नई दिल्ली: नई दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, ‘पीपुल अगेंस्ट रेप्स इन इंडिया’ (PARI) की संस्थापक योगिता भयाना और ‘अधिकार अभी, न्याय अभी’ (AANA) ने एक बेहद अहम मांग उठाई है। उन्होंने भारत में महिला सुरक्षा के गंभीर मुद्दों पर विशेष रूप से केंद्रित संसद का दो-दिवसीय विशेष सत्र बुलाने का कड़ा आह्वान किया है।
यह बड़ी मांग योगिता भयाना द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय और विभिन्न राज्यों के छात्रों के साथ किए गए एक विस्तृत विचार-विमर्श के बाद सामने आई है। इस चर्चा के दौरान युवा महिलाओं और छात्राओं ने शैक्षणिक संस्थानों, सार्वजनिक स्थानों, कार्यस्थलों, डिजिटल दुनिया और समाज में अपनी सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं, अनुभवों और महत्वपूर्ण सुझावों को साझा किया था।
इन सुझावों के साथ-साथ उन सिफारिशों को भी मंच पर रखा गया, जिन्हें PARI अपने सात वर्षों के सघन जमीनी अभियानों के जरिए उठाता रहा है। संस्था ने यह अनुभव सर्वाइवर्स, बच्चों, शिक्षण संस्थानों, कार्यस्थलों और समुदायों के साथ लगातार काम करते हुए जुटाया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए योगिता भयाना ने इस बात पर जोर दिया कि महिला सुरक्षा केवल तब चर्चा का विषय नहीं रहनी चाहिए, जब हिंसा की कोई व्यक्तिगत घटना सामने आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराध की रोकथाम, जवाबदेही तय करने और सिस्टम की खामियों को समग्र रूप से दूर करने के लिए एक समर्पित राष्ट्रीय संसदीय संवाद की तत्काल आवश्यकता है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर केवल प्रतिक्रिया देने के दृष्टिकोण को बदलकर रोकथाम की ओर बढ़ना है। यह अभियान अलग-थलग घटनाओं से आगे बढ़कर व्यवस्थागत सुधार और केवल जागरूकता से परे एक ठोस जवाबदेही तय करने की दिशा में एक गंभीर प्रयास है।
कार्यक्रम में प्रस्तुत किए गए मांग पत्र (Letter of Demand) में संबंधित अधिकारियों और संसद से यह आग्रह किया गया है कि वे उचित संवैधानिक और संसदीय प्रक्रियाओं के माध्यम से जल्द से जल्द महिला सुरक्षा पर दो-दिवसीय विशेष सत्र आयोजित करने पर विचार करें।
योगिता भयाना और AANA ने स्पष्ट किया कि उनकी यह मांग सिर्फ एक और सामान्य चर्चा के लिए नहीं है। वे एक ऐसा समयबद्ध राष्ट्रीय संवाद चाहते हैं जिसके परिणामस्वरूप ठोस सिफारिशें निकलें, जवाबदेही तंत्र स्थापित हो और जमीनी स्तर पर कार्रवाई हो सके।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए पूरे देश और नीति-निर्माताओं को एक बिल्कुल स्पष्ट संदेश दिया गया है: “दो दिन। एक राष्ट्रीय संवाद। महिला सुरक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई।”
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