मुंबई: दृष्टिबाधित लोगों तक समाचार और अहम सूचनाओं की पहुंच को और अधिक सुलभ बनाने के लिए रिलायंस फाउंडेशन ने एक बड़ा कदम उठाया है। भारत का एकमात्र पंजीकृत अंतरराष्ट्रीय ब्रेल अखबार ‘दृष्टि’ अब पाक्षिक के बजाय हर सप्ताह प्रकाशित किया जाएगा। हिंदी और मराठी भाषा में प्रकाशित होने वाले इस अखबार के साप्ताहिक होने से पाठकों को समसामयिक विषयों और देश-दुनिया की खबरों से जुड़ने का अधिक अवसर मिलेगा।
नेशनल एसोसिएशन ऑफ द ब्लाइंड (NAB) इंडिया के सहयोग से प्रकाशित होने वाले इस अखबार के वर्तमान में 30,000 से अधिक पाठक हैं। साप्ताहिक संस्करण शुरू होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इसकी पहुंच का दायरा और अधिक विस्तृत होगा। यह पहल दृष्टिबाधित समुदाय के लिए सूचनाओं तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने और समाज में उनकी समावेशी भागीदारी को मजबूत करने का काम करेगी।
ब्रेल अखबार का यह प्रकाशन रिलायंस फाउंडेशन के ‘दृष्टि’ कार्यक्रम की उस व्यापक प्रतिबद्धता का एक अहम हिस्सा है, जो नेत्र देखभाल और दृष्टिबाधितों के सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रहा है। साल 2003 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के जरिए अब तक वंचित और पिछड़े समुदायों के दो लाख से अधिक लोगों तक विभिन्न सेवाएं पहुंचाई जा चुकी हैं।
अखबार के प्रकाशन से इतर, रिलायंस फाउंडेशन दृष्टि कार्यक्रम के तहत दृष्टिबाधित लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। इसमें मुफ्त आंखों की जांच से लेकर कॉर्निया प्रत्यारोपण और जरूरतमंदों को चश्मा उपलब्ध कराने जैसी सुविधाएं शामिल हैं। नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और दृष्टि दोष को दूर करने के लिए कार्यक्रम ने एनएबी इंडिया, शंकरा आई फाउंडेशन और अरविंद आई केयर सिस्टम के साथ अहम साझेदारी की है।
पिछले दो दशकों के दौरान इस संयुक्त प्रयास ने 22,500 से अधिक लोगों की आंखों की रोशनी लौटाने में असाधारण कामयाबी हासिल की है। यह पहल न केवल दृष्टिबाधित लोगों को आत्मविश्वास दे रही है, बल्कि उनके लिए जीवन में नए अवसरों के द्वार भी खोल रही है।
दृष्टिबाधित समुदाय के उत्थान की इसी दिशा में रिलायंस फाउंडेशन की संस्थापक और चेयरपर्सन नीता एम. अंबानी ने इस साल जनवरी में एक महत्वपूर्ण घोषणा की थी। उन्होंने मुंबई में एनएबी इंडिया के 75वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान रिलायंस फाउंडेशन की ओर से इस संस्था के लिए 5 करोड़ रुपये के विशेष फंड की प्रतिबद्धता जाहिर की थी। ‘दृष्टि’ अखबार के साप्ताहिक प्रकाशन का यह नया कदम इसी समावेशी दृष्टिकोण को और अधिक मजबूती प्रदान कर रहा है।
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