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गूगल वॉलेट में अब सुरक्षित रख सकेंगे अपना आधार, ऑफलाइन वेरिफिकेशन की मिलेगी सुविधा

| Updated: April 29, 2026 13:44

फिजिकल आधार कार्ड साथ रखने का झंझट खत्म! UIDAI और Google के इस नए फीचर से अब फोन में ही सुरक्षित रहेगा आपका डिजिटल आधार, जानें ऑफलाइन वेरिफिकेशन का पूरा तरीका।

गूगल ने यूआईडीएआई (UIDAI) के साथ हाथ मिलाया है, जिससे अब आप अपने आधार कार्ड की जानकारी गूगल वॉलेट में सुरक्षित रख सकते हैं। इस नई सुविधा का सीधा मतलब है कि जहाँ भी पहचान पत्र के रूप में आधार स्वीकार किया जाता है, वहाँ आप खुद को प्रमाणित करने के लिए सीधे अपने गूगल वॉलेट का इस्तेमाल कर सकेंगे।

यह सुविधा आपके पैन कार्ड या बैंक खाते को आधार से जोड़ने जैसी नहीं है, बल्कि यह आपकी सुविधा के लिए है। गूगल और यूआईडीएआई ने स्पष्ट किया है कि यह केवल आपकी पहचान के विवरण को स्टोर करने का एक आसान तरीका है।

फिलहाल यह वॉलेट वेरिफिकेशन चुनिंदा पार्टनर्स के साथ काम कर रहा है, जिनमें पीवीआर आईनॉक्स (PVR INOX) और भारतमैट्रिमोनी (BharatMatrimony) जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

हालाँकि यूआईडीएआई के साथ इस साझेदारी की घोषणा इस साल जनवरी में ही कर दी गई थी, लेकिन मंगलवार को गूगल ने जानकारी दी कि अब भारतीय यूज़र्स अपने आधार विवरण को वॉलेट में सेव कर सकते हैं।

यह प्रक्रिया ‘आधार वेरिफिएबल क्रेडेंशियल्स’ (Aadhaar Verifiable Credentials) के जरिए काम करती है, जो यूआईडीएआई द्वारा कुछ महीने पहले लॉन्च किया गया एक ऑफलाइन-वेरिफिकेशन प्रोटोकॉल है। इसका सीधा मतलब यह है कि आपका आधार विवरण फोन में इंस्टॉल किए गए वॉलेट ऐप पर पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा।

एक बार जब आप अपने आधार क्रेडेंशियल्स को गूगल वॉलेट में जोड़ लेते हैं, तो आप कई जरूरी स्थितियों में इसका आसानी से उपयोग कर सकते हैं। यह उम्र साबित करने, विभिन्न ऐप्स पर पहचान की पुष्टि करने या फॉर्म भरने जैसे कामों में बेहद मददगार साबित होगा।

इस प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत ‘सिलेक्टिव डिस्क्लोज़र’ (चयनित प्रकटीकरण) फीचर है। इसका मतलब है कि आपको हर बार अपनी पूरी आधार जानकारी साझा करने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि स्थिति के अनुसार सिर्फ नाम या उम्र जैसी चुनिंदा और जरूरी जानकारी ही साझा की जाएगी।

गूगल वॉलेट के ग्रुप प्रोडक्ट मैनेजर एलन स्टेपलबर्ग ने इस नई पहल पर बताया कि यूआईडीएआई के साथ अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए, अब भारत के उपभोक्ता अपने डिवाइस पर सीधे आधार क्रेडेंशियल्स सेव कर सकते हैं। यह नई क्षमता एक सुरक्षित और डिजिटल-फर्स्ट आईडी का निर्माण करती है, जिससे रोजमर्रा की सुविधाओं के लिए पहचान सत्यापित करना आसान हो जाता है।

गूगल इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से प्राइवेसी-फर्स्ट (गोपनीयता-प्रथम) दृष्टिकोण के रूप में पेश कर रहा है। आपके क्रेडेंशियल्स केवल आपके डिवाइस पर स्टोर रहते हैं और यह सिस्टम वैश्विक डिजिटल आईडी मानकों पर आधारित है। कंपनी का मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत डेटा को अनावश्यक रूप से साझा होने से रोकना है, साथ ही वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को तेज और सरल बनाना है।

अभी कुछ जगहों पर गूगल वॉलेट के जरिए आधार स्वीकार किया जा रहा है, लेकिन इस टेक दिग्गज का कहना है कि जल्द ही और भी प्लेटफॉर्म्स इस सूची का हिस्सा बनेंगे। कंपनी ने इस बात पर भी जोर दिया है कि आने वाले समय में माईगेट (MyGate) और स्नैबिट (Snabbit) भी गूगल वॉलेट के माध्यम से आधार वेरिफिकेशन को स्वीकार करना शुरू कर देंगे।

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