नई दिल्ली: अडानी समूह के जीत अडानी ने आज गुरुवार को दिल्ली में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ (AI Impact Summit) को संबोधित किया। उन्होंने ‘भारत की इंटेलिजेंस सदी: संप्रभुता, पैमाना और राष्ट्रीय नवीनीकरण’ (India’s Intelligence Century: Sovereignty, Scale and National Renewal) के विषय पर अपने विचार रखे।
जीत अडानी ने कहा कि जिस तरह इंटरनेट ने कॉमर्स को बदला था, वैसे ही आज एआई संप्रभुता (sovereignty) को फिर से परिभाषित करने जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के सामने सवाल यह नहीं है कि हम एआई अपनाएंगे या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि क्या भारत इंटेलिजेंस का आयात करेगा या उसे खुद बनाएगा। उन्होंने कहा कि जब भारत तकनीक बनाता है, तो वह नियंत्रण के लिए नहीं बल्कि समावेश (inclusion) के लिए बनाता है।
जीत अडानी ने भारत की ‘एआई सदी’ (AI century) को परिभाषित करने वाले तीन मुख्य स्तंभों (pillars) का जिक्र किया:
- पहला- एनर्जी सॉवरेन्टी (Energy Sovereignty): एआई कोड में लिखा जाता है, लेकिन यह बिजली से चलता है। अगर किसी देश का एनर्जी सिस्टम कमजोर है, तो उसका इंटेलिजेंस सिस्टम भी कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि भारत का रिन्यूएबल विस्तार अब सिर्फ क्लाइमेट पॉलिसी नहीं, बल्कि रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर पॉलिसी है।
- दूसरा- कंप्यूट और क्लाउड सॉवरेन्टी (Compute and Cloud Sovereignty): आज के एआई युग में सॉवरेन कंप्यूट क्षमता एक रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर बन गई है। भारत को महत्वपूर्ण एआई वर्कलोड को घरेलू स्तर पर होस्ट करना चाहिए और बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर इकोसिस्टम का निर्माण करना चाहिए।
- तीसरा- सर्विसेज सॉवरेन्टी (Services Sovereignty): हमारा एआई सबसे पहले भारत की उत्पादकता (productivity) को बढ़ाएगा। यह कृषि को बेहतर करेगा, शिक्षा को बड़े पैमाने पर पर्सनलाइज करेगा और ग्रामीण भारत में हेल्थकेयर डायग्नोस्टिक्स का विस्तार करेगा। दूसरों के लिए ‘मार्जिन मल्टीप्लायर’ बनने से पहले, एआई को भारतीय नागरिकों के लिए ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ बनना चाहिए।
100 बिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा
अपने संबोधन में जीत अडानी ने अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी द्वारा हाल ही में की गई एक ऐतिहासिक घोषणा की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि अडानी ग्रुप देश के लिए सॉवरेन, ग्रीन-एनर्जी आधारित एआई इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म बनाने के लिए 100 बिलियन डॉलर का निवेश करेगा।
यह 5 गीगावाट और 250 बिलियन डॉलर के इंटीग्रेटेड एनर्जी और कंप्यूट इकोसिस्टम की शुरुआत है, जिसे भारत की इंटेलिजेंस क्रांति को आधार देने के लिए डिजाइन किया गया है। यह निवेश एआई को आयात करने से लेकर उसका खुद निर्माण करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
अंत में जीत अडानी ने कहा कि वे नए भारत के नागरिक के रूप में यहाँ खड़े हैं। आधुनिक राष्ट्रवाद बयानबाजी से ज्यादा क्षमता (Capability over rhetoric) और भेद्यता से ज्यादा लचीलेपन (Resilience over vulnerability) पर निर्भर करता है। उन्होंने विश्वास जताया कि जब भारत आगे बढ़ता है, तो वह हावी होने के लिए नहीं, बल्कि निर्माण करने और सबको साथ लेकर चलने के लिए बढ़ता है।
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