पिछले सप्ताह हुई भीषण बारिश की तबाही से गुजरात अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाया है कि राज्य पर एक बार फिर से आसमानी आफत का खतरा मंडराने लगा है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है, जिससे अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) आने की आशंका बढ़ गई है। संभावित खतरे को देखते हुए जान-माल का नुकसान कम करने के लिए राज्य भर के जिला प्रशासन पूरी तरह से आपातकालीन मोड में आ गए हैं।
लगातार बिगड़ते हालात की संभावनाओं के बीच कई जिलों में स्कूल और कॉलेजों को दो दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। सरकारी महकमों और नगर निगमों ने अपने आपातकालीन उपाय तेज कर दिए हैं। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए संवेदनशील इलाकों में त्वरित प्रतिक्रिया टीमें (QRT), एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) के जवान, फायर ब्रिगेड, पानी निकालने वाले पंप, अर्थमूवर और जीवन रक्षक उपकरण तैनात किए गए हैं।
बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील गांवों और निचले इलाकों पर पैनी नजर रखी जा रही है। लोगों को सुरक्षित निकालने की योजना और अस्थायी आश्रय स्थल पूरी तरह से तैयार हैं। अधिकारियों ने जरूरी दवाओं, फूड पैकेट और पीने के पानी का पर्याप्त स्टॉक जमा कर लिया है, जबकि अस्पतालों और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इसके साथ ही, आम जनता से अपील की गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें, उफनती नदियों से दूर रहें और तेजी से जलस्तर बढ़ने की आशंका के चलते सरकारी निर्देशों का सख्ती से पालन करें।
राजस्व विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव जयंती रवि ने गांधीनगर स्थित राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) में जिला कलेक्टरों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक विस्तृत ऑनलाइन समीक्षा बैठक की। उन्होंने जिला कंट्रोल रूम के जरिए चौबीसों घंटे निगरानी करने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जरूरत पड़ने पर तुरंत एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भेजी जाएं। हालात की गंभीरता को देखते हुए थल सेना, नौसेना और वायु सेना को भी स्टैंडबाय पर रखा गया है।
राजकोट के कलेक्टर ओम प्रकाश ने बताया कि नदियों और बांधों के आसपास स्थित 170 से 180 बाढ़ संभावित गांवों की पहचान कर ली गई है। इन इलाकों में बचाव योजनाएं लागू हैं और प्राथमिक विद्यालयों को अस्थायी आश्रय स्थलों के रूप में तैयार किया गया है। वहीं, पिछले साल विनाशकारी बाढ़ का सामना करने वाले वडोदरा में नागरिक प्रशासन 2,200 सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे शहर की निगरानी करेगा। जलभराव वाले 216 हॉटस्पॉट पर पानी निकालने वाले पंप लगाए गए हैं और आपातकालीन निकासी के लिए बचाव नौकाएं भी तैयार हैं।
सूरत में भी नगर निगम ने बाढ़ प्रभावित इलाकों से निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। यहां एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों की तैनाती के साथ राहत शिविर बनाए गए हैं। सूरत नगर निगम (SMC) ने बिल्डरों और ठेकेदारों को निर्माण स्थलों पर तत्काल सुरक्षा उपाय करने के निर्देश दिए हैं। उन्हें क्रेन, ढीली सामग्री और अस्थायी संरचनाओं को सुरक्षित करने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर मजदूरों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने को कहा गया है।
भरूच में 26 बचाव नौकाओं के साथ एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं और 81 बाढ़ संभावित गांवों की पहचान की गई है। तापी प्रशासन ने किसी भी आपात स्थिति के लिए दो एसडीआरएफ टीमें, पांच नावें, 180 प्रशिक्षित स्वयंसेवक और 100 आश्रय स्थल तैयार रखे हैं। नवसारी में अधिकारियों ने झींगा फार्मों से मजदूरों को सुरक्षित निकाल लिया है और समय पर चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने के लिए गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी की जा रही है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा भारी से बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किए जाने के बाद अहमदाबाद भी हाई अलर्ट पर है। अगले दो दिनों तक कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा होने की प्रबल संभावना है। एएमसी (AMC) कमिश्नर बंछानिधि पाणि ने नागरिकों को जहां तक संभव हो वर्क फ्रॉम होम (घर से काम) करने की सलाह दी है।
कमिश्नर ने बताया कि एएमसी के सभी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। बारिश के अतिरिक्त पानी को जमा करने के लिए साबरमती नदी को खाली कर दिया गया है और तेजी से जल निकासी सुनिश्चित करने के लिए वासना बैराज के गेट खोल दिए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, इसलिए नागरिक पेड़ों या होर्डिंग्स के नीचे खड़े होने से बचें।
अहमदाबाद के कलेक्टर भव्य वर्मा ने जानकारी दी कि धोलका, बावला और साणंद में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को विशेष रूप से तैनात कर दिया गया है। गौरतलब है कि अहमदाबाद शहर अभी भी पिछले हफ्ते हुई 298 मिमी की रिकॉर्ड बारिश के सदमे से उबरने की कोशिश कर रहा है। यह एक सदी में एक दिन में होने वाली चौथी सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई थी और शहर के कई इलाकों से अभी तक बाढ़ का पानी पूरी तरह से नहीं निकल पाया है।
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