उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की एक ऐतिहासिक पहल के तहत, भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा में देश का पहला राष्ट्रीय ‘गौ संस्कृति’ संग्रहालय (National Cow Culture Museum) स्थापित होने जा रहा है। यह भव्य संग्रहालय पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के परिसर में आकार लेगा। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भूमि का चयन कर लिया गया है।
आगरा के मंडलायुक्त नागेंद्र प्रताप ने इस परियोजना की व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह संग्रहालय केवल एक प्रदर्शनी नहीं होगा, बल्कि यह आम जनमानस को मवेशियों के “धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व” के साथ-साथ गाय और उसके उत्पादों की वैज्ञानिक उपयोगिता से भी रूबरू कराएगा।
उन्होंने कहा, “परंपरा और विज्ञान का यह अनूठा संगम गौ संरक्षण के प्रति एक समग्र और गहरी समझ विकसित करने में सहायक होगा।”
अधिकारियों ने परखी तैयारी
शनिवार (14 फरवरी, 2026) को इस विजन को धरातल पर उतारने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम ने प्रस्तावित स्थल का दौरा किया और परियोजना की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा की।
इस निरीक्षण दल में ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र, मंडलायुक्त नागेंद्र प्रताप, जिलाधिकारी सीपी सिंह, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लक्ष्मी एन, परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सूरज पटेल, पर्यावरण सलाहकार मुकेश शर्मा और वेटरनरी विश्वविद्यालय के डॉ. अमित शुक्ला शामिल थे।
भारत की समृद्ध गौ विरासत का दर्शन
मंडलायुक्त ने बताया कि यह संग्रहालय भारत की गौ विरासत का एक जीता-जागता दस्तावेज होगा। यहाँ मवेशियों के लगभग 100 डिजिटल और प्रतीकात्मक मॉडल प्रदर्शित किए जाएंगे। इसमें देश की सभी प्रमुख नस्लों के साथ-साथ उन प्रजातियों को भी स्थान मिलेगा जो लुप्तप्राय हैं, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां अपनी इस अनमोल धरोहर को पहचान सकें।
आधुनिक तकनीक से जानेंगे आयुर्वेद और विज्ञान
संग्रहालय का एक मुख्य आकर्षण वह प्रदर्शनी होगी जो पूरी तरह से गाय के दूध और उससे बने उत्पादों—जैसे दही, पनीर और घी—को समर्पित होगी। यहाँ आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके दर्शकों को इन उत्पादों के वैज्ञानिक, पोषण संबंधी और आयुर्वेदिक गुणों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
इसके अतिरिक्त, परिसर में ही एक ‘डेयरी पार्लर’ भी विकसित किया जाएगा, जहाँ आगंतुक शुद्ध और ताज़ा डेयरी उत्पादों का स्वाद ले सकेंगे।
‘माता’ के सम्मान और अर्थव्यवस्था का सेतु
यह परियोजना भारतीय संस्कृति में गाय को ‘माता’ के रूप में दिए गए सर्वोच्च स्थान को सम्मानित करती है और सनातन परंपरा में इसके आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करती है।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस संग्रहालय का उद्देश्य यह समझाना है कि गौ संरक्षण केवल आर्थिक या कृषि से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि यह हमारी धार्मिक आस्थाओं, सात्विक जीवनशैली और जन कल्याण से भी गहरे रूप में जुड़ा हुआ है।
उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जा रहा यह संग्रहालय ब्रज क्षेत्र की पहचान को वैश्विक पटल पर और मजबूत करेगा। यह वैज्ञानिक मानकों के आधार पर एक गौ-आधारित अर्थव्यवस्था (Cow-based economy) को समझने और अपनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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