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मौत से ठीक 34 मिनट पहले की वो सीक्रेट कॉल: केतन अग्रवाल मर्डर केस की रूह कंपा देने वाली इनसाइड स्टोरी

| Updated: June 29, 2026 13:50

पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल की मौत कोई हादसा नहीं, बल्कि मंगेतर सिया और उसके प्रेमी की खौफनाक साजिश थी। जानिए मौत से 34 मिनट पहले की उस 'सीक्रेट कॉल' और 'घोस्ट स्ट्रेटजी' का पूरा सच।

पुणे के मशहूर कारोबारी केतन अग्रवाल की सनसनीखेज हत्या की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि एक बेहद सोची-समझी साजिश थी।

पुणे ग्रामीण पुलिस के अनुसार 25 वर्षीय केतन की जान उसकी मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने ली है। इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के लिए सीक्रेट फोन कॉल, डिलीट की गई चैट्स और डिजिटल धोखाधड़ी का सहारा लिया गया।

इस पूरे मामले में सबसे अहम सबूत वह फोन कॉल है जो केतन की मौत से ठीक 34 मिनट पहले की गई थी। सिया ने यह कॉल उस वक्त की थी जब वह केतन के साथ ही मौजूद थी।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में 18 जून को लोहगढ़ किले पर हुई वारदात से कुछ देर पहले सिया और चेतन की बातचीत की पुष्टि हुई है। जांचकर्ताओं का मानना है कि यह हत्या से पहले किया गया अंतिम कन्फर्मेशन कॉल था।

पुलिस को शक है कि सिया ने इस कॉल के जरिए चेतन को किले के उस सुनसान इलाके की सटीक लोकेशन बताई थी। उसने यह भी कन्फर्म किया था कि आसपास कोई पर्यटक नहीं है, जिसका सीधा मतलब था कि हत्या के लिए रास्ता पूरी तरह साफ है।

अब यह फोन कॉल इस खौफनाक साजिश को साबित करने वाले सबसे मजबूत डिजिटल सबूतों में से एक बन गया है। इसके अलावा आरोपियों ने अपने पीछे छोड़े गए डिजिटल सुरागों को मिटाने की भी पूरी कोशिश की थी।

पुलिस जांच में पता चला है कि सिया और चेतन ने करीब तीन महीने के व्हाट्सएप चैट, इंस्टाग्राम मैसेज और वॉयस नोट्स डिलीट कर दिए थे। यह सब हत्या की प्लानिंग से जुड़े सबूतों को नष्ट करने के इरादे से किया गया था।

फिलहाल साइबर फोरेंसिक विशेषज्ञ इस डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने में जुटे हैं। साजिश की पूरी टाइमलाइन को समझने के लिए इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) एड्रेस, मोबाइल लोकेशन लॉग और रिकवर की गई चैट हिस्ट्री का गहराई से विश्लेषण किया जा रहा है।

यह बरामद डिजिटल सबूत भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (हत्या) के तहत अभियोजन पक्ष के मामले का एक बेहद अहम हिस्सा बनेगा। पुलिस का मानना है कि इस हत्या की साजिश मई के अंत तक ही पूरी कर ली गई थी।

सूत्रों के मुताबिक 18 जून का दिन केतन को रास्ते से हटाने की पहली कोशिश नहीं थी। जांचकर्ताओं का दावा है कि इससे पहले 14 जून को भी सिया ने लोहगढ़ किले के दौरे के दौरान केतन को चट्टान से धक्का देने का प्रयास किया था।

उस वक्त केतन ने पास की झाड़ियों को पकड़ लिया था और अपनी जान बचाने में कामयाब रहा था। पुलिस के अनुसार तब सिया ने खुद पर शक होने से बचने के लिए सांप से डरकर गलती से धक्का लगने की झूठी कहानी गढ़ी थी।

इस नाकाम कोशिश के बाद दोनों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया। तय हुआ कि इस बार चेतन खुद मौके पर मौजूद रहेगा ताकि केतन के बचने की कोई गुंजाइश न रहे।

हत्या वाले दिन चेतन चौधरी ने डिजिटल दुनिया से गायब होने की एक बेहद चालाक ‘घोस्ट स्ट्रेटजी’ अपनाई। सुबह करीब 7 बजे उसने जानबूझकर अपने मोबाइल का इंटरनेट बंद कर दिया ताकि टेलीकॉम टावर लोहगढ़ किले की तरफ उसकी लोकेशन को ट्रैक न कर सकें।

करीब एक घंटे बाद उसने अपना स्मार्टफोन अपनी दुकान पर ही छोड़ दिया। उसने अपने कर्मचारियों को निर्देश दिया कि वे सभी इनकमिंग कॉल्स का जवाब दें ताकि कॉल करने वालों को लगे कि वह काम पर ही है।

अपनी लोकेशन छिपाने के लिए चेतन ने सफर के दौरान जरूरी कॉल करने के लिए एक कर्मचारी का फोन उधार लिया था। जांचकर्ताओं के अनुसार यह डिजिटल रूप से अदृश्य रहते हुए खुद को बेगुनाह साबित करने की एक सोची-समझी चाल थी।

