कोरोना की दूसरी लहर में जान गवांने वाले डॉक्टर्स को VoI की सलाम

| Updated: July 1, 2021 9:26 pm

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान हमने बहुत कुछ मुश्किलें देखी. कइं लोगों ने अपने प्रियजनो कों खोया है. कुछ लोगों को तो इलाज भी नहीं मिल सका. इस दौरान हमारी मेडिकल व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई थी. डॉक्टर्स ने लोगों को बचाने के लिये अपनी तरफ से काफी प्रयास किए. इस में कई डॉक्टर्स खुद कोरोना की चपेट में आ गये. यहां कुछ ऐसे डॉक्टर्स के बारे में बताया गया है, जिन्हो ने मरीजों को बचाते बचाते अपनी जान दे दी.

डॉ अनिमेष देसाई

73 वर्षीय डॉ. अनिमेष देसाई अगर कोरोना काल में अस्पताल नहीं जा पाए तो उन्होंने घर से ही मरीजों की सेवा कर अपनी ड्यूटी निभाई। हालांकि डॉ. अनिमेष देसाई ने मरीजों को बाहर का खाना नहीं खाने दिया, लेकिन वे खुद बाहर के खाने के शौकीन थे। 73 साल की उम्र में भी उनमें युवाओं के जितना उत्साह था। उन्हें तरह-तरह के व्यंजन खाने और बाहर जाने का शौक था। वह अहमदाबाद शहर के तीन अस्पतालों में पिछले 40 साल से लगातार मरीजों का इलाज कर रहे थे । कोरोना में जब परिवार ने अस्पताल जाने से मना किया तो घर से ही मरीजों का इलाज करने लगे। डॉ अनिमेष देसाई अहमदाबाद मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके थे । इस साल 10 मई को वे कोरोना पॉज़िटिव पाए गए और 4 दिनों के भीतर दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई।

डॉ एन.डी. घासुरा

डॉ एन डी घासुरा पिछले 79 वर्षों से राज्य में हर महामारी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डॉ. एन.डी. ने गुजरात सरकार और दिल्ली स्थित डब्ल्यूएचओ में स्वास्थ्य सेवा देने के अतिरिक्त निदेशक के रूप में भी काम किया है। जब सूरत में प्लेग फैला तो उन्होंने अपनी प्रभावी सेवाएं प्रदान करके प्लेग पर काबू पाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एन डी घासुरा का स्वभाव सख्त था लेकिन लोगों की सेवा के लिए वे हमेशा तैयार रहते थे । 58 साल की उम्र में वे सेवानिवृत्त हुए लेकिन जब सरकार को कोरोना महामारी में उनके अनुभव की जरूरत पड़ी तो वे तुरंत सरकार की मदद हेतु सामने आए। सच में डॉ. एनडी घासुरा जैसे कर्तव्यनिष्ठ डॉक्टरों और प्रबंधकों के कारण ही देश में महामारी से उबर रहे हैं।

डॉ प्रताप टांक

70 साल के डॉक्टर प्रताप टांक कोरोना होने के 7 दिन पहले तक मरीजों की सेवा कर रहे थे। पुरानी फिल्मों और पुराने गानों को सुनने का शौक रखने वाले डॉक्टर प्रताप स्वभाव से बेहद विनम्र थे. 21 अप्रैल तक अस्पताल जाते रहे और अप्रैल अंत में डॉ प्रताप कोविड पॉज़िटिव पाए गए । डॉ. प्रताप अपने काम को लेकर अत्यंत गंभीर और मेहनती रहे ।

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