साल 2026 में दुनिया के सबसे खराब ट्रैफिक वाले शहरों की लिस्ट जारी हो चुकी है। इस ग्लोबल रैंकिंग में भारत के दो शहरों ने अपनी जगह बनाई है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई इस सूची में शामिल नहीं है।
अमूमन दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई में लगने वाले ट्रैफिक जाम को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा होती है। लोग खराब रोड प्लानिंग और अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर को इसका जिम्मेदार मानते हैं। हालांकि, हालिया टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स ने कंजेशन (भीड़भाड़) के आधार पर जो रिपोर्ट तैयार की है, उसमें मुंबई का नाम दूर-दूर तक नहीं है, जबकि भारत के दो अन्य शहरों ने टॉप 10 में जगह बनाई है।
इस इंडेक्स में शहरों की रैंकिंग “15 मिनट में तय की गई दूरी” के बजाय पूरी तरह से कंजेशन के स्तर पर आधारित है। टॉमटॉम किसी भी शहर में फ्री-फ्लोइंग ट्रैफिक (बिना जाम वाले समय) में लगने वाले सबसे कम समय की तुलना वास्तविक यात्रा के समय से करके कंजेशन की गणना करता है। उदाहरण के तौर पर, 75 प्रतिशत कंजेशन लेवल का सीधा मतलब यह है कि आपके सफर में सामान्य स्थिति की तुलना में 75 प्रतिशत अधिक समय लगता है।
आइए दुनिया के 10 सबसे भीड़भाड़ वाले शहरों पर एक नजर डालते हैं और जानते हैं कि इस ग्लोबल लिस्ट में भारत के कौन से दो शहर शामिल हैं:
रैंक 1 | मेक्सिको सिटी, मेक्सिको (औसत कंजेशन: 75.9%)
भारी आबादी और सड़क परिवहन पर अत्यधिक निर्भरता के कारण यहां पीक आवर्स में भयंकर जाम लगता है। पूरे मेक्सिको में तेजी से हो रहे शहरीकरण और वाहनों की बढ़ती संख्या ने ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी दबाव डाल दिया है।
रैंक 2 | बेंगलुरु, भारत (औसत कंजेशन: 74.4%)
बेंगलुरु की बढ़ती आबादी और लगातार फैलते टेक्नोलॉजी हब ने उन सड़कों पर वाहनों की बाढ़ ला दी है, जो इतने भारी ट्रैफिक के लिए कभी नहीं बनी थीं। भारत के प्रमुख शहर कंजेशन से बुरी तरह जूझ रहे हैं क्योंकि सड़क और सार्वजनिक परिवहन क्षमता की तुलना में कार खरीदने वालों की संख्या कहीं अधिक तेजी से बढ़ रही है।
रैंक 3 | डबलिन, आयरलैंड (औसत कंजेशन: 72.9%)
डबलिन में सिटी सेंटर और प्रमुख कम्यूटर रूट के आसपास ट्रैफिक काफी भारी रहता है, जिससे यात्रियों का काफी समय बर्बाद होता है। उपनगरीय विकास के कारण कारों से यात्रा करने वाले लोगों की संख्या में इजाफा हुआ है, जिससे आयरलैंड के बड़े शहरों के आसपास ट्रैफिक का दबाव बढ़ गया है।
रैंक 4 | लॉड्ज़, पोलैंड (औसत कंजेशन: 72.8%)
व्यस्त मुख्य सड़कों, चल रहे निर्माण कार्यों और हर दिन शहर से गुजरने वाले यात्रियों की बड़ी संख्या के कारण लॉड्ज़ को भारी कंजेशन का सामना करना पड़ता है। पोलैंड में कारों के बढ़ते स्वामित्व और शहरी क्षेत्रों के विस्तार ने कई बड़े शहरों में ट्रैफिक को एक नियमित समस्या बना दिया है।
रैंक 5 | पुणे, भारत (औसत कंजेशन: 71.1%)
आईटी, शिक्षा और मैन्युफैक्चरिंग सेंटर के रूप में पुणे के तेजी से हुए विस्तार ने पहले से ही भीड़भाड़ वाली सड़कों पर वाहनों की संख्या में भारी वृद्धि की है। कई अन्य भारतीय शहरों की तरह पुणे भी उस व्यापक चुनौती को दर्शाता है, जहां शहरी परिवहन में सुधार की गति को पीछे छोड़ते हुए आबादी और वाहनों का ग्राफ कहीं ज्यादा तेजी से ऊपर गया है।
रैंक 6 | ल्यूब्लिन, पोलैंड (औसत कंजेशन: 70.4%)
ल्यूब्लिन में खास तौर पर सुबह और शाम के व्यस्त समय के दौरान प्रमुख मार्गों पर नियमित रूप से ट्रैफिक की समस्या रहती है। पोलैंड के कई शहरी क्षेत्रों में निजी कारों का उपयोग अधिक होने से सड़क जाम की स्थिति लगातार बनी हुई है।
रैंक 7 | बोगोटा, कोलंबिया (औसत कंजेशन: 69.6%)
अपनी विशाल आबादी, भारी वाहन उपयोग और प्रमुख सड़कों पर अत्यधिक दबाव के कारण बोगोटा लंबे ट्रैफिक जाम के लिए जाना जाता है। कोलंबिया के सबसे बड़े शहरों को तेजी से हो रहे शहरीकरण और परिवहन नेटवर्क पर पड़ रहे दबाव जैसी समान समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
रैंक 8 | अरेक्विपा, पेरू (औसत कंजेशन: 69.5%)
अरेक्विपा की संकरी गलियों और तेजी से बढ़ती वाहनों की संख्या के चलते ट्रैफिक काफी धीमा रहता है। विशेषकर मध्य क्षेत्रों में स्थिति काफी अप्रत्याशित हो जाती है। जनसंख्या वृद्धि और निजी वाहनों के इस्तेमाल से पेरू के शहरी केंद्रों में कंजेशन लगातार बढ़ रहा है।
रैंक 9 | लीमा, पेरू (औसत कंजेशन: 69.3%)
घने ट्रैफिक, बड़ी महानगरीय आबादी और शहर के मुख्य सड़क कॉरिडोर पर भारी दबाव के कारण लीमा के यात्रियों को नियमित रूप से लंबे सफर का सामना करना पड़ता है। पेरू में ट्रैफिक एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है, जहां परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर की तुलना में सड़क की मांग अधिक तेजी से बढ़ी है।
रैंक 10 | बैंकॉक, थाईलैंड (औसत कंजेशन: 67.9%)
शहर के बेहतरीन रेल नेटवर्क के बावजूद, खचाखच भरी सड़कों और निजी कारों की उच्च संख्या के कारण बैंकॉक में अक्सर ट्रैफिक जाम लगता है। तेजी से हुए शहरी विकास और रोजमर्रा की आवाजाही ने बैंकॉक की सड़कों पर जबरदस्त दबाव डाल दिया है।
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