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अमरीका में वीज़ा पाने का खौफनाक ‘शॉर्टकट’: फर्जी लूटपाट मामले में एक और गुजराती ने बोस्टन कोर्ट में कबूला अपना जुर्म

| Updated: June 29, 2026 14:06

अहमदाबाद: अमेरिका में इमिग्रेशन और वीज़ा धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसके तार एक बार फिर गुजरात से जुड़े हैं। मैसाचुसेट्स के बोस्टन की एक संघीय अदालत में एक गुजराती व्यक्ति ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। इस शख्स पर आरोप है कि उसने अमेरिकी इमिग्रेशन का लाभ उठाने के लिए हथियारों के बल पर फर्जी लूटपाट की एक बड़ी साजिश रची थी।

इस मामले में 40 वर्षीय मितुल पटेल का नाम मुख्य रूप से सामने आया है, जो मैसाचुसेट्स के वॉर्सेस्टर इलाके में गैर-कानूनी तरीके से रह रहा था। बुधवार को अमेरिकी जिला न्यायाधीश म्युंग जे. जौन की अदालत में मितुल ने वीज़ा धोखाधड़ी की साजिश में शामिल होने के आरोप को स्वीकार कर लिया। अब इस मामले में 29 जुलाई को उसे सजा सुनाई जाएगी। गौरतलब है कि इस साल मार्च में इस पूरी साजिश को लेकर कुल 11 लोगों पर आरोप तय किए गए थे।

अमेरिकी अभियोजकों के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े की शुरुआत मार्च 2023 में हुई थी। इस शातिर नेटवर्क का सरगना राम पटेल था, जो खुद भी गुजराती मूल का है। राम पटेल ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर मैसाचुसेट्स और अन्य जगहों पर स्थित सुविधा स्टोर, शराब की दुकानों और फास्ट-फूड रेस्तरां में हथियारों के दम पर लूटपाट के फर्जी नाटक रचे थे। इस पूरी साजिश का मुख्य मकसद ‘यू गैर-आप्रवासी वीज़ा’ (U non-immigrant visas) हासिल करना था।

यह विशेष ‘यू वीज़ा’ अमेरिका में उन अपराध पीड़ितों को दिया जाता है जो किसी हिंसक घटना का शिकार हुए हों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जांच में मदद करते हों। अमेरिकी एजेंसियों ने बताया कि इस गिरोह का एक फर्जी लुटेरा स्टोर में घुसता था और आग्नेयास्त्र (बंदूक) जैसी दिखने वाली चीज से कर्मचारियों को धमकाता था। इसके बाद वह गल्ले से नकदी लूटकर फरार हो जाता था।

वीज़ा आवेदन के लिए पुलिस और प्रशासन को धोखा देने के मकसद से पूरी घटना को बाकायदा सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड करवाया जाता था। लूटपाट की इस घटना को असली रूप देने के लिए स्टोर के कर्मचारी जानबूझकर पुलिस को तब फोन करते थे, जब लुटेरा वहां से सुरक्षित भाग चुका होता था।

संघीय अधिकारियों ने खुलासा किया है कि इमिग्रेशन का लाभ चाहने वाले लोग पीड़ित बनने के एवज में मास्टरमाइंड राम पटेल को मोटी रकम चुकाते थे। वहीं, जिन दुकानों पर यह ड्रामा रचा जाता था, उनके मालिकों को भी अपनी जगह का इस्तेमाल करने देने के लिए पैसे दिए जाते थे। मितुल पटेल पर भी अक्टूबर 2023 में वॉर्सेस्टर के एक स्टोर में हुए ऐसे ही फर्जी लूटकांड में पीड़ित की भूमिका निभाने के लिए पैसे देने का आरोप है।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में मुख्य साजिशकर्ता राम पटेल के साथ-साथ बंदूकधारी और गेटअवे ड्राइवर के रूप में काम करने वाले बलविंदर सिंह को मई 2025 में ही दोषी ठहराया जा चुका है। अब मितुल पटेल का जुर्म कबूलना इस गिरोह के खिलाफ एक और बड़ी कानूनी जीत मानी जा रही है।

वीज़ा धोखाधड़ी की इस साजिश के तहत अधिकतम पांच साल की जेल और सुपरवाइज्ड रिलीज की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा दोषियों पर 2,50,000 डॉलर (लगभग 2.4 करोड़ रुपये) तक का भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। सजा की अवधि पूरी होने के बाद इन अपराधियों को अमेरिका से निर्वासित (डिपोर्ट) किए जाने की भी पूरी संभावना है।

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