नई दिल्ली: बढ़ती महंगाई और बाजार में अत्यधिक नकदी के बीच आम आदमी को जल्द ही बड़ा झटका लग सकता है। अमेरिका और जापान के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने के बाद, अब भारत में भी इसके सख्त आसार नजर आ रहे हैं। हाल ही में अर्थशास्त्रियों के बीच हुए एक सर्वेक्षण से यह बात सामने आई है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) अक्टूबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकती है।
लगभग एक दर्जन प्रमुख अर्थशास्त्रियों पर किए गए इस सर्वे में अधिकांश का मानना है कि रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट का इजाफा हो सकता है। यह फरवरी 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी होगी। तब महामारी के बाद बेलगाम हुई महंगाई पर काबू पाने के लिए आरबीआई ने दरें बढ़ाई थीं, जिसके बाद फरवरी और दिसंबर 2025 के बीच धीरे-धीरे ढील दी गई थी। फिलहाल एमपीसी ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस चालू वित्त वर्ष में दरों में कुल 50 से 75 बेसिस पॉइंट तक की वृद्धि हो सकती है।
कोटक महिंद्रा बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में औसत महंगाई दर आरबीआई के 4.7% के अनुमान से लगभग 20 बेसिस पॉइंट अधिक रह सकती है। वहीं, एसबीआई के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने भी चेतावनी दी है कि महंगाई अब व्यापक रूप ले रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अक्टूबर और दिसंबर की एमपीसी बैठकों में 25-25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर बचाव की तैयारी करने का समय आ गया है। इसके बाद नए आंकड़ों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जानी चाहिए।
क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डीके जोशी का मानना है कि मौद्रिक नीति को अब सिर्फ ‘इंतजार और नजर रखने’ की स्थिति में बनाए रखने की गुंजाइश खत्म हो रही है। उनके मुताबिक, जल्द ही सख्ती का दौर शुरू होने वाला है। आगामी नीति काफी सख्त होने के आसार हैं और रुख या दरों में बदलाव की संभावना बढ़ गई है। उन्होंने यह भी बताया कि 2026 में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की उम्मीद है।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता ने कहा कि अक्टूबर में दरें बढ़ने की पूरी संभावना है क्योंकि अगली तिमाही में महंगाई अपने चरम पर पहुंच सकती है। उनका अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में खुदरा महंगाई दर औसतन 5% के आसपास रहेगी, जिसमें और भी बढ़ोतरी का जोखिम शामिल है। उनके अनुसार यह बढ़ोतरी का दौर बहुत आक्रामक नहीं होगा, लेकिन कुल मिलाकर 50 से 75 बेसिस पॉइंट का इजाफा देखने को मिल सकता है।
इक्रा रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कच्चे तेल की कीमतों पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर आगामी एमपीसी बैठक तक कच्चे तेल के दाम ऊंचे रहते हैं, तो 50 बेसिस पॉइंट की अनुमानित बढ़ोतरी को अक्टूबर में ही लागू किया जा सकता है। क्वांट इको रिसर्च की अर्थशास्त्री युवीका सिंघल भी इस विचार से पूरी तरह सहमत नजर आईं। इसी तरह, एमके ग्लोबल की माधवी अरोड़ा और आईसीआईसीआई बैंक का भी अनुमान है कि ऊर्जा की कीमतों की चाल के आधार पर यह वृद्धि 50 से 75 बेसिस पॉइंट के बीच रह सकती है।
केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने जोर दिया कि एमपीसी बढ़ती महंगाई के साथ-साथ सरकारी बॉन्ड यील्ड में हो रहे उछाल पर भी गंभीरता से विचार करेगी। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों की राय इससे अलग भी है। उनका मानना है कि आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के नेतृत्व वाली एमपीसी फिलहाल पुरानी दरों को ही बरकरार रख सकती है और स्थिति पर पैनी नजर बनाए रखेगी।
इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री डीके पंत ने स्पष्ट किया कि हालांकि दरें बढ़ाने का आधार मौजूद है, लेकिन अक्टूबर में ऐसा करना नुकसानदायक भी साबित हो सकता है क्योंकि अभी नकदी की स्थिति स्थिर नहीं है। आगामी बैठक में मुख्य फोकस महंगाई दर की बजाय बाजार की नकदी पर होगा, इसलिए इस बात की काफी संभावना है कि आरबीआई दरों में कोई बदलाव न करे।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मदन सबनवीस ने बताया कि दिसंबर तक ही महंगाई के चक्र की पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी। उनके अनुसार उसके बाद ही दरों में 25 से 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की जा सकती है। एचडीएफसी बैंक की प्रधान अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता ने भी बाजार के इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए अपनी पूर्ण सहमति व्यक्त की है।
यह भी पढ़ें-
अहमदाबाद को पछाड़कर वाहन पंजीकरण की रेस में सबसे आगे निकला सूरत, जानिए इसकी असल वजह
‘क्या तुम सच में अमेरिकी हो?’: ट्रंप की ‘MAGA’ ब्रिगेड की नस्लीय कसौटी पर परखे जा रहे भारतीय मूल…











