भाजपा, शिवसेना के बीच फिर से गठजोड़ की अटकलें

| Updated: July 5, 2021 1:36 pm

दिल्ली में पिछले दिनों उद्धव ठाकरे और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात से भाजपा और शिवसेना के बीच फिर से गठजोड़ की अटकलें लगने लगी हैं। यह बहुत असंभव भी नहीं लग रहा है। अंदरखाने महाराष्ट्र के कई नेता ऐसा मान रहे हैं।
उद्धव और पीएम के बीच की बैठक की बातें भले ही बाहर नहीं आई हों, लेकिन माना जा सकता है कि यह दोनों पक्षों के बीच शांति वार्ता ही थी। पहले सीएम ठाकरे के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल पीएम से मिला, फिर सीएम ने अकेले मुलाकात की। एनडीटीवी के ग्रुप एडिटर श्रीनिवासन जैन अपने ब्लॉग में महाराष्ट्र के एक नेता के हवाले से लिखते हैं कि निश्चित तौर पर अकेले हुई इस मुलाकात में उद्धव ठाकरे ने पीएम के समक्ष बताया होगा कि किन परिस्थितियों में नवंबर, 2019 में उन्होंने भाजपा से 30 साल का गठबंधन तोड़ लिया था।
फिर गठजोड़ की अटकलें इससे भी मजबूत हुईं कि मुलाकात के दो दिन बाद ही भाजपा के प्रबल आलोचक रहे सेना सांसद संजय राउत ने मोदी को देश का सबसे बड़ा नेता बताया। सार्वजनिक रूप से तो महाविकास अघाड़ी सरकार के तीनों दलों सेना, कांग्रेस और एनसीपी ने सरकार पर संकट की बात को खारिज किया है, लेकिन कुछ तो सुगबुगाहट हो ही रही है।
इसके बाद खबर आई कि शिवसेना के विधायक प्रताप सरनायक ने उद्धव को पत्र लिखकर भाजपा से फिर गठबंधन की अपील की है। उनका कहना है कि दोनों दलों के नेताओं में आज भी अच्छे संबंध हैं और इसका फायदा लिया जाना चाहिए।
भाजपा को छोड़कर एनसीपी और कांग्रेस के साथ जाते समय उद्धव ने कहा था कि भाजपा महाराष्ट्र सरकार में बड़ी भूमिका चाह रही थी। चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी थी। खैर इसी के बाद उन्होंने महाविकास अघाड़ी सरकार बनाई और मुख्यमंत्री बने।
एक नेता का कहना है कि मौजूदा गठबंधन और सरकार से शिवसेना नाखुश नहीं है। सरकार सही चल रही है और उद्धव फैसले लेने के लिए स्वतंत्र हैं। लेकिन, शिवसेना के एक धड़े में यह विचार है कि भाजपा से फिर हाथ मिला लेना चाहिए। उनका मानना है कि दो साल सरकार साथ चलाने के बाद भी शिवसेना का कांग्रेस से कोई जुड़ाव नहीं हो पाया है। उद्धव बहुत सहज नहीं हैं। एनसीपी के शरद पवार गठबंधन को चलाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
अटकलों को बल तब भी मिला जब शिवसेना के स्थापना दिवस पर अपने संबोधन में उद्धव ने भाजपा पर सीधा निशाना नहीं साधा। जबकि, उससे कुछ ही दिन पहले मुखपत्र सामना में अयोध्या में जमीन खरीद में राम मंदिर ट्रस्ट पर आरोप लगा था और मुंबई में दोनों दलों के कार्यकर्ता भिड़ भी गए थे।
अपने भाषण में उद्धव ने बिना नाम लिए महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख पर निशाना भी साधा, जिन्होंने कहा था कि आगामी चुनाव में पार्टी अकेले लड़ना चाहेगी। उद्धव ने कहा था, ‘अगर हम जनता की समस्याओं का समाधान पेश नहीं करेंगे और बस अकेले चुनाव लड़ने की बात करेंगे, तो लोग चप्पलों से मारेंगे।’
भाजपा के एक नेता ने भाजपा को लेकर उद्धव की चुप्पी को अहम बताया है।
फिर गठजोड़ की चर्चाओं के बीच एक सवाल है, जो अटकाता है, वह है मुख्यमंत्री पद। उद्धव पद छोड़ना नहीं चाहेंगे और भाजपा इस पद पर अपने व्यक्ति को बैठाना चाहती है। देवेंद्र फड़नवीस और उद्धव ठाकरे की महत्वाकांक्षाओं को ही भाजपा-सेना के अलगाव की वजह माना जाता है। 2019 में हुए कई नाटकीय घटनाक्रम इसकी गवाही देते हैं।
फिलहाल एक समाधान यह माना जा रहा है कि फड़नवीस को केंद्र में कोई अहम पद देकर महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन की राह बनाई जा सकती है। ऐसे में हो सकता है कि उद्धव के साथ भाजपा के दो उप मुख्यमंत्री रहें। इनमें विदर्भ से ओबीसी नेता सुधीर मुंगतीवार और मुंबई से मराठा नेता आशीष शेलार के नाम सामने आ रहे हैं।
श्रीनिवासन जैन लिखते हैं कि उनसे महाराष्ट्र के तीन नेताओं ने इन संभावनाओं का जिक्र किया, लेकिन सबका यह भी कहना है कि अभी बहुत जल्दी कुछ नहीं होने जा रहा। सभी दल महामारी के कारण बने हालात के सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। अगले साल फरवरी में मुंबई में नगर निगम का चुनाव होना और उस समय कुछ तस्वीर साफ हो सकती है। दोनों दल इस बात पर स्पष्टता चाहेंगे, ताकि चुनाव में उसी के हिसाब से रणनीति बना सकें।

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