5 साल में 405 विधायकों ने छोड़ी पार्टी ,182 भाजपा में हुए शामिल ,170 ने कहा कांग्रेस को अलविदा

| Updated: June 22, 2022 8:44 pm

पहले कर्नाटक, फिर मध्य प्रदेश और अब महाराष्ट्र। महाराष्ट्र में अब विधायकों की बगावत का खेल शुरू हो गया है. शिवसेना विधायक और उद्धव सरकार में मंत्री रहे एकनाथ शिंदे ने बगावत कर दी है। इसने महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार को संकट में डाल दिया है। कर्नाटक और मध्य प्रदेश में जो हुआ वह महाराष्ट्र में होगा, तो ठाकरे सरकार का जाना तय हो जायेगा।

महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 सीटें हैं। एक विधायक के निधन के बाद फिलहाल 287 विधायक हैं। सरकार बनाने या बनाए रखने के लिए 144 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। वर्तमान में महाविकास अघाड़ी के साथ 153 विधायक हैं। शिवसेना के 55, राकांपा के 53 और कांग्रेस के 44 विधायक हैं। लेकिन एकनाथ शिंदे दावा कर रहे हैं कि उनके पास 40 से ज्यादा विधायक हैं। अगर यह बागी बीजेपी के साथ जाता है तो महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन हो सकता है.

दरअसल बीजेपी बागी विधायकों की पहली पसंद है. आंकड़े बताते हैं कि 5 साल में 405 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी। इनमें से करीब 45 फीसदी बाद में भाजपा में शामिल हो गए। ये आंकड़े एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के हैं। इसने उन विधायकों का विश्लेषण किया जिन्होंने 2016 और 2020 के बीच पांच साल में पार्टी छोड़ दी और दूसरी पार्टी में शामिल हो गए। एडीआर की रिपोर्ट पिछले साल मार्च में सामने आई थी।

बगावत से बीजेपी को सबसे ज्यादा
फायदा- मार्च 2021 में एडीआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016 से 2020 के बीच देश भर से 405 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी। इनमें से 182 या 45 फीसदी विधायक भाजपा में शामिल हो गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, 38 विधायक यानी 9.4 फीसदी कांग्रेस में शामिल हो गए। जबकि 25 विधायक तेलंगाना राष्ट्रीय समिति में शामिल हुए और 16 विधायक टीएमसी में शामिल हुए। नेशनल पीपुल्स पार्टी में 16, जदयू में 14, बसपा और तेदेपा में 11-11 विधायक शामिल हुए।

  • बगावत का सबसे बड़ा झटका कांग्रेस को लगा है। पांच साल में 170 कांग्रेस विधायकों ने पार्टी छोड़ दी। जबकि बीजेपी के 18 विधायक ही पार्टी छोड़ पाए . बसपा और तेदेपा के 17-17 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी। तो 5 साल में शिवसेना का एक भी विधायक ऐसा नहीं जिसने पार्टी को अलविदा कहा हो


कुछ यू रहा दल बदल समीकारण

  • बीजेपी- 182
    कांग्रेस-38
    टीआरएस-25
  • टीएमसी- 16
    एनपीपी- 16
    जेडीयू – 14
    बसपा- 11
  • टीडीपी -11
    एनडीपीपी -10
  • शिवसेना -9
    अन्य- 73

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