गुजरातियों का नहीं छूट रहा विदेश में बसने का सपना

| Updated: September 20, 2022 11:08 am

धार्मिक ग्रंथों की आड़ में नकली पासपोर्ट यूके भेजने के रैकेट का खुलासा

यूके में नकली पासपोर्ट से नौकरी और बैंक खाता खुलवाए जा रहे थे

यूके में चिराग और अहमदाबाद में विकास मिलकर चला रहे थे रैकेट

गिरफ्तारी से बचने के लिए विकास भी यूके भाग गया


गुजरातियों में विदेश में बसने का मोह कुछ ऐसा है है की इसके लिए वह किसी भी तरह के खतरे को उठाने के लिए तैयार है। फिर चाहे उन्हें अवैध तौर से ही क्यों ना जाना पड़े। कनाडा (Canada )के रास्ते अमेरिका (America )के ख्वाब में कनाडा अमेरिका सीमा (Canada US border )के पास डिगूचा के एक पटेल परिवार की माइनस 35 डिग्री सेल्सियस तापमान में ठंड से मौत हो गयी थी। जिसमे जगदीश पटेल (35), पत्नी वैशालीबेन (33), बेटी विहंगा (गोपी) (12) और तीन वर्ष के बेटे धार्मिक का समावेश था इस दर्दनाक खबर ने गुजरात को हिला कर रख दिया था। इसके बाद भी अवैध प्रवासन का सिलसिला रुक नहीं रहा। गुजरात से लाखों रूपया खर्च कर, बेहतर जिंदगी और विदेशी मुद्रा का मोह उन्हें किसी भी तरह का जोखिम उठाने को प्रेरित करता है।

राजनयिक स्तर पर अवैध प्रवासन को रोकने के कोशिश के बावजूद विदेश का मोह नहीं छूट रहा है , जो अवैध प्रवासन के रैकेट को फलने फूलने का मौका देता है। 12 सितंबर को भी गुजरात पुलिस ने एक ऐसे रैकेट के चार आरोपियों को पकड़ा था जो लाखों रुपया लेकर भी अवैध तौर से कनाडा भेजने के व्यवसाय से जुड़े थे। 136 गुजराती अमेरिका जाने की बजाय तुर्की पहुंच गए , जंहा उनको एजेंट द्वारा बंधक बना कर रखा गया। यह कुछ मामले हैं , लेकिन गुजरात में यह आम कहानी है। विदेश जाने का मोह ऐसा है कि जाने वाला भी जानता है कि वह गलत कर रहा है , फिर भी लाखो खर्च कर कोई भी खतरा उठाने को तैयार रहता है।

विदेश में बसना सामजिक प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। जो इस अवैध व्यवसाय से जुड़े कबूतरबाजों को खुला मैदान मुहैया कराता है। इसी तरह का एक और मामला सामने आया है।

यूके में अवैध तौर से रह रहे भारतियों को नौकरी या बैंक खाता खुलवाने के लिए आवश्यक फर्जी पासपोर्ट धार्मिक ग्रंथों में छुपा कर कुरियर के माध्यम से विदेश भेजने के रैकेट का खुलासा किया है। सीआईडी क्राइम ने इस मामले में मुख्य सूत्राधार यूके चिराग पटेल और राणीप के विकास जयस्वाल के खिलाफ मामला दर्ज करके जाँच शुरू की है। सूत्रों के मुताबिक जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने अन्य व्यक्तियों के फोटो आईडी कॉपी का इस्तेमाल करके कुरियर से नकली पासपोर्ट भेज रहे थे। करियर कंपनी के संचालक ने पुलिस को लिखित शिकायत दर्ज कराई थी , जिसकी जाँच के दौरान पुरे मामले का खुलासा हुआ है।

सीआईडी क्राइम (CID Crime )की जाँच में खुलासा हुआ कि फर्जी पासपोर्ट तैयार कर धार्मिक ग्रंथों में छुपा कर राणीप में रहने वाले वाले विकास जयस्वाल यूके में रहने वाले अपने मित्र चिराग पटेल के साथ मिलकर इस रैकेट को संचालित करते थे , विकास जयस्वाल फर्जी पासपोर्ट धार्मिक ग्रंथों में छुपा दिया , यह पार्सल विकास ने करियर व्यवसाय से जुड़े अपने मित्र निकुंज को दिया। अलग अलग कुरियर कंपनी के माध्यम से साढ़े तीन किलो का पार्सल डीएचएल कंपनी के ऑफिस में पंहुचा। जिसकी स्कैनिंग के दौरान जानकारी मिली कि जनवरी 2019 में आरोपी ने “भगवान स्वामीनारायण जीवन चरित्र भाग 1 -4 ” पार्सल से यूके भेजा। ग्रंथ के बीच में फर्जी पासपोर्ट छुपाया गया था।

हाईस्पीड कुरियर कंपनी के सुपरवाइजर अश्विन जयंतीलाल पंड्या ने मामले की लिखित जानकारी सीआईडी क्राइम को दी थी , जिसके आधार पर जाँच शुरू हुयी। जाँच के दौरान जानकारी मिली कि विकास जयस्वाल स्टूडेंट वीजा के आधार पर 2009 में यूके गया था ,तब उसका संपर्क चिराग पटेल से हुआ था। चिराग यूके में भारतियों को नौकरी दिलाने का काम करता था ,नौकरी चाहने वाले कई लोगों के पास पासपोर्ट नहीं होने के कारण चिराग पटेल डुप्लीकेट पासपोर्ट के आधार पर उन्हें नौकरी दिलाता था ,साथ ही बैंक एकाउंट खुलवाता था।

पुलिस ने एक भारतीय और एक यूके का नकली पासपोर्ट बरामद किया है। 2011 में भारत वापस आने पर अपना व्यवसाय शुरू किया था ,इस दौरान वह विकास के संपर्क में रहा। 2017 में विकास को फ़ोन कर चिराग ने कहा कि मेरा आदमी तुमको ( विकास को ) पासपोर्ट दे जायेगा ,तुम इसे कुरियर कर देना। इस तरह विकास कुरियर से पासपोर्ट भेज रहा था।

पुलिस जाँच के दौरान विकास ने कबूला कि वह चिराग के आदमी को नहीं जानता था इस तरह विकास ने कई पासपोर्ट यूके भेजे। खुद की गिरफ्तारी से बचने के लिए विकास भी मकान पर कर्ज लेकर यूके भाग गया था। पार्सल भेजने के लिए भी दूसरे के आईडी का इस्तेमाल किया जाता था। चिराग नकली पासपोर्ट के बदले लाखों रुपया लेता था। किसी के पासपोर्ट में किसी की फोटो चिपकाकर नकली पासपोर्ट तैयार किया जाता था।


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