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गलगोटिया यूनिवर्सिटी ‘रोबोडॉग’ विवाद: प्रोफेसर नेहा सिंह निलंबित नहीं, जांच रहेगी जारी

| Updated: February 20, 2026 12:57

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने 'रोबोडॉग' विवाद पर तोड़ी चुप्पी। प्रोफेसर नेहा सिंह के सस्पेंशन की खबरों का किया खंडन और दिए जांच के आदेश। जानें चीनी रोबोट को स्वदेशी बताने वाले इस पूरे मामले की सच्चाई।

‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ (India AI Impact Summit 2026) में हुए तथाकथित “रोबोडॉग विवाद” के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने आधिकारिक तौर पर स्थिति स्पष्ट कर दी है। यूनिवर्सिटी ने इस बात की पुष्टि की है कि प्रोफेसर नेहा सिंह को निलंबित नहीं किया गया है। मामले की निष्पक्ष जांच होने तक उन्हें संस्थान के साथ अपने पद पर बने रहने का निर्देश दिया गया है।

यह पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब समिट में यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर एक रोबोटिक कुत्ते का प्रदर्शन किया गया। शुरुआत में इसे यूनिवर्सिटी की अपनी AI रिसर्च विंग द्वारा विकसित एक स्वदेशी इनोवेशन बताया गया था। लेकिन, जल्द ही यह सच्चाई सामने आ गई कि यह मॉडल कोई स्वदेशी आविष्कार नहीं, बल्कि चीन निर्मित ‘यूनिट्री गो2’ (Unitree Go2) है।

एक्सपो विवाद के बाद यूनिवर्सिटी की प्रतिक्रिया

गलगोटिया यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार, नितिन कुमार गौर ने बताया कि संस्थान ने संबंधित अधिकारियों को अपना स्पष्टीकरण सौंप दिया है। उन्होंने स्वीकार किया है कि इस रोबोट को जिस तरीके से प्रदर्शित किया गया, वह एक “गलती” थी।

आलोचनाओं को देखते हुए, यूनिवर्सिटी ने तत्काल प्रभाव से समिट के एक्सपो से अपना स्टॉल हटा लिया है। इसके साथ ही, इस पूरी घटना के कारण हुई शर्मिंदगी के लिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी गई है। रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया कि आखिर यह चूक कैसे हुई, इसके मूल कारणों का पता लगाने के लिए एक आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है।

नितिन कुमार गौर ने कहा, “हम कभी नहीं चाहते कि यूनिवर्सिटी या हमारे देश की छवि खराब हो।”

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हालांकि इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति से बचा जा सकता था, लेकिन किसी को भी गुमराह करने का संस्थान का कोई इरादा नहीं था। यूनिवर्सिटी इनोवेशन और नैतिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है और यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो।

प्रोफेसर नेहा सिंह की वर्तमान स्थिति

समिट के बाद इंटरनेट पर प्रोफेसर नेहा सिंह के करियर और नौकरी को लेकर कई तरह की अफवाहें उड़ रही थीं। इन अटकलों पर विराम लगाते हुए, रजिस्ट्रार ने साफ किया कि उन पर निलंबन की कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसके बजाय, जांच पूरी होने तक उन्हें संस्थान में बने रहने को कहा गया है।

गौर ने यह जरूर स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, लेकिन महज एक व्यक्ति के काम के आधार पर पूरे विश्वविद्यालय को बदनाम करना गलत है।

उन्होंने कहा, “वे भी भारत के नागरिक हैं, और हम सभी चाहते हैं कि हमारा देश आगे बढ़े,” यह बयान व्यापक संस्थागत मूल्यों को बचाने की दिशा में दिया गया था।

कैसे शुरू हुआ यह विवाद?

इस विवाद ने तब तूल पकड़ा जब एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो में प्रोफेसर सिंह “ओरियन” (Orion) नाम के इस रोबोटिक कुत्ते को प्रदर्शित करते हुए इसे यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (Centre of Excellence) का प्रोजेक्ट बता रही थीं।

सोशल मीडिया यूजर्स ने तुरंत इस दावे की पोल खोल दी और बताया कि यह रोबोट वास्तव में चीन की कंपनी ‘यूनिट्री रोबोटिक्स’ (Unitree Robotics) का एक व्यावसायिक उत्पाद है, जो बाजार में आसानी से उपलब्ध है और इसे इन-हाउस विकसित नहीं किया गया है।

भारत सरकार द्वारा समर्थित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ का मुख्य उद्देश्य भारत और ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) के बेहतरीन और अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कार्यों को दुनिया के सामने पेश करना है। ऐसे उच्च स्तरीय प्रदर्शनी में गलत जानकारी पेश करने पर टेक विशेषज्ञों और राजनीतिक हलकों में कड़ी आलोचना हुई, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि इस तरह की भ्रामक जानकारी को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

यूनिवर्सिटी की माफी और अगला कदम

बढ़ते विवाद के बीच गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने आधिकारिक तौर पर माफीनामा जारी किया। संस्थान ने इस गलती का ठीकरा एक “कम जानकारी वाले प्रतिनिधि” (ill-informed representative) पर फोड़ते हुए कहा कि संस्थान का इरादा किसी को धोखा देना नहीं था।

यूनिट्री मॉडल को प्रदर्शित करने के पीछे का कारण बताते हुए यूनिवर्सिटी की प्रवक्ता ने कहा कि इसका उद्देश्य केवल छात्रों को उन्नत रोबोटिक्स तकनीक से परिचित कराना था, न कि इसे अपनी मूल रिसर्च (original research) के तौर पर पेश करना।

फिलहाल, गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक विस्तृत और पारदर्शी आंतरिक जांच का वादा किया है। इस बीच, शिक्षा जगत से जुड़े लोग इस बात पर बहस कर रहे हैं कि इस घटना का भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र और वैश्विक स्तर पर AI के क्षेत्र में देश की विश्वसनीयता पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

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