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पश्चिम बंगाल में ममता बनाम राहुल: इंडिया गठबंधन में बढ़ती दरार और कांग्रेस की रणनीति पर उठते सवाल

| Updated: April 29, 2026 15:00

राहुल गांधी के टीएमसी पर तीखे हमलों से विपक्षी एकता पर उठे सवाल, जानिए क्षेत्रीय दलों की गोलबंदी और कांग्रेस की इस नई राजनीतिक रणनीति के क्या हैं मायने।

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की चुनावी स्थिति को मजबूत करने के लिए राहुल गांधी ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी नेताओं का मानना है कि यह रणनीति कांग्रेस के पक्ष में चुनावी माहौल बनाने के लिए है। हालांकि, इस बयानबाजी ने ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के भीतर की दरारों को और गहरा कर दिया है, जिससे विपक्षी एकता पर नए सवाल खड़े होने लगे हैं।

ममता बनर्जी के समर्थन में कई प्रमुख क्षेत्रीय दल सामने आए हैं, जो कांग्रेस के लिए एक कड़ा संदेश है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के हेमंत सोरेन और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पश्चिम बंगाल में टीएमसी के लिए प्रचार किया।

वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव राज्य के दौरे पर तो नहीं गए, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से ममता बनर्जी को अपना पूरा समर्थन जताया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि टीएमसी प्रमुख के पीछे क्षेत्रीय ताकतों की यह गोलबंदी राहुल गांधी के लिए एक चेतावनी की तरह होनी चाहिए।

विश्लेषकों के अनुसार, इंडिया गठबंधन अभी भी काम कर रहा है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस धीरे-धीरे इसमें किनारे होती जा रही है। कांग्रेस की राजनीति को चार दशकों से करीब से देखने वाले राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई ने राहुल गांधी की इस रणनीति को ‘अनुभवहीन’ करार दिया है।

किदवई का कहना है कि यह कोई स्मार्ट राजनीति नहीं है और यह ऐसा समय है जब राहुल को ऐसे बयानों से बचना चाहिए था। उनके मुताबिक, कांग्रेस के पास अभी केवल 99 लोकसभा सांसद हैं और वे इस समय सभी क्षेत्रीय दलों से अपने संबंध बिगाड़ने का जोखिम नहीं उठा सकते।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में कांग्रेस इस बार सभी 294 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है। हालांकि, पार्टी की उम्मीदें मुख्य रूप से मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे कुछ खास इलाकों पर टिकी हैं। इन क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी अच्छी खासी है और यहां कांग्रेस का कुछ हद तक समर्थन भी माना जाता है।

इससे पहले कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव वामदलों के साथ गठबंधन में लड़े थे। लेकिन इस बार पार्टी ने अकेले चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है।

शनिवार को हुगली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि चुनाव आते ही प्रधानमंत्री मोदी ममता जी का मजाक उड़ाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही चुप हो जाते हैं। राहुल के अनुसार, इसका कारण यह है कि मोदी जानते हैं कि केवल कांग्रेस ही भाजपा और आरएसएस का डटकर मुकाबला करती है।

उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बंगाल में भाजपा के लिए रास्ता तैयार करने का गंभीर आरोप भी लगाया। राहुल गांधी ने कहा कि यदि ममता जी ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा नहीं दिया होता और आरजी कर (R.G. Kar) अस्पताल में बलात्कार और हत्या जैसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की होती, तो राज्य में भाजपा से कोई खतरा नहीं होता।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस भाजपा के खिलाफ कोई वास्तविक लड़ाई नहीं लड़ती है। राहुल के मुताबिक इसी वजह से जांच एजेंसियां टीएमसी नेताओं पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं करती हैं। खुद की तुलना ममता बनर्जी से करते हुए उन्होंने कांग्रेस को बंगाल में बदलाव की एकमात्र ताकत के रूप में पेश किया।

राहुल ने सवाल उठाया कि मोदी जी ने ममता जी पर कितने मुकदमे दर्ज किए हैं और उनसे कितने घंटे पूछताछ हुई है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि ईडी ने लगातार पांच दिनों तक उनसे 55 घंटे पूछताछ की थी, लेकिन ममता जी पर कोई हमला इसलिए नहीं होता क्योंकि वह कभी भाजपा से लड़ती ही नहीं हैं।

इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए एक वरिष्ठ तृणमूल कांग्रेस नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि राहुल गांधी की इन टिप्पणियों का कोई खास प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में कांग्रेस की मौजूदगी ना के बराबर है और यहां उसका कोई भविष्य भी नहीं है।