पहचान छिपाने की एक और कोशिश सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गई। 33 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी के बावजूद चेतन ने किले की चढ़ाई करते समय एक मोटा विंटर हुडी पहन रखा था।

विडंबना यह है कि मौसम के विपरीत पहने गए इस अजीबोगरीब कपड़े ने उसे सुरक्षा कैमरों और चश्मदीदों की नजरों में और भी ज्यादा संदिग्ध बना दिया।

जांचकर्ताओं के अनुसार 18 जून को सिया और केतन विंचू काटा रिज के पास एक सुनसान जगह पर पहुंचे। वहां पहुंचते ही सिया नीचे बैठ गई, जो इस बात का पूर्व-निर्धारित इशारा था कि आसपास कोई नहीं है।

तभी कुछ दूरी से उनका पीछा कर रहा चेतन अपनी छिपी हुई जगह से बाहर निकला। पुलिस का दावा है कि उसने केतन को करीब 400 फीट गहरी खाई में धक्का दे दिया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं और उसकी मौत हो गई।

वारदात के बाद चेतन लगभग 10 घंटे और 40 मिनट तक पूरी तरह ऑफलाइन रहा। शाम करीब 5.40 बजे उसने अपना इंटरनेट कनेक्शन वापस चालू किया, यह सोचकर कि उसकी यह चालाकी कामयाब हो गई है।

हालांकि लंबे समय तक डिजिटल रूप से गायब रहने की इसी हरकत ने पुलिस का शक और गहरा कर दिया। सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और टेलीकॉम रिकॉर्ड ने मिलकर उसके इस झूठे बचाव को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

पुलिस ने यह पता लगा लिया कि चेतन का निजी फोन दुकान पर था और वह खुद कॉल रिसीव नहीं कर रहा था। तकनीकी निगरानी और लोकेशन विश्लेषण ने साबित कर दिया कि वह डिजिटल रूप से गायब दिखने के बावजूद लोहगढ़ की तरफ गया था।

हत्या से ठीक एक दिन पहले 17 जून को पुणे के लुल्लानगर इलाके के एक कैफे में सिया और चेतन की मुलाकात भी जांच का अहम हिस्सा है। पुलिस के मुताबिक दोनों ने शाम 4.30 बजे से 5.30 बजे के बीच करीब एक घंटा साथ बिताया था, जहां संभवतः हत्या की अंतिम रूपरेखा तय की गई थी।

इस बीच दोनों परिवारों के बयानों ने केस में एक नया मोड़ ला दिया है। सिया के बड़े भाई साहिल गोयल ने पुलिस को बताया कि सिया ने कभी शादी से इनकार करने की बात परिवार को नहीं बताई थी।

साहिल के अनुसार अगर सिया चेतन से शादी करने की इच्छा जताती तो परिवार को कोई आपत्ति नहीं होती। उनका तर्क था कि चेतन उसी समुदाय का है और एक संपन्न कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखता है।

केतन के परिवार ने भी बिल्कुल ऐसे ही दावे किए हैं। उसके पिता का कहना है कि उन्हें कभी इस बात की भनक नहीं लगी कि सिया उनके बेटे से शादी नहीं करना चाहती। उन्होंने पुलिस से कहा कि अगर उन्हें पता होता तो वे अपने बेटे के लिए कोई दूसरी लड़की ढूंढ लेते।

हैरानी की बात यह है कि पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान सिया ने कथित तौर पर कबूल किया कि उसे माता-पिता को शादी से इनकार करने की तुलना में केतन को मारना ज्यादा आसान लगा।

सिया को डर था कि सच बोलने से उसका परिवार निराश होगा। इसलिए उसने चेतन के साथ अपने रिश्ते को छिपाए रखा और नवंबर में होने वाली शादी की तैयारियां भी चलने दीं।

घटनाक्रम के अनुसार 18 जून की सुबह केतन घर से निकला और पुणे-मुंबई हाईवे पर किवाले ब्रिज के पास से सिया को साथ लेकर लोहगढ़ किले की ओर गया था। सुबह करीब 10.45 बजे सिया ने केतन की मां को फोन कर उसके खाई में गिरने की झूठी खबर दी।

स्थानीय निवासियों और पुलिस ने केतन को रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शुरुआत में इसे एक दुखद हादसा माना जा रहा था।

लेकिन यह केस तब पलट गया जब 21 जून को केतन के पिता विशाल देवीचंद अग्रवाल और उनके दोस्तों नवदीप जिंदल और तरुण मित्तल ने घटनास्थल का दौरा किया। चट्टान का मुआयना करने के बाद परिवार को यकीन हो गया कि यह कोई हादसा नहीं था।

उनके शक के आधार पर अंततः एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें सिया गोयल और चेतन चौधरी पर केतन को खाई में धकेल कर मारने का आरोप लगाया गया।

जैसे-जैसे पुलिस डिलीट किए गए डेटा को रिकवर कर रही है और डिजिटल सबूतों को जोड़ रही है, यह मामला और भी साफ होता जा रहा है। आखिरी फोन कॉल, मिटाई गई चैट, हत्या की पुरानी कोशिश और ‘घोस्ट स्ट्रेटजी’ ने मिलकर महाराष्ट्र की इस सबसे खौफनाक मर्डर मिस्ट्री की परतें खोल दी हैं।

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