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प्री-IPO निवेश के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा: ‘जीरो अलॉटमेंट’ के झांसे में आकर लैब टेक्नीशियन ने गंवाए 70 लाख रुपये

| Updated: July 18, 2026 16:00

व्हाट्सएप ग्रुप और 'जीरो अलॉटमेंट' के विज्ञापन ने लूटी जीवन भर की गाढ़ी कमाई, जानें कैसे सिविल अस्पताल की कर्मचारी बनी साइबर ठगी का शिकार

अहमदाबाद: गांधीनगर के सिविल अस्पताल में काम करने वाली एक 37 वर्षीय महिला लैब टेक्नीशियन ऑनलाइन ठगी का बुरी तरह शिकार हो गई हैं। जालसाजों ने प्री-आईपीओ अलॉटमेंट का लालच देकर उनसे करीब 69.64 लाख रुपये ऐंठ लिए। इस पूरे वित्तीय घोटाले की शुरुआत सोशल मीडिया के महज एक विज्ञापन से हुई थी, जो बाद में एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए बड़े धोखे में तब्दील हो गया।

गांधीनगर साइबर पुलिस स्टेशन में हाल ही में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, इस पूरे मामले की नींव एक लुभावने विज्ञापन के जरिए रखी गई। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसने सोशल मीडिया पर “टायर्ड ऑफ जीरो अलॉटमेंट?” (क्या आप जीरो अलॉटमेंट से थक चुके हैं?) लिखा हुआ एक विज्ञापन देखा था। शेयर बाजार के इस शानदार ऑफर से आकर्षित होकर उन्होंने अनजाने में दिए गए लिंक पर क्लिक कर दिया।

लिंक पर क्लिक करने के तुरंत बाद महिला को एक पीडीएफ फाइल और एक अन्य लिंक प्राप्त हुआ। वहां उन्हें अपना नाम और पैन कार्ड का विवरण दर्ज करने के लिए कहा गया। यह व्यक्तिगत जानकारी देते ही उन्हें “वेल्थ मैनेजमेंट-5” नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ दिया गया। इस ग्रुप के सदस्य हमेशा प्री-आईपीओ अलॉटमेंट और उससे होने वाले छप्परफाड़ मुनाफे के बारे में चर्चा किया करते थे।

कुछ दिनों बाद शिकायतकर्ता को एक नया लिंक और कुछ महत्वपूर्ण दिखने वाले दस्तावेज भेजे गए, जिनमें एक “एग्रीमेंट” और “नॉमिनी फॉर्म” शामिल था। इतना ही नहीं, उन्हें एक फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए लॉगिन आईडी और पासवर्ड भी मुहैया कराया गया। महिला का आरोप है कि इसके बाद उन्हें प्री-आईपीओ में निवेश करने के बहाने कई अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने का सख्त निर्देश दिया गया।

उनके निवेश की शुरुआत इसी साल जनवरी महीने में 2 लाख रुपये के ट्रांसफर के साथ हुई। महिला का दावा है कि इस निवेश के तुरंत बाद उन्हें प्लेटफॉर्म पर भारी मुनाफा दिखाया गया। उनका भरोसा जीतने के लिए शातिर ठगों ने उन्हें 68,000 रुपये निकालने की अनुमति भी दे दी। इस छोटी सी निकासी ने अपना काम किया और महिला का उस निवेश योजना और व्हाट्सएप ग्रुप पर अंधा विश्वास कायम हो गया।

यही वह मोड़ था जहां ठग अपनी बड़ी चाल में पूरी तरह कामयाब हो गए। सिस्टम पर पूरा भरोसा हो जाने के बाद, पीड़िता ने जनवरी में ही कई अलग-अलग तारीखों पर अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई ट्रांसफर कर दी। इन बड़े ट्रांजैक्शन में 5 लाख, 4 लाख, 15 लाख, 17 लाख और 17.05 लाख रुपये की भारी रकमें शामिल थीं।

महिला के मुताबिक, कुछ ही समय बाद उनके निवेश एप्लिकेशन के डैशबोर्ड पर 1.03 करोड़ रुपये का भारी-भरकम मुनाफा दिखने लगा। लेकिन जब उन्होंने इस मुनाफे को अपने बैंक खाते में निकालने का अनुरोध किया, तो जालसाजों ने एक नई शर्त रख दी। उनसे कहा गया कि पैसे निकालने के लिए उन्हें कुल मुनाफे का 10 प्रतिशत टैक्स के रूप में देना होगा, जो कि 10.26 लाख रुपये था। मुनाफे के लालच में आकर महिला ने 4 फरवरी को यह रकम भी ट्रांसफर कर दी।

इस तरह शिकायतकर्ता ने अपने बैंक खाते से कुल 70.32 लाख रुपये जालसाजों को ट्रांसफर कर दिए, जबकि वह पूरे समय में केवल 68,000 रुपये ही वापस निकाल सकी।

जब बची हुई भारी रकम को निकालने के उनके सारे प्रयास विफल हो गए, तब जाकर उन्हें अहसास हुआ कि उनके साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है। ठगी का शिकार होने की पुष्टि होने पर उन्होंने तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया। इस मामले में पुलिस ने बुधवार को आधिकारिक रूप से केस दर्ज कर लिया है और ठगों की तलाश शुरू कर दी है।

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