ममता बनर्जी पहले ही यह साफ कर चुकी हैं कि संसद में भाजपा का मुकाबला करने के लिए इंडिया गठबंधन बना है, लेकिन बंगाल में तृणमूल कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी। मई 2024 में तामलुक की एक जनसभा में उन्होंने राज्य में कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के गठबंधन की संभावनाओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया था।

उस जनसभा में ममता ने कहा था कि राष्ट्रीय स्तर पर वह इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं और यह गठबंधन उन्हीं के दिमाग की उपज था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि राष्ट्रीय स्तर पर वे साथ हैं और रहेंगे, लेकिन बंगाल में सीपीएम और कांग्रेस पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि यहां वे भाजपा के साथ खड़ी हैं।

टीएमसी नेता कुणाल घोष ने भी राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए तीखा हमला किया। उन्होंने रविवार को एक समाचार एजेंसी से बातचीत में आरोप लगाया कि राहुल गांधी भाजपा के लिए काम कर रहे हैं और धोखाधड़ी कर रहे हैं।

घोष ने कहा कि महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा और बिहार जैसे प्रमुख राज्यों में भाजपा को रोकना राहुल की जिम्मेदारी थी, लेकिन वे पूरी तरह विफल रहे। उन्होंने आगे कहा कि जहां टीएमसी भाजपा को हरा रही है, वहीं राहुल गांधी बंगाल आकर अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा को फायदा पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

वर्तमान में पश्चिम बंगाल से कांग्रेस के पास केवल एक लोकसभा सांसद ईशा खान चौधरी हैं, जो मालदा दक्षिण का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसके अलावा राज्य की विधानसभा में कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर चंद्रचूड़ सिंह के अनुसार, राहुल गांधी यह अच्छी तरह जानते हैं कि बंगाल में कांग्रेस के पास कोई मौका नहीं है। हालांकि, प्रासंगिक बने रहने के लिए वे ऐसे बयान दे रहे हैं। सिंह का मानना है कि इसके जरिए राहुल अपनी पार्टी को भाजपा और टीएमसी दोनों प्रमुख खिलाड़ियों से अलग खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।

वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि टीएमसी को निशाना बनाना कांग्रेस के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। रशीद किदवई ने कहा कि अगर ममता सरकार गिरती है, तो इसका फायदा कांग्रेस को नहीं बल्कि भाजपा को ही मिलेगा।

उन्होंने दिल्ली और आंध्र प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि क्षेत्रीय दलों के पतन से हमेशा भाजपा को ही लाभ हुआ है। किदवई के मुताबिक कांग्रेस को क्षेत्रीय पार्टियों पर हमला करने से कभी कोई फायदा नहीं मिला है, इसलिए यह कोई समझदारी भरा कदम नहीं है।

किदवई ने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति को भ्रमित करने वाला भी बताया। उनका कहना है कि कांग्रेस और टीएमसी की राजनीति और घोषणापत्रों में काफी समानता है।

उन्होंने कहा कि अगर ममता पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगता है, तो कांग्रेस पर भी यही आरोप लगता है। वर्ष 2029 में कांग्रेस को इन्हीं क्षेत्रीय दलों के समर्थन की जरूरत होगी और वह पहले ही जदयू (JDU) और टीडीपी (TDP) जैसी पार्टियों का साथ खो चुकी है।

हालांकि, कांग्रेस नेता और लोकसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने राहुल गांधी के बयानों का बचाव किया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि राहुल जमीनी राजनीतिक हकीकत को अच्छे से समझते हैं और उसी के अनुसार अपनी बात रख रहे हैं।

जेएनयू के सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज के फैकल्टी हरीश एस. वानखेड़े का मानना है कि कांग्रेस बंगाल चुनाव में कोई मुख्य खिलाड़ी नहीं है, इसलिए वे केवल अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं।

वानखेड़े ने बताया कि ऐतिहासिक रूप से कांग्रेस केरल में वामदलों और बंगाल में टीएमसी के खिलाफ लड़ती रही है। हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि वे 2029 तक इंडिया गठबंधन में वापस नहीं लौटेंगे।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि इंडिया गठबंधन कांग्रेस के ही नेतृत्व में रहेगा और इसमें कांग्रेस ‘बड़े भाई’ की भूमिका में है। ऐसे में कांग्रेस को क्षेत्रीय दलों को साथ लेकर चलना ही होगा, क्योंकि इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प मौजूद नहीं है। फिलहाल राहुल गांधी का रुख राजनीतिक मजबूरी से प्रेरित नजर आता है।

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