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गुजरात के सरकारी दफ्तरों से निकला सालों का कबाड़, स्वास्थ्य विभाग में खाली हुई 1,800 कमरों जितनी जगह

| Updated: October 21, 2026 15:39

गुजरात सरकार के विभागों में चले महा-सफाई अभियान में 6 लाख से अधिक कबाड़ का निपटान, अकेले स्वास्थ्य विभाग में खाली हुई 100 कमरों वाले 18 अस्पतालों जितनी जगह।

गुजरात भर के सरकारी परिसरों में चलाए गए एक बड़े सफाई अभियान में सालों से जमा कबाड़ का पहाड़ बाहर निकाला गया है। इस महा-सफाई से न सिर्फ कीमती जगह खाली हुई है, बल्कि बेकार और पुराने सामानों की बिक्री से सरकार को राजस्व भी प्राप्त हुआ है।

राज्य सरकार ने दो महीने पहले इस अभियान की शुरुआत की थी। इसके तहत सभी विभागों को अपना पुराना, टूटा और अनुपयोगी सामान हटाने के सख्त निर्देश दिए गए थे।

इस मुहिम का सबसे बड़ा फायदा स्वास्थ्य विभाग को मिला है। सफाई के बाद अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और क्लीनिकों में कुल 1,800 कमरों के बराबर जगह खाली हुई है। यह जगह इतनी विशाल है कि इसमें 100 कमरों वाले 18 नए अस्पताल आसानी से समा सकते हैं।

निकाले गए कबाड़ की भारी मात्रा सरकारी परिसरों में हुई सालों की अनदेखी को भी उजागर करती है। अकेले स्वास्थ्य सुविधाओं से ही 6 लाख से अधिक चीजें हटाई गई हैं। इनमें टूटी टाइलें, कांच, नल, कमोड, पाइपलाइन, ढीले तार, खराब स्विच, ट्यूबलाइट, पंखे, एसी, फर्नीचर, कंप्यूटर और प्रिंटर जैसे ढेरों सामान शामिल हैं।

अगर बड़े आंकड़ों पर गौर करें तो करीब 5 लाख अनुपयोगी लिनन आइटम निकाले गए हैं, जिनमें पुरानी चादरें, तकिए और गद्दे शामिल हैं। इसके साथ ही 10,000 खराब चिकित्सा उपकरण, 20,000 बंद पड़े बल्ब व ट्यूबलाइट और 17,266 ऐसे फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) हटाए गए हैं जो अब काम नहीं कर रहे थे।

इस अभियान के दौरान स्वास्थ्य केंद्रों के परिसरों में बेकार या टूटी हालत में खड़ी 807 एंबुलेंस और अन्य सरकारी वाहनों की भी पहचान की गई है, जिन्हें वहां से हटाया गया।

राज्य के स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने इस सफाई अभियान के नतीजों पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि अब सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र निजी अस्पतालों की तरह ही साफ-सुथरे हो गए हैं। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि भविष्य में इस साफ-सफाई को इसी तरह बरकरार रखा जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग के अलावा अन्य विभागों में भी यह अभियान जोर-शोर से चला है। वहां से भी काफी संख्या में टूटा फर्नीचर और पुरानी फाइलें हटाई गई हैं। इसके अलावा राज्य सरकार ने 15 साल से अधिक पुराने 5,486 सरकारी वाहनों का भी निस्तारण किया है।

इन पुराने वाहनों के निस्तारण में गांधीनगर से सबसे अधिक 4,026 वाहन हटाए गए। इसके बाद सूरत से 1,715, राजकोट से 1,346 और अहमदाबाद से 935 वाहन निकाले गए। हालांकि, इन चारों शहरों के अलग-अलग आंकड़े राज्य के कुल बताए गए आंकड़ों से अधिक बैठ रहे हैं, इसलिए इन संख्या के बीच मिलान की आवश्यकता है।

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