गुजरात सरकार जल्द ही ऐप-आधारित कैब और ऑटो एग्रीगेटर्स के लिए एक नई और सख्त नीति की घोषणा करने जा रही है। इस आगामी नीति के तहत कैब सेवाओं के लिए एक न्यूनतम बेस फेयर निर्धारित किया जाएगा। नए नियमों का पालन करना सभी कैब ऑपरेटरों के लिए पूरी तरह अनिवार्य होगा। तय किए गए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर कंपनियों को भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।
हाल के दिनों में ओला, उबर और रैपिडो जैसे ऐप-आधारित एग्रीगेटर्स को बड़े विवादों और ड्राइवरों के बहिष्कार का सामना करना पड़ा है। यात्रियों ने भी कैब और ऑटो चालकों द्वारा जरूरत से ज्यादा किराया वसूलने की कई शिकायतें दर्ज कराई हैं। इसके अलावा, कैब ड्राइवर यात्रियों से ‘भारत टैक्सी’ नामक सहकारी राइड-हेलिंग मॉडल को अपनाने की लगातार अपील कर रहे हैं।
इन समस्याओं के समाधान के लिए राज्य के परिवहन विभाग के अधिकारियों ने ड्राइवर यूनियनों के साथ दो दौर की बातचीत पूरी कर ली है। परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि नई नीति को पूरी तरह से राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही तैयार किया जाएगा। केंद्र सरकार ने कैब एग्रीगेटर्स के लिए जो नियम अधिसूचित किए हैं, राज्य उसी ढांचे को सख्ती से लागू करेगा। इस नई दर सूची की आधिकारिक घोषणा बहुत जल्द होने की संभावना है।
राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के तहत किराया निर्धारण के लिए स्पष्ट सीमाएं तय की गई हैं। एग्रीगेटर्स को व्यस्त समय (पीक ऑवर्स) के दौरान बेस फेयर के अधिकतम दोगुने (2x) तक ही डायनेमिक या सर्ज प्राइसिंग लागू करने की अनुमति होगी। इसके विपरीत, सामान्य समय (नॉन-पीक ऑवर्स) में किराया बेस फेयर का न्यूनतम 50 प्रतिशत तक रखा जा सकेगा।
यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने भी एक अहम कदम उठाया है। मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर ‘प्री-राइड टिपिंग’ (यात्रा से पहले टिप मांगने के विकल्प) पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इस नियम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राइड को जल्दी बुक करने के नाम पर यात्रियों पर अतिरिक्त पैसे देने का कोई दबाव न बनाया जा सके।
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