भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने आम जनता के हितों की रक्षा करते हुए एक बेहद सख्त कदम उठाया है। गुणवत्ता परीक्षण में फेल होने के बाद नियामक ने एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और लालजी गोधू एंड कंपनी (एलजी ब्रांड) की हींग की बिक्री पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है। खाद्य सुरक्षा विभाग की इस त्वरित कार्रवाई ने ग्राहकों को घटिया उत्पाद बेच रही कंपनियों की पोल खोल कर रख दी है।
इन दोनों ही प्रतिष्ठित कंपनियों पर ग्राहकों के भरोसे के साथ खिलवाड़ करने का मामला सामने आया है। लैब टेस्टिंग के दौरान एवरेस्ट हींग के आंकड़े बेहद निराशाजनक और सुरक्षा मानकों के बिल्कुल विपरीत पाए गए। जांच में एवरेस्ट के ‘कंपाउंडेड हींग’ के नमूनों में अल्कोहल-घुलनशील अर्क शून्य प्रतिशत तक मिला, जबकि इसका अनिवार्य न्यूनतम स्तर पांच प्रतिशत होना चाहिए। इसके अलावा, एवरेस्ट के येलो हींग पाउडर में यह मात्रा 3.29 प्रतिशत और ब्लैक हींग पाउडर में महज 4.4 प्रतिशत दर्ज की गई।
वहीं दूसरी ओर, एलजी (LG) हींग के नतीजे और भी ज्यादा हैरान करने वाले थे। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा मुंबई इकाई से लिए गए कच्चे हींग के छह अलग-अलग नमूनों में 15 से 32 प्रतिशत तक स्टार्च की भारी मिलावट पाई गई। आपको बता दें कि तय सरकारी मानकों के अनुसार हींग में स्टार्च की अधिकतम अनुमेय सीमा केवल एक प्रतिशत ही निर्धारित की गई है।
यह पूरी कार्रवाई ग्राहकों की तरफ से लगातार मिल रही शिकायतों और बाजार में मौजूद प्रमुख ब्रांड्स की व्यापक निगरानी के बाद की गई है। खाद्य नियामक ने इन दोनों कंपनियों की मुंबई स्थित सुविधाओं के साथ-साथ गुजरात एफडीए (FDA) के सहयोग से एवरेस्ट की उम्बरगांव स्थित राज्य-लाइसेंस प्राप्त इकाई से भी कानूनी रूप से सैंपल लिए थे। प्रयोगशाला जांच में इन सभी जगहों से जुटाए गए नमूनों को पूरी तरह से अमानक और सब-स्टैंडर्ड घोषित कर दिया गया।
कोई भी आम ग्राहक सीलबंद पैकेट के अंदर मौजूद रासायनिक तत्वों या उसके असल कंटेंट को खुद से नहीं परख सकता। लोग हमेशा पैकेजिंग पर छपी जानकारी और ब्रांड की साख पर भरोसा करके खरीदारी करते हैं, लेकिन जब कोई उत्पाद अनिवार्य मानकों से नीचे गिर जाता है, तो सीधे तौर पर जनता का विश्वास टूटता है। इसी को गंभीरता से लेते हुए FSSAI ने कंपनियों को सुधारात्मक कार्ययोजना पेश करने का सख्त आदेश दिया है। साथ ही उन्हें बाजार में पहले से मौजूद अपने घटिया उत्पादों को स्वेच्छा से वापस मंगाने की भी सलाह दी गई है।
इस पूरी घटना में आम जनता के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी छिपी है। खाद्य पदार्थों में मिलावट का मतलब सिर्फ कीमत के नाम पर ठगे जाना नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर सेहत से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। उन उत्पादों का लगातार सेवन करना जो तय संरचना और सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करते, सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकता है। FSSAI की इस कार्रवाई का मुख्य लक्ष्य उपभोक्ताओं को ऐसे अमानक उत्पादों के सेवन से बचाना है।
गौरतलब है कि एवरेस्ट के उत्पादों पर यह कोई पहला एक्शन नहीं है। इससे पहले भी गुणवत्ता और मानकों से जुड़ी गंभीर चिंताओं के चलते एवरेस्ट गरम मसाला, एवरेस्ट एग करी मसाला और एवरेस्ट चिकन मसाला की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है।
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