अहमदाबाद के चांदखेड़ा इलाके में दो मासूम बच्चों की रहस्यमय मौत का मामला अब बेहद उलझ गया है। प्रजापति परिवार के बयानों और घटनाक्रम में दिख रही खामियों को जोड़ने में जांचकर्ता दिन-रात जुटे हैं। तीन महीने की राहा और चार साल की मिश्री की मौत का असली कारण जानने के लिए विसरा रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले में जानबूझकर की गई हत्या के एंगल को बिल्कुल भी खारिज नहीं कर रहे हैं।
पुलिस अधिकारी उन संदिग्ध फैसलों की जांच कर रहे हैं जो इलाज के दौरान लिए गए थे। परिवार का दावा है कि उन्होंने दूषित बैटर खाने से जहर का शिकार होने के बाद अस्पताल का रुख किया था।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब माता-पिता, विमल और भावना का इलाज चल रहा था, तब गंभीर रूप से बीमार मिश्री को अस्पताल से छुट्टी क्यों दिला दी गई। फिलहाल विमल से पूछताछ जारी है, जबकि भावना अभी भी अस्पताल में भर्ती है।
इस पूरे मामले में एक बड़ी विसंगति यह भी है कि महज तीन महीने की बच्ची राहा डोसा कैसे खा सकती है। सच्चाई और जवाबदेही तय करने के लिए पुलिस अब डॉक्टरों, अस्पताल के कर्मचारियों और परिवार के अन्य सदस्यों के बयान दर्ज कर रही है। इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है और जांच में कई चौंकाने वाली परतें खुल रही हैं।
परिवार की आर्थिक स्थिति, पिता के रोजगार की अस्थिरता और मां की बेटे की चाहत जैसे पहलू शक की सुई परिवार की तरफ ही मोड़ रहे हैं। इसके अलावा दादा-दादी के बयानों में भी विरोधाभास मिला है, जिसके बाद पुलिस उनका पॉलीग्राफ टेस्ट कराने पर विचार कर रही है।
पुलिस ने शुरुआती जांच में ही डेयरी से खरीदे गए बैटर के दूषित होने की बात को नकार दिया था, क्योंकि उसी दुकान से बैटर खरीदने वाले अन्य ग्राहक पूरी तरह स्वस्थ पाए गए।
जांचकर्ताओं को परिवार द्वारा बताई गई टाइमलाइन पर भी गहरा संदेह है। परिवार के अनुसार, 1 अप्रैल को विमल ने दिन में खरीदे गए बैटर से बना डोसा खाया था।
इसके बाद 2 अप्रैल को भावना और मिश्री ने उसी बैटर का डोसा खाया। 3 अप्रैल तक चारों की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 4 अप्रैल को राहा और 5 अप्रैल को मिश्री ने दम तोड़ दिया। इस बीच भावना ने बचा हुआ बैटर डेयरी को यह कहते हुए लौटा दिया कि इससे उनका परिवार बीमार पड़ा है।
मिश्री की मौत के अगले दिन जब मामला सामने आया, तो परिवार ने डेयरी पर दूषित बैटर बेचने का आरोप लगाया। इसके तुरंत बाद पुलिस और एफएसएल टीमों ने मौके पर पहुंचकर सैंपल लिए। मामले की तह तक जाने के लिए 7 अप्रैल को राहा के शव को कब्र से निकालकर जांच की गई और चांदखेड़ा स्थित घर से कई संदिग्ध चीजें जब्त की गईं।
इससे पहले माता-पिता के खून के नमूनों में ‘एल्युमिनियम फॉस्फाइड’ नामक जहरीले कीटनाशक के अंश मिले थे। पूछताछ में विमल ने पुलिस को बताया कि उसने गेहूं को सुरक्षित रखने वाले पाउडर के दस पैकेट खरीदे थे, जिनमें यह रसायन पाया जाता है। उसने आठ पैकेट इस्तेमाल करने की बात कही, लेकिन बाकी दो पैकेट का वह कोई हिसाब नहीं दे सका।
इसके अलावा जांच में भावना की डायरी भी मिली है, जिसमें बेटे की चाहत की बात सामने आने पर मामले में एक नया मोड़ आ गया है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि वे हर एंगल से जांच कर रहे हैं और अब केवल फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर ही किसी ठोस और अंतिम नतीजे पर पहुंचा जा सकता है।
यह भी पढ़ें-
राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों से फिर गरमाई बहस: ‘रणनीति’ या मानसिक अस्थिरता?










