना और 1.54 किलोमीटर लंबी समर्पित रेलवे लाइन सहित कई बुनियादी ढांचे के काम किए हैं।
इसके अलावा मौजूदा जेटी का नवीनीकरण किया गया है, 2.10 किलोमीटर लंबी उन्नत कन्वेयर सिस्टम स्थापित की गई है, और माल के प्रबंधन व तेजी से काम करने के लिए दो स्टैकर-कम-रिक्लेमर तथा दो मोबाइल हार्बर क्रेन तैनात किए गए हैं।
रेलवे वैगन लोडिंग सिस्टम और समर्पित रेल लाइन इस टर्मिनल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं। इनके माध्यम से जहाजों से उतारा गया बल्क कार्गो सीधे रेलवे वैगनों पर लादा जा सकता है और मुख्य लाइनों से जुड़ सकता है, जिससे बंदरगाह पर लगने वाला समय कम होता है और माल की लागत में भी कटौती होती है।
हल्दिया टर्मिनल भारत के सागरमाला कार्यक्रम और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का एक प्रत्यक्ष प्रकटीकरण है, जो रसद लागत को कम करने के लिए मल्टीमॉडल पोर्ट बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता देते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस सुविधा को राष्ट्र को समर्पित करना पूर्वी समुद्री तट के आधुनिकीकरण के राष्ट्रीय रणनीतिक महत्व को दर्शाता है।
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