डॉन रवि पुजारी को पूछताछ के लिए बेंगलुरु से गुजरात लाया गया

| Updated: July 19, 2021 10:31 pm

कर्नाटक के उडुपी में जन्मे अंडरवर्ल्ड डॉन रवि पुजारी जो कभी छोटा राजन का दाहिना हाथ हुआ करता था, उस समय वह मुंबई के अंधेरी में था। पुजारी स्थानीय गिरोह की आपराधिक गतिविधियों में फंस गया और 1990 में बाला ज़ाल्टे नामक क्षेत्र में एक खूंखार गैंगस्टर की हत्या के बाद कुख्यात अपराधी के रूप में चर्चित हो गया और तभी से वह मुंबई पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया।

नब्बे के दशक में छोटा राजन अंडरवर्ल्ड डॉन का दाहिना हाथ था और दुनिया का मोस्ट वांटेड आतंकवादी दाऊद इब्राहिम कथित तौर पर पाकिस्तान में स्थित था, पुजारी की भर्ती दोनों ने मिलकर की और मुंबई शहर की सड़कों पर तबाही मचा दी, साथ ही ओम प्रकाश कुकरेजा जैसे बिल्डरों को जबरन वसूली के लिए मार डाला।
1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट के बाद छोटा राजन डी गैंग (दाऊद इब्राहिम) से अलग हो गया। उस समय पुजारी और एक अन्य गैंगस्टर गुरु साटम ने छोटा राजन का साथ दिया। हालांकि पुजारी ने 2006 में छोटा राजन से नाता तोड़ लिया और अपना गैंग बना लिया। बाद में वह दक्षिण अफ्रीका के बुर्किना फासो में शिफ्ट हो गया और वहां कई बड़े रेस्तरां भी खोली। हालांकि, उन्होंने अपनी नापाक हरकतों को जारी रखा।

रवि पुजारी के खिलाफ बेंगलुरु में 39, मैंगलोर में 36, उडुपी में 11, महाराष्ट्र में 49 और गुजरात में रंगदारी की धमकी देने के करीब 26 मामले दर्ज हैं। हालांकि, गुजरात पुलिस के सूत्रों ने कहा कि पुजारी ने गुजरात के कुछ कांग्रेस विधायकों और पेशेवरों सहित 70 से अधिक जौहरियों, व्यापारियों, बिल्डरों, राजनेताओं को धमकी भरे कॉल किए थे। इनमें से ज्यादातर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से भी परहेज किया।

“यहां तक कि एक डॉक्टर सहित तीन व्यवसायियों ने पुजारी को फिरौती के पैसे दिए थे। बाद में उनकी पहचान कर ली गई लेकिन उन्होंने शिकायत करने से इनकार कर दिया।’ -गुजरात के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया।

उसके लगभग 15 वर्षों तक अंडरग्राउन्ड रहने के बाद कर्नाटक पुलिस ने 2018 में दक्षिण अफ्रीका के बुर्किना फासो में उसे ट्रैक करने में कामयाबी हासिल की, जहां वह एंथनी फर्नांडीज के फर्जी नाम से रह रहा था। हालाँकि, इससे पहले कि अधिकारी उस तक पहुँच पाते, गैंगस्टर जिसके खिलाफ 15 से अधिक रेड कॉर्नर नोटिस थे, सेनेगल भाग गया।

बाद में उसे 2019 की शुरुआत में सेनेगल में ट्रैक किया गया और सेनेगल पुलिस ने हिरासत में लिया। वहां पुजारी ने इस बात से भी इनकार किया कि वह पुजारी था और उसने कहा कि उनका नाम एंथनी फर्नांडीज है। हालांकि, सेनेगल अधिकारियों ने कर्नाटक पुलिस के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें भारत प्रत्यर्पित कर दिया गया।

कर्नाटक पुलिस की हिरासत में रहने के बाद गुजरात पुलिस जिसने उसके स्थानांतरण वारंट के लिए आवेदन किया था, उसे अंततः जून 2021 में सफलता मिली और 19 जुलाई 2021 को उसके हिरासत की अनुमति मिली।

सीनियर डीसीपी क्राइम ब्रांच चैतन्य मांडलिक ने बताया कि उसे पर्याप्त सुरक्षा के साथ बेंगलुरु से स्पेशल फ्लाइट से अहमदाबाद लाया गया और बोरसाड भेजा गया. मांडलिक ने कहा, “उसके खिलाफ दर्ज कई मामलों में हम उसे 20 जुलाई को रिमांड के लिए अदालत में पेश करेंगे।” पुजारी ने अमूल के एमडी आरएस सोढ़ी को भी धमकाया, क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के मुताबिक, पुजारी के आदमियों ने अमूल के एमडी आरएस सोढ़ी को उनके लैंडलाइन नंबर पर धमकी दी थी और 25 करोड़ रुपये से ज्यादा की सुरक्षा राशि (जिंदा छोड़ने की रकम) मांगी थी. “कॉल एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से किया गया था और सोढ़ी को सुरक्षा राशि का भुगतान नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी। सोढ़ी ने बाद में पुलिस से संपर्क किया था,” -अधिकारी ने कहा।

पुजारी गुजरात के आनंद में एक प्रग्नेश पटेल के मामले में भी अभियुक्त था 2016 के अंत में गुजरात के आनंद में रवि पुजारी के आदमियों ने बोरसाड के निर्दलीय पार्षद प्रग्नेश पटेल को गोली मार दी थी. फायरिंग में वह घायल हो गया। गुजरात एटीएस ने उस समय पुजारी के शार्पशूटर सुरेश पिल्लै, घनश्याम गिरी और शब्बीर को गिरफ्तार किया था। उधर, गुजरात एटीएस ने मुख्य आरोपी चंद्रेश पटेल को थाईलैंड में ट्रेस किया था। पटेल अभी भी थाईलैंड में नजरबंद हैं। एटीएस के सूत्रों के मुताबिक, प्रग्नेश ने चंद्रेश की मां को हराया था, जो बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रही थीं और इसलिए चंद्रेश ने पुजारी को प्रग्नेश को खत्म करने के लिए 25 लाख रुपये की सुपारी दी थी।

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