वड़ोदरा में एक बेहद चौंकाने वाला और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे दंपति को गिरफ्तार किया है, जो महज 20,000 रुपये के कमीशन के लालच में आठ दिन के एक नवजात शिशु को बेचने की फिराक में थे। पुलिस ने गुरुवार को इस पूरे खौफनाक रैकेट का पर्दाफाश किया।
हाइवे पर पुलिस की नाकाबंदी और गिरफ्तारी
पुलिस को इस अमानवीय सौदे के बारे में एक गुप्त सूचना मिली थी। इसी के आधार पर मंगलवार रात नेशनल हाईवे 48 पर कड़ी नाकाबंदी की गई। मुंबई जा रही एक बस को जब चेकिंग के लिए रोका गया, तो उसमें यह दंपति एक छोटे बच्चे के साथ सफर कर रहा था। पुलिस की पूछताछ के दौरान दोनों बुरी तरह घबरा गए और बच्चे को लेकर कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। संदेह गहराने पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ शुरू की।
पूछताछ में खुला खौफनाक राज
हिरासत में लिए गए आरोपियों की पहचान मनोज रावल और उसकी पत्नी वीणा के रूप में हुई है। इस दंपति ने अपना जुर्म कबूलते हुए बताया कि वे इस नवजात को मुंबई लेकर जा रहे थे। वहां उन्हें इस मासूम को एक ऐसे शख्स को सौंपना था, जो खुद को डॉक्टर बताता है। मनोज ने जांचकर्ताओं के सामने खुलासा किया कि 27 जुलाई को उसकी पत्नी वीणा का भाई सुनील पाटन स्थित उनके घर आया था और वही इस बच्चे को अपने साथ लेकर पहुंचा था।
3 लाख रुपये में तय हुआ था मासूम का सौदा
जांच में इस पूरी मानव तस्करी के पैसों के लेन-देन का भी सनसनीखेज सच सामने आया है। सुनील ने दंपति को बताया था कि एक एजेंट ने यह बच्चा उसे सौंपा है और इसे मुंबई के एक निवासी को 3 लाख रुपये में बेचा जाना है। इस सौदे के तहत बच्चे के सगे माता-पिता को 2 लाख रुपये मिलने थे। एजेंट का कमीशन 10,000 रुपये तय हुआ था और बच्चे की सुरक्षित डिलीवरी मुंबई तक करने के लिए मनोज और वीणा को 20,000 रुपये का लालच दिया गया था।
एडवांस रकम और फोन कॉल्स ने बढ़ाई मुश्किलें
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सुनील ने 28 जुलाई को इस काम के लिए दंपति को 5,000 रुपये बतौर एडवांस भी दे दिए थे। इसके तुरंत बाद ही दोनों ने मुंबई जाने के लिए बस पकड़ी थी। जांचकर्ताओं को यह भी पता चला है कि सफर के दौरान तथाकथित खरीदार ने उन्हें फोन करके उनकी यात्रा का अपडेट भी लिया था। पुलिस ने इस मामले में कड़ा कदम उठाते हुए मानव तस्करी के आरोप में इस दंपति समेत कुल आठ लोगों (दंपति और छह अन्य) के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
अब एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट करेगी जांच
इस पूरे मामले की शिकायत दर्ज करने वाले वड़ोदरा क्राइम ब्रांच के सब-इंस्पेक्टर राहुल बारैया ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि मनोज एक दिहाड़ी मजदूर है और उसे सिर्फ पैसों का प्रलोभन देकर इस अपराध में शामिल किया गया था। पुलिस ने फिलहाल मनोज और वीणा को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बच्चे के असली माता-पिता और फरार एजेंट की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए अब आगे की विस्तृत जांच एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट द्वारा की जाएगी।
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