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गिरनार में शेर हमला: तीर्थ मार्गों पर शोर-शराबा पूरी तरह बैन, श्रद्धालुओं का डिजिटल रजिस्ट्रेशन हुआ अनिवार्य

| Updated: July 18, 2026 14:01

जूनागढ़ प्रशासन का बड़ा फैसला: वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए डीजे-लाउडस्पीकर पर रोक, नियम तोड़ने वालों पर दर्ज होगा केस

राजकोट: गिरनार में एक 11 वर्षीय बच्चे पर शेर के जानलेवा हमले के बाद जूनागढ़ जिला प्रशासन ने बेहद सख्त कदम उठाया है। वन्यजीवों की सुरक्षा और श्रद्धालुओं को सुरक्षित रखने के मकसद से गिरनार तीर्थ यात्रा मार्गों पर किसी भी तरह के शोर-शराबे को लेकर कड़ी पाबंदियां लागू कर दी गई हैं।

सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट ने शुक्रवार को इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी की। इस नए आदेश के तहत गिरनार की नई सीढ़ियों, पुरानी सीढ़ियों और दातार सीढ़ी मार्ग को तत्काल प्रभाव से ‘साइलेंस जोन’ (शांत क्षेत्र) घोषित कर दिया गया है।

गुजरात के सबसे प्रमुख तीर्थ स्थलों में शुमार गिरनार में हर साल लाखों की संख्या में हिंदू और जैन श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। हाल ही में गिरनार रोपवे की शुरुआत होने के बाद से यहां आने वाले पर्यटकों और भक्तों की संख्या में भारी इजाफा देखा गया है।

अधिकारियों का कहना है कि तीर्थयात्रियों द्वारा इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, ब्लूटूथ स्पीकर, म्यूजिक सिस्टम और अन्य ध्वनि उत्पन्न करने वाले उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल से गिरनार के जंगलों में रहने वाले वन्यजीवों को भारी परेशानी हो रही थी।

प्रशासन ने इस फैसले से पहले कई धार्मिक संगठनों की अपीलों पर भी गौर किया। श्री विश्व जैन संगठन ने जानकारी दी थी कि एक जुलाई से शुरू हुई ‘श्री नेमि गिरनार धर्म यात्रा’ 19 जुलाई को गिरनार पहुंचेगी। इसके अगले दिन यानी 20 जुलाई को जैन तीर्थंकर श्री नेमिनाथ भगवान का निर्वाण दिवस मनाया जाएगा।

इसके साथ ही रैवतक समिति जूनागढ़, श्री गुरु दत्तात्रेय समस्त भक्त मंडल महाराष्ट्र और गोरक्षनाथजी सेवा संघ जूनागढ़ ने भी अपने बड़े धार्मिक आयोजनों की रूपरेखा प्रशासन से साझा की थी। दत्तापादुका पूजा और श्री अंबा माताजी मंदिर में सीढ़ी पूजा जैसे कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है। इसी भीड़ और वन्यजीव संरक्षण को देखते हुए यह नया नियम लागू किया गया है।

नई अधिसूचना के अनुसार, तय किए गए मार्गों पर लाउडस्पीकर, डीजे, म्यूजिक सिस्टम, ढोल और अन्य सभी संगीत वाद्ययंत्रों के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। मोबाइल फोन पर तेज आवाज में गाने बजाना, नारे लगाना, जयकारे लगाना या ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाली किसी भी गतिविधि पर अब सख्त रोक है।

अधिकारियों के मुताबिक, इन पाबंदियों का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों को किसी भी तरह के उकसावे या परेशानी से बचाना है। प्रशासन की कोशिश है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष के खतरे को कम से कम किया जा सके।

प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि इस अधिसूचना का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

तीर्थयात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने और आपात स्थिति में त्वरित सहायता सुनिश्चित करने के लिए जूनागढ़ जिला प्रशासन ने एक पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किया है। इसके तहत माउंट गिरनार जाने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए ‘इन’ (IN) और ‘आउट’ (OUT) पंजीकरण प्रणाली लागू की गई है।

इस नई व्यवस्था के अंतर्गत सभी तीर्थयात्रियों को अपनी यात्रा शुरू करने से पहले अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। चाहे वे नई सीढ़ियों का इस्तेमाल करें, पुरानी सीढ़ियों का या फिर रोपवे का, सभी को क्यूआर कोड स्कैन करके अपनी प्रवेश की एंट्री दर्ज करनी होगी। इसी तरह दर्शन करके वापस लौटने पर उन्हें अपनी वापसी की एंट्री भी अनिवार्य रूप से करनी होगी।

यह डिजिटल प्रणाली प्रशासन को तीर्थयात्रियों की आवाजाही पर बेहतर निगरानी रखने में मदद करेगी। साथ ही किसी भी आपात स्थिति के दौरान लोगों तक तुरंत सहायता पहुंचाना काफी आसान हो जाएगा।

जैन समुदाय की श्री नेमि गिरनार धर्म यात्रा और भगवान नेमिनाथ के निर्वाण दिवस को देखते हुए जूनागढ़ प्रशासन ने 19 से 21 जुलाई तक भवनाथ क्षेत्र और पांचवीं चोटी तक पूरे गिरनार पर्वत पर निषेधाज्ञा लागू कर दी है।

दिल्ली से शुरू हुई यह पवित्र यात्रा 19 जुलाई को जूनागढ़ पहुंचने वाली है। 20 जुलाई को भक्त पांचवीं चोटी पर भगवान नेमिनाथ का निर्वाण (मोक्ष कल्याणक) मनाएंगे, जहां विशेष प्रार्थनाएं की जाएंगी और पारंपरिक रूप से लड्डू चढ़ाए जाएंगे।

गिरनार की पांचवीं चोटी हिंदुओं के लिए भी गहरी आस्था का केंद्र है, क्योंकि यहां भगवान गुरु दत्तात्रेय का पवित्र मंदिर स्थित है। इसी अहमियत को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने ये पाबंदियां लगाई हैं, ताकि सार्वजनिक शांति सुनिश्चित की जा सके, सांप्रदायिक सौहार्द बना रहे और सभी धार्मिक गतिविधियां बिना किसी बाधा के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकें।

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