अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया फ्लाइट 171 हादसे को पंद्रह महीने बीत चुके हैं। अब इस दर्दनाक क्रैश में जान गंवाने वाले ब्रिटिश नागरिकों के परिवारों ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम और विदेश सचिव एड मिलिबैंड को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने डाउनिंग स्ट्रीट में एक तत्काल बैठक बुलाने की मांग की है।
यह खुला पत्र 21 सितंबर को केंट के ओर्पिंगटन निवासी मितेन पटेल द्वारा सौंपा गया है। 12 जून 2025 को हुए इस विमान हादसे में पटेल ने अपने माता-पिता, अशोक और शोभना पटेल को हमेशा के लिए खो दिया था।
मितेन की इस पहल को 23 ब्रिटिश पीड़ितों और 12 गैर-ब्रिटिश पीड़ितों के परिवारों का भी समर्थन प्राप्त है। इसके साथ ही, इस हादसे में जान गंवाने वाले पायलट कैप्टन सुमीत सभरवाल के परिजन भी इस न्याय की मुहिम में उनके साथ खड़े हैं।
पटेल ने खुद को एक शोक संतप्त नागरिक, एक मतदाता और एक अनाथ बेटे के रूप में प्रस्तुत किया है जो अपने माता-पिता के लिए न्याय मांग रहा है। उनका कहना है कि इस भयंकर आपदा के बाद पीड़ित परिवारों को विदेशी अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय विमानन प्रोटोकॉल से निपटने के लिए पूरी तरह से उनके हाल पर अकेला छोड़ दिया गया था।
इन परिवारों की एक प्रमुख मांग यह है कि इस हादसे की जांच में ब्रिटेन की वायु दुर्घटना जांच शाखा (UK-AAIB) को औपचारिक रूप से शामिल किया जाए। वे चाहते हैं कि यह एजेंसी दुर्घटना के संरचनात्मक और यांत्रिक कारणों का एक स्वतंत्र मूल्यांकन करे, जिसमें यूके नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के सुरक्षा नोटिस एसएन-2015/005 से जुड़े मुद्दे भी शामिल हों।
पत्र में पीड़ितों के शवों के कुप्रबंधन को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पटेल ने बताया कि उनके माता-पिता के शव ब्रिटेन वापस लाए जाने के बाद यूके कोरोनर डॉ. फियोना विलकॉक्स ने सीटी स्कैन का आदेश दिया था। इस जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि उनकी मां के अवशेष किसी अन्य पीड़ित के अवशेषों के साथ मिला दिए गए थे।
उन्होंने एक अन्य ब्रिटिश पीड़ित फियोंगल ग्रीनलाव-मीक के मामले का भी हवाला दिया। पटेल के अनुसार, मीक के अवशेष ब्रिटेन वापस ही नहीं आए, जबकि उनके परिवार को किसी और पीड़ित के अवशेष सौंप दिए गए थे।
पटेल ने अपने पत्र में लिखा है कि एक ही हादसे में अपने माता-पिता दोनों को खो देना जीवन भर के दुखद कारावास जैसा है। उन्होंने अपनी मां के अवशेषों के कथित कुप्रबंधन को एक गहरा उल्लंघन बताया, जिसे किसी भी परिवार को कभी नहीं सहना चाहिए।
इसके अलावा, जनवरी 2026 में जारी एक भारतीय पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गलत तरीके से कहा गया था कि उनकी मां के शरीर के कुछ हिस्से गायब थे। हालांकि, यूके के कोरोनर ने बाद में जून में पुष्टि की कि उनकी मां के अवशेष पूरी तरह से बरामद कर लिए गए थे। इस भारी लापरवाही के कारण परिवार अब शवों की पहचान और प्रबंधन को लेकर एक बाध्यकारी द्विपक्षीय फोरेंसिक जांच की मांग कर रहे हैं।
परिवारों ने यूके सीएए सुरक्षा नोटिस एसएन-2015/005 का भी विशेष जिक्र किया है, जिसे क्रैश से एक महीने से भी कम समय पहले 15 मई 2025 को फिर से जारी किया गया था। यह नोटिस बोइंग 787 सहित बोइंग विमानों के फ्यूल शट-ऑफ वाल्व तंत्र में सुधारात्मक कार्रवाई से संबंधित था।
पटेल ने सवाल उठाया है कि क्या इस ज्ञात और चिह्नित खराबी ने एयर इंडिया फ्लाइट 171 को दुर्घटनाग्रस्त होने में कोई भूमिका निभाई थी। पत्र में विमानन सुरक्षा निर्देशों के वैश्विक सामंजस्य की भी वकालत की गई है ताकि अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस पर अनिवार्य सुरक्षा उपाय एक समान रूप से लागू किए जा सकें।
पीड़ितों के परिजनों ने ब्रिटेन की कांसुलर प्रतिक्रिया की समीक्षा की भी मांग की है। उनका कहना है कि पीड़ित परिवारों की मदद के लिए नियुक्त किए गए संपर्क अधिकारियों को अगस्त 2025 में अचानक वापस बुला लिया गया था। पटेल ने बताया कि इसके बाद उन्हें तीन अलग-अलग कांसुलर कर्मचारियों से संपर्क करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
विमान जहां दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, उस बीजे मेडिकल कॉलेज हॉस्टल स्थल पर एक स्थायी स्मारक बनाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। पटेल का मानना है कि यह स्थान उनके प्रियजनों के जीवन और यादों से जुड़ा एक अपूरणीय स्थल है, और वे चाहते हैं कि इस जगह का एक हिस्सा स्मारक के रूप में हमेशा के लिए संरक्षित किया जाए।
1989 की हिल्सबोरो स्टेडियम घटना में प्रधानमंत्री बर्नहम के काम का हवाला देते हुए, पत्र में ब्रिटिश सरकार से जवाबदेही के प्रति वैसी ही प्रतिबद्धता दिखाने का आग्रह किया गया है। परिवारों ने आगे का औपचारिक रास्ता तय करने के लिए बर्नहम और मिलिबैंड के साथ आमने-सामने बैठक करने का कड़ा अनुरोध किया है।
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