अहमदाबाद शहर में साइकिल ट्रैक और फुटपाथ की कोई कमी नहीं है। हालांकि, इन जगहों पर खड़े वाहन, अतिक्रमण करने वाले स्ट्रीट वेंडर और इनका सही तरीके से इस्तेमाल न होना अक्सर इसके पूरे मकसद को ही खत्म कर देते हैं। अब 1,523 यात्रियों पर किया गया एक विस्तृत अध्ययन सामने आया है। इस रिसर्च में उन पैमानों का सटीक आंकलन किया गया है, जो अहमदाबाद के लोगों को अपने निजी वाहन छोड़कर पैदल चलने या साइकिल अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
यह रिसर्च पेपर एल्सेवियर (Elsevier) के एसएसआरएन (SSRN) प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित हुआ है, जिसका पीयर-रिव्यू होना अभी बाकी है। “फैक्टर्स अफेक्टिंग बिहेवियरल इंटेंशन टू चूज नॉन-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट इन अहमदाबाद, इंडिया” नामक इस अध्ययन को शिव नादर यूनिवर्सिटी की ट्रांसपोर्टेशन इंजीनियरिंग लेबोरेटरी की एसोसिएट प्रोफेसर शालिनी रंकावत और अनुज भारद्वाज ने मिलकर तैयार किया है।
अध्ययन से यह बात प्रमुखता से सामने आई है कि पैदल चलने और साइकिल चलाने के बुनियादी ढांचे से यात्रियों की संतुष्टि तय करने में ‘पहुंच’ (एक्सेसिबिलिटी) सबसे मजबूत कारक है। रिसर्च के अनुसार, कम से कम आधी आबादी को गैर-मोटर चालित परिवहन (NMT) के लिए नियमित तौर पर तैयार करने के लिए, पहुंच को उसकी कुल क्षमता के 28 प्रतिशत तक पहुंचना होगा। इसके बाद 25.1 प्रतिशत की दर से बेहतर स्ट्रीट डिजाइन और 21 प्रतिशत की दर से छाया, साफ-सफाई व कम शोर जैसी सुविधाओं की जरूरत होगी।
पर्यावरणीय परिस्थितियों को भी किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। शुद्ध हवा और भीषण गर्मी से बचाव जैसी पर्यावरण संबंधी जरूरतों को 17 प्रतिशत का आंकड़ा पार करना होगा। वहीं, बुनियादी सुरक्षा प्रावधानों जैसे पर्याप्त रोशनी और सुरक्षित पैदल यात्री क्रॉसिंग को 13.5 प्रतिशत तक पहुंचने की सख्त आवश्यकता है।
हालांकि, केवल बेहतरीन बुनियादी ढांचा ही लोगों की यात्रा की आदतों को नहीं बदल सकता। अध्ययन में पाया गया है कि आधी आबादी को इसके लिए तैयार करने हेतु, पैदल चलने और साइकिल चलाने के प्रति लोगों का सकारात्मक रवैया 47.7 प्रतिशत से अधिक होना चाहिए। इसके साथ ही, इन साधनों को सुविधाजनक और सुरक्षित रूप से उपयोग कर पाने में यात्रियों का आत्मविश्वास 40.9 प्रतिशत तक पहुंचना अनिवार्य है।
रिसर्च रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यात्रियों की संतुष्टि तय करने में बुनियादी ढांचे तक लोगों की पहुंच सबसे मजबूत बाहरी कारक बनकर उभरती है।
जब लक्ष्य सिर्फ लोगों को प्रोत्साहित करने से बढ़कर इसके व्यापक स्तर पर इस्तेमाल का हो, तो यह चुनौती और भी बड़ी हो जाती है। बड़े पैमाने पर लोगों को साइकिल या पैदल चलने के लिए प्रेरित करने हेतु बुनियादी ढांचे की पहुंच को अपनी क्षमता का 93.1 प्रतिशत हासिल करना होगा, जबकि जनता का सकारात्मक रवैया 97.7 प्रतिशत के उच्च स्तर तक पहुंचना चाहिए।
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