नीति आयोग ने शुक्रवार को देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अपना ‘इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स’ यानी निवेश अनुकूलता सूचकांक जारी कर दिया है। इस अहम रिपोर्ट में निवेशकों को आकर्षित करने के मामले में गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु ने बाजी मारते हुए शीर्ष तीन स्थानों पर अपना कब्जा जमाया है।
एक ताजा आर्थिक रिपोर्ट के आंकड़ों से यह भी साफ हुआ है कि भारत की अर्थव्यवस्था ने बीते एक दशक में जबरदस्त छलांग लगाई है। वित्त वर्ष 2014-15 में देश की नॉमिनल जीडीपी लगभग 106 लाख करोड़ रुपये थी, जो वित्त वर्ष 2024-25 में तीन गुना से अधिक बढ़कर 331 लाख करोड़ रुपये के जादुई आंकड़े तक पहुंच गई है।
राज्यों की रैंकिंग के लिए तैयार किए गए इस इंडेक्स में बुनियादी ढांचे, कारोबारी माहौल, पर्यावरण को लेकर लचीलापन और सरकारी नीतियों सहित आठ प्रमुख पैमानों को आधार बनाया गया है। इन कड़े पैमानों पर खरा उतरते हुए दिल्ली, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश समेत कुल 15 राज्यों को ‘फ्रंट रनर’ या अग्रणी श्रेणी में रखा गया है।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिरी ने देश के मौजूदा आर्थिक परिदृश्य पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत की निवेश दर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की लगभग 25 प्रतिशत है, जो चीन के तेज आर्थिक विकास वाले दौर की तुलना में काफी कम है। उन्होंने बाजार में मांग और तरलता बढ़ाने के लिए देश में निवेश के स्तर को और ऊंचा करने की सख्त जरूरत बताई।
लाहिरी ने इस बात पर खास जोर दिया कि पिछले कुछ सालों में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है। उनका मानना है कि आर्थिक विकास की इस तेज रफ्तार में निवेश की भूमिका सबसे अहम होती है। केवल बाजार की खपत ही नहीं, बल्कि पूंजीगत निवेश भी बाजार में मांग पैदा करने और समग्र विकास को गति देने का एक बेहद शक्तिशाली माध्यम है।
इस उत्साहजनक माहौल के बीच रिपोर्ट में विदेशी निवेश को लेकर कुछ चिंताजनक आंकड़े भी साझा किए गए हैं। विश्व बैंक के डेटा के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2015 में भारत में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का प्रवाह जीडीपी का 2.1 प्रतिशत था, जो 2024 में घटकर मात्र 0.7 प्रतिशत रह गया है। ऐसे में बढ़ती वैश्विक अस्थिरता के बीच देश के लिए निवेश आधारित विकास दर को तेज करना अब पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
आपको बता दें कि राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने वाले इस इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स को तैयार करने की घोषणा 2025-26 के केंद्रीय बजट में ही कर दी गई थी। नीति आयोग का कहना है कि यह सूचकांक न केवल राज्यों की मौजूदा निवेश क्षमताओं का सटीक आकलन करता है, बल्कि भविष्य की आर्थिक चुनौतियों के लिए उनकी तैयारियों को भी परखता है।
आर्थिक विकास की दिशा तय करने में राष्ट्रीय स्तर के सुधारों के साथ-साथ राज्य सरकारों की भूमिका सबसे निर्णायक होती है। बेहतरीन बुनियादी ढांचा, कुशल नियामक तंत्र, प्रभावी संस्थाएं और पारदर्शी नीतियां ही किसी भी राज्य के निवेश माहौल को निवेशकों के अनुकूल बनाती हैं। आयोग का स्पष्ट मानना है कि घरेलू और विदेशी निवेश को बड़े पैमाने पर आकर्षित करने और उच्च विकास दर को बनाए रखने के लिए राज्य स्तर पर ऐसे इकोसिस्टम को मजबूत करना अनिवार्य है।
यह विस्तृत सूचकांक देश के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करता है। मूल्यांकन के दौरान यह बारीकी से देखा गया कि निवेशकों के लिए कौन सा राज्य कितना आकर्षक है और जमीनी स्तर पर उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सूचकांक के अन्य अहम पैमानों में संसाधन की उपलब्धता, नियामक सुगमता, संस्थागत माहौल और वित्तीय स्वास्थ्य शामिल हैं।
प्रदर्शन की बात करें तो 100 में से 56.6 का बेहतरीन स्कोर हासिल कर गुजरात ने सूची में पहला स्थान प्राप्त किया है। गुजरात को यह कामयाबी मुख्य रूप से उसके कुशल बंदरगाह संचालन, मजबूत बिजली क्षेत्र और शानदार कारोबारी माहौल की बदौलत मिली है। वहीं, 53.7 के स्कोर के साथ महाराष्ट्र दूसरे पायदान पर मौजूद है। महाराष्ट्र ने निजी इक्विटी और वेंचर कैपिटल निवेश के साथ-साथ बड़ी संख्या में अटल टिंकरिंग लैब्स की स्थापना के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।
विभिन्न पैमानों पर अलग-अलग राज्यों ने अपनी श्रेष्ठता साबित की है। बड़े राज्यों की श्रेणी में जहां गुजरात ने बुनियादी ढांचे और वित्तीय स्वास्थ्य में टॉप किया है, वहीं कारोबारी माहौल में महाराष्ट्र और संसाधनों की उपलब्धता के मामले में ओडिशा सबसे आगे रहा है। इसी तरह, शानदार सरकारी नीतियों में मध्य प्रदेश अव्वल है।
संस्थागत माहौल और नियामक सुगमता के मामले में छत्तीसगढ़ ने सूची में शीर्ष स्थान पाया है। इसके अलावा पर्यावरण के प्रति लचीलेपन और स्थिरता के मामले में तमिलनाडु का प्रदर्शन देश में सबसे बेहतरीन आंका गया है।
सूचकांक में अंतिम स्थानों पर रहने वाले क्षेत्रों की तस्वीर भी बिल्कुल साफ की गई है। इस इंडेक्स में सबसे खराब प्रदर्शन लक्षद्वीप का दर्ज किया गया है। लक्षद्वीप के ठीक ऊपर लद्दाख और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह का स्थान है, जिन्हें निवेश के लिहाज से खुद को तैयार करने के लिए अभी बहुत मेहनत करने की जरूरत है।
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