भारतीय हवाईअड्डों पर विमानों में बम होने की झूठी धमकियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अब एक नई रिपोर्ट ने इन घटनाओं को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। यह रिपोर्ट बताती है कि तस्कर सोने और ड्रग्स जैसी अवैध चीजों को पार कराने के लिए इन झूठी अफवाहों का सहारा ले रहे हैं।
साल 2010 से 2026 के बीच विमानन सुरक्षा से जुड़े 104 मामलों का अध्ययन किया गया है। ‘एविएशन बम थ्रेट एंड कस्टम्स इंटरडिक्शन रिपोर्ट’ के नाम से जारी इस स्टडी में अक्टूबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच के 85 मुख्य मामलों की गहराई से जांच की गई।
इस जांच में 7 मामलों (करीब 8.2 प्रतिशत) में बम की धमकी और तस्करी के बीच सीधा या संदिग्ध कनेक्शन पाया गया है। तस्करों ने इन धमकियों की आड़ में सोना, नशीली दवाएं (साइकोट्रोपिक ड्रग्स), विदेशी मुद्रा, ई-सिगरेट (वेप्स) और सिगरेट की तस्करी की कोशिश की।
इन 7 मामलों में से चार का कनेक्शन पूरी तरह साबित हो चुका है, जबकि तीन अन्य मामलों की जांच अभी जारी है। इन मामलों में 4.5 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत का करीब 5.9 किलोग्राम सोना और 3.2 करोड़ रुपये की 3.2 किलोग्राम मेथाक्वालोन ड्रग्स जब्त की गई। इसके अलावा भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा और कमर्शियल वेप्स भी पकड़े गए।
रिपोर्ट के मुताबिक, तस्कर बम की अफवाहों का इस्तेमाल मुख्य रूप से चार अलग-अलग तरीकों से करते हैं। पहला तरीका यह है कि तस्कर विमान के टॉयलेट या किसी अन्य हिस्से में अवैध सामान छिपा देते हैं और वहीं बम होने की धमकी वाली पर्ची छोड़ देते हैं। इसका मकसद यात्रियों और क्रू मेंबर को उस जगह से दूर रखना होता है, ताकि बाद में कोई साथी उस सामान को सुरक्षित निकाल सके।
इस तरीके का एक पुख्ता मामला 18 अक्टूबर 2024 को सामने आया था। दुबई से मुंबई आने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-349 (AI-349) के पिछले टॉयलेट में केबिन क्रू को एक हाथ से लिखी पर्ची मिली थी। इसमें बम होने की बात कही गई थी।
मुंबई में विमान की लैंडिंग के बाद सुरक्षाबलों और कस्टम विभाग ने सघन तलाशी ली। इस दौरान उसी टॉयलेट के शीशे के पैनल के पीछे से 1.85 किलो सोने का पेस्ट बरामद हुआ। इसकी कीमत 1.42 करोड़ रुपये आंकी गई। जांचकर्ताओं ने पाया कि पर्ची जानबूझकर वहां रखी गई थी, लेकिन बम निरोधक दस्ते की चेकिंग के कारण तस्करों का प्लान फेल हो गया।
तस्करों का दूसरा तरीका कस्टम अधिकारियों द्वारा किसी साथी को पकड़े जाने के बाद उड़ान में देरी कराने का होता है। इसके लिए वे बम की झूठी कॉल करते हैं, जिससे उनके बाकी साथियों को भागने या बचाव का समय मिल सके।
तीसरा तरीका आपातकालीन स्थिति पैदा करने से जुड़ा है। विमान खाली कराते समय या सामान की चेकिंग के दौरान जो अफरातफरी मचती है, उसमें तस्कर अपना अवैध सामान वहीं छोड़कर निकल जाते हैं।
चौथे तरीके के तहत तस्कर एक साथ कई धमकियां भेजते हैं, ताकि सीआईएसएफ (CISF), पुलिस और कस्टम की टीमें अलग-अलग जगह बंट जाएं। इससे हवाईअड्डे के अन्य हिस्सों में सुरक्षा कमजोर पड़ जाती है और तस्करों को अपना काम करने का मौका मिल जाता है।
