गुजरात में पिछले एक साल के भीतर कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की बिक्री में बड़ा उछाल देखा गया है। खास बात यह है कि दवाओं की मांग में हुई यह वृद्धि, कैंसर के नए मामलों में हो रही धीमी बढ़ोतरी के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज है।
स्वास्थ्य और फार्मा सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इलाज के बदलते तरीके, नई और आधुनिक थेरेपी का बढ़ता चलन और बीमारियों की समय पर पहचान होना इस तेज उछाल की मुख्य वजहें हैं।
फार्माट्रैक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून में समाप्त हुए मूविंग एनुअल टोटल (MAT) में गुजरात के एंटी-नियोप्लास्टिक्स (कैंसर रोधी) ड्रग्स सेगमेंट में साल-दर-साल 23.1 प्रतिशत की शानदार ग्रोथ दर्ज की गई है। पिछले साल यानी जून 2025 के MAT में यह वृद्धि मात्र 9.5 प्रतिशत थी। इस अवधि के दौरान राज्य में इन दवाओं की कुल बिक्री 155.6 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
साल 2026 की शुरुआत से ही इस ग्रोथ ने रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी थी। जहां जनवरी में MAT ग्रोथ केवल 1 प्रतिशत थी, वहीं मार्च में यह बढ़कर 18.2 प्रतिशत, अप्रैल में 19.7 प्रतिशत, मई में 22.9 प्रतिशत और जून में 23.1 प्रतिशत पर पहुंच गई।
हालांकि, कैंसर विशेषज्ञों (ऑन्कोलॉजिस्ट्स) का कहना है कि दवाओं की बिक्री में आई इस अचानक तेजी को कैंसर के मरीजों की संख्या में भारी वृद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
स्टर्लिंग अस्पताल के वरिष्ठ ऑन्को-सर्जन डॉ. नितिन सिंघल ने स्पष्ट किया कि जनसंख्या-आधारित कैंसर रजिस्ट्रियां अभी भी मामलों में एक क्रमिक और धीमी वृद्धि ही दिखा रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में जागरूकता और स्क्रीनिंग कार्यक्रमों के विस्तार से शुरुआती चरण में ही बीमारी पकड़ में आ रही है, जिससे अधिक से अधिक मरीज इलाज के दायरे में आ रहे हैं।
उद्योग विशेषज्ञों ने इस ट्रेंड का श्रेय विशेष दवाओं तक लोगों की आसान पहुंच और नई थेरेपी की बढ़ती स्वीकार्यता को दिया है। फार्माट्रैक की वाइस-प्रेसिडेंट (कमर्शियल) शीतल सापले के मुताबिक, इन विशेष दवाओं की सप्लाई चेन बेहतर हुई है और जागरूकता बढ़ने से इनकी पहुंच भी आसान हुई है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक थेरेपी तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी का उपयोग भी बढ़ रहा है, जो इस पूरे ग्रोथ ट्रेंड में साफ नजर आता है। मॉलिक्यूल-वाइज बिक्री के आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं। पर्टुज़ुमैब-ट्रैस्टुज़ुमैब (pertuzumab-trastuzumab) कॉम्बिनेशन के साथ-साथ अलग-अलग बेची जाने वाली इन दोनों दवाओं और अन्य कई टार्गेटेड थेरेपी की मांग में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है।
नारायणा अस्पताल के कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. ऋषभ कोठारी का कहना है कि अब अधिक मरीज ऐसी स्थिति में विशेषज्ञों तक पहुंच रहे हैं जहां उनका प्रभावी इलाज पूरी तरह से संभव है। उनके अनुसार प्रिसिजन मेडिसिन, इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी ने कई तरह के कैंसर के परिणामों को पूरी तरह से बेहतर बना दिया है।
हालांकि, ये उपचार काफी महंगे और संसाधन-गहन होते हैं। ऑन्कोलॉजी का यह बढ़ता बाजार कैंसर केयर में हो रही प्रगति के साथ-साथ गुजरात भर में स्क्रीनिंग, डायग्नोस्टिक सुविधाओं और किफायती इलाज की पहुंच बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता को भी दर्शाता है। विशेषज्ञों ने यह भी जोड़ा कि इलाज के प्रोटोकॉल में बदलाव और लंबे समय तक चलने वाले उपचार के कारण भी दवाओं की खपत में यह रिकॉर्ड वृद्धि देखने को मिली है।
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