नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) को लेकर नई वैश्विक गाइडलाइंस जारी की हैं। इसके मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, शारीरिक निष्क्रियता और पहली बार शामिल किए गए वायु प्रदूषण जैसे कारकों पर लगाम लगाकर डिमेंशिया के 45% मामलों को रोका या टाला जा सकता है। इसके साथ ही, बिना किसी चिकित्सकीय कमी के डिमेंशिया से बचने के लिए विटामिन और ओमेगा-3 सप्लीमेंट्स के नियमित इस्तेमाल से बचने की सलाह दी गई है।
साल 2019 के बाद पहली बार इन सिफारिशों में बड़े बदलाव किए गए हैं। यह अपडेट इस वैज्ञानिक प्रमाण को दर्शाता है कि हमारी जीवनशैली, पुरानी बीमारियों का प्रबंधन और पर्यावरण हमारे दिमाग की सेहत पर गहरा असर डालते हैं। WHO के दिशा-निर्देशों में वायु प्रदूषण को शामिल किया जाना एक अहम कदम है। यह इस बात का पुख्ता सबूत है कि लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से हमारी सोचने-समझने की क्षमता में गिरावट आती है।
डिमेंशिया मस्तिष्क से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जो याददाश्त, सोचने की क्षमता और रोजमर्रा के काम करने की ताकत को कमजोर कर देती है। डिमेंशिया के कुल मामलों में से 60-70% मामले अल्जाइमर रोग के होते हैं। हालांकि इसका कोई पक्का इलाज नहीं है, लेकिन WHO का कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और पुरानी बीमारियों को कंट्रोल करके इसके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
ये नई सिफारिशें भारत के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक हैं, क्योंकि यहां बढ़ती उम्र की आबादी के साथ डिमेंशिया का बोझ और बढ़ने की आशंका है। अल्जाइमर एंड डिमेंशिया नामक पीयर-रिव्यू जर्नल में छपे एक अध्ययन के अनुसार, भारत में 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लगभग 8.8 मिलियन लोग डिमेंशिया के साथ जी रहे हैं। इस आयु वर्ग के बुजुर्गों में इसकी व्यापकता दर 7.4% पाई गई है।
वायु प्रदूषण पर WHO की यह चिंता कई नए वैज्ञानिक शोधों पर आधारित है। 2024 के लैंसेट कमीशन की रिपोर्ट में वायु प्रदूषण को उन 14 प्रमुख कारकों में शामिल किया गया है, जिन्हें नियंत्रित करके डिमेंशिया के 45% मामलों को रोका जा सकता है। इसी तरह, बीएमजे पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित 2024 के एक अन्य अध्ययन में भी भारतीय आबादी के लिए घर के अंदर और बाहर के वायु प्रदूषण को डिमेंशिया का एक बड़ा खतरा बताया गया है।
अगर वैश्विक स्तर पर बात करें, तो वर्तमान में दुनिया भर में 57 मिलियन से ज्यादा लोग डिमेंशिया से पीड़ित हैं। इसके अलावा, हर साल लगभग 10 मिलियन नए मरीजों की पहचान की जाती है।
इस बीमारी से बचने के लिए गाइडलाइंस में नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम करने, तंबाकू छोड़ने, शराब का सेवन सीमित करने और स्वस्थ आहार अपनाने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा, सामाजिक जुड़ाव बनाए रखने, मानसिक कसरत करने और हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज व उच्च कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखने पर जोर दिया गया है। जहां भी डॉक्टर द्वारा आवश्यक बताया जाए, वहां हियरिंग एड्स (सुनने की मशीन) का उपयोग भी डिमेंशिया के जोखिम को कम करने में मददगार हो सकता है।
WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने कहा कि आज हम पहले से कहीं अधिक जानते हैं कि डिमेंशिया का खतरा किन कारणों से बढ़ता है और ये नई गाइडलाइंस उसी ज्ञान को कार्रवाई में बदलती हैं। उन्होंने बताया कि अब सभी देशों के पास स्पष्ट और प्रमाण-आधारित सिफारिशें हैं, जिन्हें लोगों के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए तुरंत लागू किया जा सकता है।
इसके अलावा, WHO ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बिना डॉक्टरी जांच में कमी पाए गए लोगों को विटामिन बी या ई, ओमेगा-3 फैटी एसिड या मल्टीविटामिन की गोलियां रोज नहीं खानी चाहिए। इन सप्लीमेंट्स से डिमेंशिया से बचाव का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है।
डिमेंशिया न केवल स्वास्थ्य बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी भारी बोझ डालता है। WHO के अनुमान के मुताबिक, इस बीमारी के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को हर साल लगभग $1.3 ट्रिलियन का भारी नुकसान होता है। इस आर्थिक बोझ का लगभग आधा हिस्सा परिवार के सदस्यों और दोस्तों द्वारा की जाने वाली अवैतनिक देखभाल के कारण होता है।
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