comScore लॉरेंस बिश्नोई साबरमती जेल में क्यों रहेगा कैद? जानें गुजरात से बाहर न निकाल पाने की इनसाइड स्टोरी - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

लॉरेंस बिश्नोई साबरमती जेल में क्यों रहेगा कैद? जानें गुजरात से बाहर न निकाल पाने की इनसाइड स्टोरी

| Updated: October 20, 2026 15:38

गृह मंत्रालय के सख्त आदेश के बाद कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की साबरमती जेल से बाहर आवाजाही पर पूर्ण रोक बरकरार। जानें आखिर क्यों मुंबई क्राइम ब्रांच समेत कोई भी राज्य पुलिस उसे भौतिक रिमांड पर नहीं ले सकती।

गृह मंत्रालय (MHA) के एक नए आदेश के बाद कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की जेल से बाहर आवाजाही और पुलिस हिरासत पर पूरी तरह से रोक बरकरार है। अब देश की किसी भी राज्य पुलिस को पूछताछ करनी हो या अदालत में पेशी हो, सब कुछ साबरमती सेंट्रल जेल के अंदर से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए करना अनिवार्य होगा।

हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जुड़ा अमेरिका का ‘ऑपरेशन हार्डबॉल’ हो या अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हालिया हमले की जिम्मेदारी लेना, बिश्नोई और उसका गैंग लगातार सुर्खियों में है। इतने बड़े घटनाक्रमों के बावजूद, अगस्त 2026 में गृह मंत्रालय द्वारा प्रतिबंध के आदेश को रिन्यू किए जाने के कारण उसे अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल में बेहद सख्त पाबंदियों के बीच कैद रखा गया है।

उच्च-सुरक्षा बैरक में गुजरे साढ़े तीन साल

33 वर्षीय बिश्नोई को 10 मई, 2023 को साबरमती सेंट्रल जेल लाया गया था। उसने अपने साढ़े तीन साल जेल के उस अत्यंत सुरक्षित हिस्से में गुजारे हैं, जहां बम धमाकों और आतंकवाद के गंभीर दोषियों को रखा जाता है। गृह मंत्रालय के लगातार चौथे आदेश के तहत अब उसे जेल परिसर से बाहर निकालने की सख्त मनाही है और उसकी तमाम अदालती पेशियां केवल वर्चुअल माध्यम से ही होंगी।

हिरासत और पूछताछ के कड़े नियम

इस नए पाबंदी आदेश ने किसी भी जांच एजेंसी या राज्य पुलिस के लिए बिश्नोई को भौतिक रिमांड पर लेने के रास्ते पूरी तरह बंद कर दिए हैं। पुलिस या राष्ट्रीय एजेंसियों को जो भी जरूरी पूछताछ करनी है, वह पूरी तरह से साबरमती जेल की चारदीवारी के भीतर ही संपन्न होगी।

पिछले एक वर्ष के दौरान किसी भी राज्य पुलिस को उसे हिरासत में लेकर पूछताछ करने की अनुमति नहीं मिली है। 12 अक्टूबर, 2024 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच ने भी इजाजत मांगी थी, लेकिन वे इसमें नाकाम रहे। अब अगर किसी भी एजेंसी को उससे पूछताछ करनी है, तो उसे विशेष ट्रायल कोर्ट से मंजूरी लेनी होगी या फिर केंद्र सरकार से इस पाबंदी को अस्थाई तौर पर हटाने का आग्रह करना होगा। बाहरी दुनिया से बिश्नोई का संपर्क सिर्फ अपने लंबित मामलों को लेकर वकीलों से होने वाली मुलाकातों तक ही सीमित है।

तिहाड़ से साबरमती तक का सफर

कच्छ तट पर सितंबर 2022 में 194.97 करोड़ रुपये मूल्य की 38.994 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई थी। इसी मामले में गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने अप्रैल 2023 में उसे गिरफ्तार किया और दिल्ली की तिहाड़ जेल से गुजरात लाया। पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद 10 मई, 2023 को प्रशासन ने उसे साबरमती जेल भेज दिया।

अगस्त 2023 में यह पूरा मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दिया गया। इसके फौरन बाद, गृह मंत्रालय ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 268 के तहत अपना पहला प्रतिबंध आदेश जारी कर उसके जेल से बाहर जाने पर रोक लगा दी। बाद में 19 अक्टूबर, 2023 को एनआईए ने अहमदाबाद की एक अदालत में भारतीय दंड संहिता, एनडीपीएस (NDPS) एक्ट, आईटी (IT) एक्ट और यूएपीए (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत उसके खिलाफ पूरक चार्जशीट दायर की।

नए आपराधिक कानून और धारा 303 का इस्तेमाल

अगस्त 2024 में जब पहले CrPC आदेश की अवधि समाप्त हुई, तब तक देश में नए आपराधिक कानून लागू हो चुके थे। इसे देखते हुए गृह मंत्रालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 303 के तहत एक नया पाबंदी आदेश जारी कर दिया।

बीएनएसएस की यह धारा सरकार को विशेष अधिकार देती है कि वह मानक ट्रांसफर आदेशों को दरकिनार करते हुए किसी विशिष्ट कैदी को जेल से बाहर निकालने पर रोक लगा सके। इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए मंत्रालय ने अगस्त 2025 और फिर अगस्त 2026 में इस प्रतिबंध को रिन्यू कर दिया, जिसके चलते लॉरेंस बिश्नोई आज भी साबरमती सेंट्रल जेल में कैद है।

यह भी पढ़ें-

गुजरात: दीवाली से ठीक पहले 8 घंटे की बिजली कटौती से हजारों करोड़ के नुकसान की चेतावनी

गुजरात के गरबा आयोजन में धार्मिक भेदभाव पर भड़का आक्रोश: नागरिक समाज ने की सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग

Your email address will not be published. Required fields are marked *