सूरत में ब्रेन डेड व्यक्ति के अंगदान से दी 5 लोगों को मिलेगी जिंदगी

| Updated: April 19, 2022 4:36 pm

सूरत के पालनपुर जकातनाका निवासी शीतल धनसुख गांधी को ब्रेन हेमरेज के कारण अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया. जिसके बाद उनके परिवार ने डोनेट लाइफ के जरिए पांच लोगों को किडनी, लीवर और आंखें दान कर उन्हें जिंदा किया।

ब्लीडिंग के कारण ब्रेन हेमरेज हुआ

शहर के पालनपुर जकातनाका के पास पूजन रो हाउस की 49 वर्षीय शीतल धनसुख गांधी को दो-तीन दिनों से सिरदर्द और उल्टी की शिकायत थी. गुरुवार 14 अप्रैल की रात 9:00 बजे उसके परिवार वालों ने उसे डॉ. विजय मेहता मार्गदर्शन में यूनाइटेड ग्रीन अस्पताल में भर्ती कराया. सिर में दर्द के कारण का पता लगाने के लिए उन्होंने मस्तिष्क का एमआरआई कराया।जिसमे पता चला की दिमाग में रक्तनलिया फूल गयी हैं ,जिसे रक्त संचार नहीं हो रहा है , जिसके लिए कोइलिंग की गई थी। इस दौरान दिमाग की अन्य नसें भी सूज गईं, और फट गयी जिससे ब्रेन में ब्लीडिंग के कारण ब्रेन हेमरेज हो गया।

शनिवार 16 अप्रैल को एक निजी अस्पताल ने उन्हें ब्रांडेड घोषित कर दिया। शीतल के ब्रेन डेड के बारे में सूचित करने के लिए न्यूरोसर्जन डॉ. जेनेल गुरनानी ने डोनेट लाइफ के संस्थापक और अध्यक्ष नीलेश मंडलेवाला को फोन किया। शीतल की चचेरी बहन बंसी गांधी के साथ अस्पताल पहुंची डोनेट लाइफ की टीम शीतल की पत्नी कामिनीबहेन, बेटी वैदेही, बनवी किरण, रामिलाबाहेन के साथ-साथ प्रवीण ओलियावाला, भद्रेश सेठना, भतीजे प्रशांत और रत्नेश के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों ने अंगदान के महत्व को समझा और इसे पूर्ण करने की सहमति दी

…..तो हमें लगेगा कि पति इस दुनिया में जीवित है।

इस संबंध में शीतल की पत्नी कामिनीबहन ने कहा कि हम एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं. हमने अपने पति के इलाज के लिए भी भुगतान किया। मेरे पति एक मेडिकल स्टोर में सेल्समैन का काम करते थे। मैं घर पर एक सिलाई का काम करती हु , और हमारे परिवार का समर्थन करने में उनकी मदद करती हु मेरे पति का ब्रेन डेड हो गया है और उनकी मृत्यु निश्चित है। शरीर जलकर राख हो जाएगा, अगर मेरे पति के अंगदान के माध्यम सेअन्य रोगियों को पुनर्जीवित किया जाता है तो हमें लगेगा कि पति इस दुनिया में जीवित है। उनके चचेरे भाई बंसी गांधी ने भी मुझसे अंगदान के लिए कहा। इस प्रकार हृदय को कठोर करते हुए, बहुत भारी मन से अंगदान के लिए शीतल की पत्नी कामिनीबा को सहमति दी।

बेटी ने दी पहले परीक्षा ,फिर हुआ अंतिम संस्कार

उनकी बेटी वैदेही कॉलेज में SY,BCOM में पढ़ रही है। सीए की पढ़ाई भी कर रहे हैं। सोमवार को उसकी SYBCOM परीक्षा थी। यह परीक्षा देने के बाद बेटी वैदेही ने अपने पिता का भारी-मन से अंतिम संस्कार कर दिया। बुजुर्ग माता-पिता धनसुखभाई और उषाबहेन, शीतल की पत्नी कामिनीबहन और बेटी वैदेही को उनके फैसले के लिए बधाई।

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