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100 करोड़ की फिरौती, अल-कायदा का खौफ: माली में अगवा हुए गुजरात के 75 वर्षीय हीरा कारोबारी धीरू रामाणी

| Updated: July 16, 2026 17:37

माली में सोने के खनन प्रोजेक्ट की निगरानी कर रहे 75 वर्षीय गुजराती कारोबारी धीरू रामाणी और दो अन्य भारतीयों को अल-कायदा आतंकियों ने बनाया बंधक। परिवार बिना सरकारी मदद के कर रहा है 100 करोड़ की फिरौती पर बातचीत।

गुजरात की डायमंड सिटी यानी सूरत और पूरे आभूषण व्यापार जगत में इन दिनों दहशत और चिंता का माहौल है। पश्चिमी अफ्रीकी देश माली से 75 वर्षीय गुजराती हीरा कारोबारी धीरू रामाणी के अपहरण की सनसनीखेज खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि करीब तीन महीने पहले उनका अपहरण कर लिया गया था। उनके साथ दो अन्य भारतीयों को भी अगवा किया गया है, जिनमें उनका रसोइया और एक इलेक्ट्रीशियन शामिल हैं।

परिवार के करीबी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस खौफनाक अपहरण के पीछे अल-कायदा से जुड़े एक आतंकी समूह का हाथ माना जा रहा है। आतंकियों ने इन तीनों लोगों को जिंदा छोड़ने के एवज में 100 करोड़ रुपये की भारी-भरकम फिरौती मांगी है। फिलहाल रामाणी का परिवार उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए अपहर्ताओं के साथ लगातार बातचीत कर रहा है।

इस मामले में परिवार के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि फिरौती की रकम पर बातचीत करने और अपहृत लोगों को वापस लाने के अलावा उनके पास कोई और विकल्प नहीं बचा है। उनका कहना है कि परिवार अपने स्तर पर ही प्रयास कर रहा है और अभी तक किसी भी सरकारी एजेंसी को इसमें शामिल नहीं किया गया है।

अपहरणकर्ताओं ने परिवार को यह साबित करने के लिए कि सभी पीड़ित जिंदा और सुरक्षित हैं, रामाणी के साथ वीडियो कॉल की व्यवस्था भी की थी। इस पूरे मामले, सौदेबाजी और संचार का जिम्मा मुख्य रूप से अमेरिका में रह रहा रामाणी का परिवार संभाल रहा है।

धीरू रामाणी के परिवार का हीरा व्यापार से बहुत पुराना और गहरा नाता रहा है। हालांकि, कुछ साल पहले ही उन्होंने अपने कारोबार का विस्तार करते हुए सोने के खनन (गोल्ड माइनिंग) के क्षेत्र में भी कदम रखा था। इसी सिलसिले में उन्होंने माली में एक स्वर्ण खनन परियोजना में भारी निवेश किया था। वह पिछले दो सालों से माली में ही रहकर वहां के काम और संचालन की निगरानी कर रहे थे।

अपनी इसी परियोजना की देखरेख के दौरान ही अज्ञात लोगों ने रामाणी को अगवा कर लिया। यह घटना असल में किस सटीक जगह और किन परिस्थितियों में घटी, इसे लेकर अभी तक पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। इसके साथ ही, स्थानीय या अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों की तरफ से भी अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि नहीं आई है।

इस घटना ने सूरत के व्यापारिक हलकों में चिंता की गहरी लहर दौड़ा दी है, खासकर उन कारोबारियों के बीच जिनका निवेश उच्च जोखिम वाले विदेशी क्षेत्रों में है। पूरा व्यापारी वर्ग रामाणी और अन्य दो भारतीयों की सुरक्षित वापसी की खबरों का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।

गौरतलब है कि अपहरण की ऐसी ही बढ़ती घटनाओं को देखते हुए हाल ही में भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी माली में काम करने वाले भारतीयों के लिए एक विशेष सतर्कता परामर्श (एडवाइजरी) जारी किया था।

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