सुप्रीम कोर्ट ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टुअर्ट स्टेंस और उनके दो बेटों की हत्या के दोषी दारा सिंह की समय से पहले रिहाई (माफी) की याचिका पर अंतिम फैसला लेने के लिए ओडिशा सरकार को 19 अगस्त तक का समय दिया है। साल 2000 से जेल में बंद दारा सिंह बिना एक भी दिन की पैरोल के 26 साल से अधिक का समय सलाखों के पीछे बिता चुका है। शीर्ष अदालत ने मौखिक रूप से यह भी सुझाव दिया है कि राज्य सरकार स्वतंत्रता दिवस तक उसकी रिहाई पर विचार कर सकती है।
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विजय विश्नोई की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार की समिति से जल्द से जल्द अपना निर्णय लेने की अपेक्षा जताई है। दारा सिंह के वकील एपी सिंह ने बताया कि सजा समीक्षा बोर्ड इस याचिका पर विचार करने के लिए बैठक कर चुका है, लेकिन पते के सत्यापन (एड्रेस वेरिफिकेशन) के लिए उन्हें अभी कुछ और समय चाहिए। पीठ की स्पष्ट मंशा है कि तय समय सीमा से पहले ही राज्य सरकार इस मामले में कोई ठोस कदम उठाए।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, राज्य का सजा समीक्षा बोर्ड दारा सिंह की रिहाई की अर्जी पर सकारात्मक रुख अपना रहा है। जेल में लंबे समय तक रहने के बावजूद उसका आचरण लगातार अच्छा रहा है। इसी अच्छे व्यवहार के चलते वह राज्य की सजा माफी नीति के तहत रिहाई का मजबूत पात्र बन गया है।
पिछले साल 16 अप्रैल को अच्छे आचरण के आधार पर रिहा किए गए इस मामले के सह-दोषी महेंद्र हेम्ब्रम ने भी दारा की रिहाई का समर्थन किया है। हेम्ब्रम का कहना है कि दारा सिंह अपनी रिहाई को लेकर काफी आशान्वित है और उसके साथ भी समान न्यायसंगत व्यवहार किया जाना चाहिए।
इस बहुचर्चित मामले की पृष्ठभूमि की बात करें तो 62 वर्षीय दारा सिंह एक पूर्व बजरंग दल कार्यकर्ता है। उस पर 22 जनवरी 1999 को क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में एक चर्च के पास 58 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो मासूम बेटों (10 वर्षीय फिलिप और 6 वर्षीय टिमोथी) को स्टेशन वैगन में जिंदा जला देने वाली भीड़ का नेतृत्व करने का दोष सिद्ध हुआ था। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले का मूल निवासी दारा सिंह वर्तमान में ओडिशा की क्योंझर जेल में कैद है।
राज्य के महाधिवक्ता पीतांबर आचार्य ने स्पष्ट किया कि जेल अधिकारियों और जिला प्रशासन द्वारा प्रस्तुत किए गए कुछ रिकॉर्ड 2025 से संबंधित थे, जिस तकनीकी कारण से सजा समीक्षा बोर्ड तुरंत कोई निर्णय नहीं ले सका। बोर्ड ने माफी की याचिका पर अंतिम मुहर लगाने से पहले अद्यतन (अपडेटेड) जानकारी मांगी है और इस स्थिति से सर्वोच्च न्यायालय को भी अवगत करा दिया गया है।
ओडिशा सरकार के 2022 के समयपूर्व रिहाई के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, यदि किसी दोषी की मौत की सजा को उम्रकैद में बदला गया है, तो वह 25 साल की जेल की सजा पूरी करने के बाद रिहाई का पात्र हो जाता है। हालांकि, यह पूरी तरह से बोर्ड की सिफारिश और राज्य सरकार की अंतिम मंजूरी पर निर्भर करता है।
स्टेंस हत्याकांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट में कुल 18 आरोपियों के नाम शामिल थे। साल 2003 में निचली अदालत ने दारा सिंह को मौत की सजा और 12 अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके दो साल बाद, उड़ीसा उच्च न्यायालय ने दारा की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया, हेम्ब्रम की सजा को बरकरार रखा और बाकी सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। बाद में वर्ष 2011 में, सुप्रीम कोर्ट ने भी दारा सिंह और हेम्ब्रम की उम्रकैद की सजा को ही कायम रखा।
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