सोमवार, 5 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस (AICC) मुख्यालय में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व राज्यसभा सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के मौजूदा संकट पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। गोहिल ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल की ‘क्रोनी कैपिटलिज्म’ वाली नीतियों ने देश की अर्थव्यवस्था का पूरी तरह से बंटाधार कर दिया है।
उन्होंने कहा कि आज देश का युवा, किसान और वेतनभोगी मध्यम वर्ग कर्ज के भारी बोझ तले दबकर हताशा और आत्महत्या की ओर धकेला जा रहा है।
कांग्रेस नेता ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के ऐतिहासिक पलायन को सरकार की सबसे बड़ी आर्थिक विफलता करार दिया। उन्होंने आधिकारिक आंकड़े पेश करते हुए बताया कि जनवरी से सितंबर 2026 के बीच लगातार नौ महीनों तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है।
गोहिल ने कहा कि देश के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि इतने लंबे समय तक विदेशी फंड लगातार बाहर गया हो। उन्होंने बताया कि महज 29 सितंबर से 1 अक्टूबर के तीन दिनों के भीतर बाजार से 29,000 करोड़ रुपये निकाल लिए गए, जो भारतीय बाजार पर बढ़ते वैश्विक अविश्वास का सीधा प्रमाण है।
मध्यम वर्ग पर करों के भारी बोझ का जिक्र करते हुए गोहिल ने यूपीए और मौजूदा सरकार की नीतियों की तुलना की। उन्होंने याद दिलाया कि मनमोहन सिंह सरकार के दौरान आम निवेशकों को राहत देने के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) को शून्य कर दिया गया था।
इसके विपरीत, मौजूदा सरकार ने एसटीटी (STT) के साथ-साथ शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) को बढ़ाकर 20 प्रतिशत और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन को 12.5 प्रतिशत कर दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता ने इसे आम आदमी की गाढ़ी कमाई चूसकर चंद उद्योगपतियों को मालामाल करने की साजिश बताया।
प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के उन पुराने बयानों पर भी तीखा तंज कसा गया, जिनमें चुनाव नतीजों से पहले आम नागरिकों को शेयर बाजार में भारी जोखिम उठाने की सलाह दी गई थी। गोहिल ने कहा कि ऐतिहासिक ऊंचाई का सपना देखने वाले निवेशकों का सेंसेक्स आज 72,500 के स्तर पर लुढ़क गया है, जिससे बाजार में खुदरा निवेशकों के करीब 26 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए।
इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 100 के करीब पहुंचने पर उन्होंने प्रधानमंत्री के पुराने बयानों का हवाला देते हुए इसे सरकार की भ्रष्ट राजनीति का परिणाम बताया।
अर्थव्यवस्था के साथ-साथ गोहिल ने चुनाव आयोग में किए गए बदलावों और मतदाता अधिकारों के हनन पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जजों की टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए संस्थागत पतन पर भी गहरी चिंता जताई। अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में उन्होंने सरकार के सामने स्पष्ट मांगें रखीं।
कांग्रेस ने मांग की है कि प्रधानमंत्री बाजार और रुपये की इस दुर्दशा की जिम्मेदारी लें, लगातार हो रही विदेशी बिकवाली का देश को जवाब दें और मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए शेयर बाजार से जुड़े कैपिटल गेन टैक्स को यूपीए सरकार की तरह ही तत्काल प्रभाव से शून्य किया जाए।
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