जनगणना 2021: इंग्लैंड और वेल्स में ईसाई हो गए अल्पसंख्यक

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जनगणना 2021: इंग्लैंड और वेल्स में ईसाई हो गए अल्पसंख्यक

| Updated: November 30, 2022 10:47

इंग्लैंड और वेल्स में पहली बार ईसाई धर्म अल्पसंख्यक धर्म (minority religion) बन गया है। इसका खुलासा 2021 की जनगणना (census) से हुआ है। जनगणना के दिन यानी  21 मार्च 2021 को 46.2% लोगों ने ही खुद को ईसाई बताया। इस तरह की इनकी आबादी 2011 की जनगणना में 59.3% की तुलना में 13 प्रतिशत घट गई। जनगणना से एक और बड़ी बात निकली। वह यह कि बिना किसी विशेष धर्म वाले लोगों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।

जनगणना से पता चला कि मुस्लिम जनसंख्या अब 4.9 से बढ़कर 6.5 प्रतिशत हो गई है। पहले मुस्लिम जनसंख्या 27 लाख थी, जोकि अब बढ़कर 39 लाख हो गई है। इसी तरह हिंदू आबादी 1.5 प्रतिशत से बढ़कर 1.7 प्रतिशत हो गई है। 2011 के आंकड़ों के मुताबिक, ब्रिटेन में 8.18 लाख हिंदू थे, जो अब बढ़कर 10 लाख हो गए हैं।

ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स (ONS) ने कहा कि इंग्लैंड और वेल्स में ईसाइयों की कुल आबादी अब 46.2 प्रतिशत (2.75 करोड़) रह गई है। 2011 में यह 59.3 प्रतिशत थी। इस तरह ईसाइयों की आबादी में 13.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

कोई धर्म नहीं मानने वालों का आंकड़ा बढ़कर 37.2 प्रतिशत हो गया है। यानी हर तीन में से एक से अधिक व्यक्ति कोई धर्म नहीं मानता है। 2011 में यह आंकड़ा 25 प्रतिशत था। यहूदी के रूप में पहचाने जाने वाले लोगों की संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। यानी अभी भी यह कुल जनसंख्या के 0.5 प्रतिशत पर बरकरार हैं।

जनगणना में धर्म का प्रश्न स्वैच्छिक है, और 94 प्रतिशत निवासियों ने इसका उत्तर दिया। बीती जनगणना में 92.9 प्रतिशत लोगों ने इसका जवाब दिया था। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि ब्रिटेन की राजधानी लंदन के उत्तर में हैरो में सर्वाधिक हिंदू हैं। वहां उनकी आबादी 25.8 प्रतिशत है। इसके अलावा लीसेस्टर शहर में हिंदू आबादी 17.9 प्रतिशत है। मुस्लिम आबादी का सबसे अधिक प्रतिशत वाला क्षेत्र पूर्वी लंदन के टॉवर हैमलेट्स और न्यूहैम क्षेत्रों में रहा। इसके बाद उत्तर-पश्चिम इंग्लैंड में डार्वेन के साथ बोरो ब्लैकबर्न था।

पोलिश और रोमानियाई के बाद भारतीय इंग्लैंड और वेल्स में निवासियों के बीच तीसरी सबसे आम गैर-ब्रिटेन पहचान बनी हुई है। 2011 में दूसरी सबसे आम भाषा पंजाबी थी, जो अब तीसरे नंबर पर आ गई है।  इसके बाद उर्दू चौथे स्थान पर है। दक्षिण एशियाई भाषाओं में बंगाली और गुजराती 2011 में चौथे और पांचवें स्थान से क्रमशः आठवें और नौवें स्थान पर आ गए हैं। जनगणना में चुना गया अगला सबसे आम जातीय समूह एशियाई, एशियाई ब्रिटिश या एशियाई वेल्श का कुल आबादी का 9.3 प्रतिशत हिस्सा था- 5.5 मिलियन लोग, 4.2 मिलियन से ऊपर। बता दें कि स्कॉटलैंड की जनगणना 2021 में होने वाली थी, लेकिन कोविड-19 के कारण इसमें एक साल की देरी हो गई है।

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