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अब फ्रीलांसर, गिग वर्कर्स और स्वरोजगार वालों का भी कटेगा PF, EPFO ला रहा है ‘यूनिवर्सल योजना’

| Updated: July 17, 2026 16:54

EPFO की नई 'यूनिवर्सल पीएफ योजना' से असंगठित क्षेत्र, फ्रीलांसर्स और गिग वर्कर्स को भी मिलेगी रिटायरमेंट की गारंटी, जानिए कैसे उठा सकेंगे टैक्स छूट और लचीले निवेश का फायदा।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) जल्द ही देश के लाखों कामगारों को एक सुरक्षित भविष्य का तोहफा देने जा रहा है। अब असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों, गिग वर्कर्स और स्वरोजगार (सेल्फ-एंप्लॉयड) करने वाले लोगों को भी पीएफ के दायरे में लाया जाएगा। इसके लिए संस्था एक खास ‘यूनिवर्सल प्रोविडेंट फंड स्कीम’ का ढांचा तैयार कर रही है।

इस नई योजना के तहत सब्सक्राइबर्स को अपनी कमाई का एक हिस्सा पीएफ में जमा करने की आजादी होगी, जिसमें वे अपनी सुविधा के अनुसार रोजाना या सालाना आधार पर अंशदान कर सकेंगे।

सबसे बड़ी राहत यह है कि इसमें मौजूदा ईपीएफओ मॉडल की तरह ही टैक्स छूट का पूरा फायदा मिलेगा। इसके तहत सालाना 2.5 लाख रुपये तक के योगदान और उस पर मिलने वाले ब्याज को पूरी तरह से टैक्स फ्री रखा जाएगा।

पैसे निकालने (विड्रॉल) की प्रक्रिया को भी काफी लचीला और आधुनिक बनाया जा रहा है। नए नियम के तहत खाताधारकों को रिटायरमेंट के बाद भी अपना पूरा फंड ईपीएफओ के पास सुरक्षित रखने की अनुमति दी जा सकती है।

अधिकारियों के मुताबिक, नए सब्सक्राइबर्स को ‘सिस्टेमैटिक विड्रॉल प्लान’ (SWP) चुनने का विकल्प मिलेगा, जिससे वे यह तय कर सकेंगे कि उन्हें शुरुआत में ज्यादा पैसा चाहिए या बाद में। उम्मीद है कि यह शानदार सुविधा मौजूदा पीएफ खाताधारकों को भी उपलब्ध कराई जाएगी।

इस महत्वकांक्षी पहल का बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए ईपीएफओ सिंगापुर जैसे देशों के सफल ग्लोबल मॉडलों का गहराई से अध्ययन कर रहा है। यह पूरी तरह से स्व-वित्तपोषित (सेल्फ-फाइनेंसिंग) योजना होगी, जिसमें कोई भी सरकारी बजटीय सहायता शामिल नहीं होगी। यह ‘पीएम श्रम योगी मानधन योजना’ से बिल्कुल अलग है, क्योंकि मानधन योजना में पेंशन के लिए केंद्र सरकार की ओर से 50 प्रतिशत का वित्तीय योगदान दिया जाता है।

वर्तमान में ईपीएफओ का लाभ केवल उन संस्थानों के कर्मचारियों को मिलता है, जहां 20 से अधिक लोग काम करते हैं। अब श्रम मंत्रालय इस रिटायरमेंट सेविंग के दायरे को इससे कहीं आगे ले जाना चाहता है। हालांकि, अभी तक ईपीएफओ को इसका आधिकारिक जनादेश (मैंडेट) नहीं मिला है, लेकिन संस्था ने इस योजना के लिए जरूरी बेहतरीन आईटी आर्किटेक्चर को विकसित करने का टेंडर जारी कर दिया है।

नए लेबर कोड के लागू होने के हिस्से के रूप में, सरकार ने पहले ही टैक्सी एग्रीगेटर्स और फूड डिलीवरी ऐप्स जैसी कंपनियों के लिए अपने प्लेटफॉर्म के वर्कर्स को पोर्टल पर रजिस्टर करना अनिवार्य कर दिया है। यदि ईपीएफओ की यह योजना धरातल पर उतरती है, तो एक फ्रीलांस कंसल्टेंट के तौर पर काम करने वाला व्यक्ति भी आसानी से अपने सुरक्षित बुढ़ापे और रिटायरमेंट की बेहतरीन प्लानिंग कर सकेगा।

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