पिछले सप्ताह फ्लाईदुबई के एक यात्री विमान के कॉकपिट में हुई रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना के बाद सऊदी अरब ने आधिकारिक तौर पर विमानन सुरक्षा जांच शुरू कर दी है। यह अहम कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पहले से ही इस गंभीर मामले में एक अलग आपराधिक जांच का नेतृत्व कर रहा है। मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, विशेषज्ञ अब इस बात का गहन विश्लेषण कर रहे हैं कि इस घटना का उड्डयन सुरक्षा पर क्या असर पड़ सकता है।
उड्डयन क्षेत्र में विमान दुर्घटनाओं के बाद भविष्य की उड़ानों को सुरक्षित रखने के लिए ऐसी जांच एक सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि, जब किसी जानबूझकर किए गए आपराधिक कृत्य का मामला सामने आता है, तो सुरक्षा जांच अनिवार्य नहीं होती। गौरतलब है कि 30 सितंबर को इजराइल जा रहे फ्लाईदुबई के विमान को गिराने की कथित साजिश के तहत सह-पायलट ने हवा में ही कप्तान पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला कर दिया था।
घटना के वक्त उड़ान संख्या FZ1073 सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र से गुजर रही थी। इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि सऊदी अरब ने विदेशी विशेषज्ञ विमानन एजेंसियों को सूचित कर दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत इस उड़ान की सुरक्षा जांच करेगा। हालांकि, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि सऊदी जांचकर्ता अपनी इस रिपोर्ट के निष्कर्षों को सार्वजनिक करेंगे या नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना अंतरराष्ट्रीय सहयोग की उस स्थापित प्रणाली का परीक्षण कर सकती है, जिसे किसी को सीधे तौर पर दोषी ठहराए बिना भविष्य की विमानन सुरक्षा के लिए सिफारिशें करने के लिए बनाया गया है। फिलहाल दुर्घटना जांच की जिम्मेदारी संभालने वाले सऊदी अरब के राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा केंद्र या वहां की सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।
दूसरी ओर, अमेरिका के राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (NTSB) ने पुष्टि की है कि उसने इस जांच के लिए अपना एक विशेष प्रतिनिधि नियुक्त कर दिया है। NTSB की भागीदारी इसलिए जरूरी है क्योंकि इस खौफनाक गोते से बचने वाला बोइंग 737 मैक्स विमान अमेरिका में ही निर्मित है। अंतरराष्ट्रीय नियमों, जिन्हें उद्योग में ‘एनेक्स 13’ के नाम से जाना जाता है, के तहत यूएई भी स्वचालित रूप से इस जांच का अहम हिस्सा होगा क्योंकि विमान वहां पंजीकृत है और एयरलाइन का मुख्यालय दुबई में स्थित है।
यूएई ने इस घटना की एक समानांतर आपराधिक जांच भी शुरू कर दी है, जिसे वहां के अभियोजक जनरल ने स्पष्ट रूप से ‘आतंकवादी हमला’ करार दिया है। इस विमान में सवार 172 लोगों में से लगभग सभी नागरिक इजराइली थे। विमानन सुरक्षा जांच प्राधिकरण के निदेशक ओफर वाकनिन ने बताया कि इजराइल ने सऊदी नेतृत्व वाली इस सुरक्षा जांच में शामिल होने की पेशकश की है, लेकिन अभी तक उसे आधिकारिक रूप से आमंत्रित नहीं किया गया है।
वाकनिन ने यह भी स्पष्ट किया कि शायद इजराइल को इस जांच में सीधे तौर पर शामिल होने की आवश्यकता न पड़े, क्योंकि यह विमान के संचालन या यांत्रिक सुरक्षा से जुड़ा कोई तकनीकी मुद्दा नहीं था। सऊदी अरब और इजराइल के बीच कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन जानकारों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र समर्थित सुरक्षा सहयोग की प्रणाली ने हमेशा यह साबित किया है कि यह भू-राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर काम कर सकती है।
एनेक्स 13 की नियम पुस्तिका उन देशों को जांच में पर्यवेक्षक का दर्जा देती है जहां के नागरिकों की महत्वपूर्ण मौतें या चोटें आती हैं। हालांकि, इसमें ऐसी स्थिति का स्पष्ट उल्लेख नहीं है जहां इस घटना की तरह सभी यात्री बिना किसी शारीरिक नुकसान के बाल-बाल बच गए हों। हवाई दुर्घटना जांचों को अक्सर तकनीकी मामलों पर ध्यान केंद्रित करने और सीधे दोषारोपण से बचने के लिए जाना जाता है, जिससे पिछले कुछ दशकों में विमान दुर्घटनाओं में भारी कमी दर्ज की गई है।
ये तकनीकी जांचें आमतौर पर कूटनीतिक रडार से दूर रहती हैं, जिससे विशेषज्ञ बिना किसी राजनीतिक दबाव के आपस में सहयोग कर पाते हैं। इसका एक बड़ा उदाहरण साल 2020 में दिखा था जब भारी तनाव के बावजूद एक यूक्रेनी विमान को मार गिराए जाने के बाद अमेरिका और ईरान के विमानन अधिकारियों ने फ्रांस की एजेंसी के कार्यालयों में कॉकपिट टेप सुनने के लिए एक साथ काम किया था।
हालांकि, हाल के वर्षों में नागरिक सुरक्षा जांच और न्यायिक आपराधिक जांच के बीच सबूतों तक पहुंच को लेकर अक्सर टकराव भी देखा गया है। ऐसा ही एक बड़ा मामला 2015 में सामने आया था, जब जर्मनविंग्स विमान के पायलट द्वारा आत्महत्या करने की घटना के बाद फ्रांसीसी जांच एजेंसी को सबूतों को लेकर कानूनी अभियोजकों के साथ कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ा था।
विमानन सुरक्षा अधिकारियों का दृढ़ता से मानना है कि जब किसी अपराध का संदेह होता है तो अभियोजक जांच का नेतृत्व करते हैं, लेकिन जानबूझकर की गई ऐसी खौफनाक कार्रवाई के मामलों से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है।
इस तरह की गहन जांच से एयरलाइंस में पायलटों की भर्ती प्रक्रिया और कॉकपिट सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भविष्य के लिए अहम सबक मिलते हैं, जो हवाई सफर को सुरक्षित बनाने में मील का पत्थर साबित होते हैं।
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