दिल्ली के हवाईअड्डे पर 2 नवंबर 2024 को इसी तरह का एक मामला सामने आया था। बैंकॉक जाने वाली इंडिगो की फ्लाइट 6E-2114 में एक अज्ञात कॉलर ने बैग में विस्फोटक होने की सूचना दी थी। यह कॉल कस्टम अधिकारियों द्वारा 120 कमर्शियल वेप्स, 18,000 डॉलर और 5,000 यूरो के साथ एक व्यक्ति को हिरासत में लिए जाने के ठीक बाद की गई थी।
इस मामले में पुलिस ने बोर्डिंग गेट के पास से एक यात्री को गिरफ्तार किया। टेलीकॉम ट्रेसिंग से पता चला कि कॉल टर्मिनल 3 के भीतर से ही की गई थी। जांच में साफ हुआ कि यह कोई आम सुरक्षा खतरा नहीं था, बल्कि साथी के पकड़े जाने के बाद फ्लाइट को जानबूझकर लेट कराने की साजिश थी।
कोच्चि एयरपोर्ट पर भी एक ऐसी ही घटना घटी थी। 12 दिसंबर 2024 को शारजाह से आई एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX-412 में धमकी मिलने के बाद विमान को आइसोलेशन में ले जाया गया। सामान की चेकिंग के दौरान कस्टम अधिकारियों ने सूट बैग के निचले हिस्से में छिपाई गई 3.2 किलो मेथाक्वालोन टैबलेट बरामद कीं।
इस ड्रग्स की कीमत 3.2 करोड़ रुपये थी। हालांकि, इसे धमकी से सीधे तौर पर नहीं जोड़ा जा सका, इसलिए रिपोर्ट में इसे साबित हो चुके मामले की बजाय संभावित कनेक्शन की श्रेणी में रखा गया है।
चेन्नई एयरपोर्ट पर 24 जनवरी 2025 को बैंकॉक से आई स्पाइसजेट की फ्लाइट SG-88 को भी धमकी के बाद तुरंत खाली कराया गया था। इस दौरान दो यात्री अपना शोल्डर बैग वहीं छोड़कर भाग गए। चेकिंग में बैग से 40,000 सिगरेट और सिल्वर पेंट चढ़े सोने के 650 ग्राम के कंगन मिले। इन चीजों की कीमत करीब 52 लाख रुपये थी।
रिपोर्ट में साल 2020 के हैदराबाद एयरपोर्ट के एक पुराने मामले का भी जिक्र है। तब बम निरोधक दस्ते ने एक संदिग्ध पैकेट की जांच की थी, जिसमें से इलेक्ट्रिक मोटर के अंदर छिपाया गया 1.5 किलो सोना बरामद हुआ था।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में बम की झूठी धमकियों के मामलों में भारी उछाल आया है। साल 2020 में देश भर में ऐसे 4 मामले सामने आए थे। इसके बाद 2021 में 2, 2022 में 13 और 2023 में 71 मामले दर्ज किए गए।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि बम की हर झूठी अफवाह का संबंध तस्करी से नहीं होता है। लेकिन ऐसे मामलों से निपटने के लिए सीआईएसएफ, एयरपोर्ट पुलिस, कस्टम की एयर इंटेलिजेंस यूनिट (AIU) और बम निरोधक दस्तों के बीच बेहतर तालमेल की बहुत सख्त जरूरत है।
रिपोर्ट के निष्कर्ष में कहा गया है कि अक्टूबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच भारतीय विमानन क्षेत्र में बम की झूठी अफवाहों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखी गई है। इसका असर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूट की 80 से अधिक उड़ानों पर पड़ा है। इनमें से ज्यादातर धमकियां केवल परेशान करने के लिए दी गई थीं, लेकिन कई एजेंसियों की सख्त जांच से यह बात सामने आई है कि तस्कर विमानन सुरक्षा प्रोटोकॉल की आड़ में तस्करी के लिए एक खतरनाक रास्ता तलाश रहे हैं।
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