जिस उम्र में ज्यादातर लोग आराम की जिंदगी चुनते हैं, उस उम्र में जिम अरिंगटन (Jim Arrington) नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। कैलिफोर्निया के रहने वाले यह 93 वर्षीय परदादा सिर्फ ‘एक्टिव’ ही नहीं हैं, बल्कि उनके नाम दुनिया के सबसे बुजुर्ग प्रतिस्पर्धी (competitive) बॉडीबिल्डर होने का आधिकारिक गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guinness World Record) दर्ज है।
भले ही जिम में उनकी मेहनत किसी मिसाल से कम नहीं है, लेकिन जिम का मानना है कि लंबी उम्र की असली जंग जिम में नहीं, बल्कि रसोई में जीती गई है। उन्होंने अपनी युवावस्था की पारंपरिक भारी डाइट को छोड़कर बढ़ती उम्र को मात देने का शानदार तरीका ढूंढ निकाला है।
बीफ और डेयरी से मशरूम तक का सफर
दशकों तक, जिम ने क्लासिक बॉडीबिल्डिंग नियमों का ही पालन किया: भारी वजन उठाना और डेयरी व मांस (meat) से भरपूर प्रोटीन लेना। हालांकि, जब वह 90 के दशक में पहुंचे, तो उन्हें एहसास हुआ कि उनका शरीर अब पहले की तरह तेजी से रिकवर नहीं हो पाता है।
यह समझते हुए कि सूजन (inflammation) बढ़ती उम्र के जोड़ों और मांसपेशियों की सबसे बड़ी दुश्मन है, उन्होंने अपनी डाइट में पूरी तरह से बदलाव कर दिया। उनकी इस नई डाइट का मुख्य फोकस हेल्दी फैट्स और सूजन-रोधी (anti-inflammatory) खाद्य पदार्थों पर था।
19 जुलाई, 2023 को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा यूट्यूब पर शेयर किए गए एक वीडियो में, जिम (जो उस समय 90 वर्ष के थे) ने बताया कि उन्होंने दूध और बीफ वाली अपनी ‘पुरानी शैली’ की डाइट को छोड़कर ऑलिव ऑयल और मशरूम से भरपूर डाइट अपना ली है:
“मैं पहले पुरानी शैली की डाइट लेता था, जिसमें बहुत सारा दूध और बीफ शामिल होता था। मुझे इन दोनों चीजों से कोई एलर्जी तो नहीं है, लेकिन ये शरीर में सूजन पैदा करते हैं। मैंने अपना खान-पान पूरी तरह बदल दिया है। अब मैं ऑलिव ऑयल, मशरूम और ऐसी ही अन्य चीजों का अधिक सेवन कर रहा हूं। मुझे लगा कि अगर मैं ऐसा करूंगा, तो अपनी ट्रेनिंग जारी रख सकूंगा और इस मुकाम को बनाए रख पाऊंगा।”
सिर्फ कड़ी मेहनत नहीं, स्मार्ट ट्रेनिंग
जिम का वर्कआउट रूटीन उनसे एक तिहाई उम्र के युवाओं के भी पसीने छुड़ा सकता है। उनके वर्कआउट के कुछ मुख्य तथ्य इस प्रकार हैं:
- ट्रेनिंग शेड्यूल: वह हफ्ते में 3 दिन जिम जाते हैं।
- सेशन की अवधि: उनका हर वर्कआउट सेशन 2 घंटे का होता है।
- ’10-10-10′ फॉर्मूला: उनका राज सिर्फ भारी वजन उठाना नहीं, बल्कि ‘मैकेनिकल टेंशन’ पर फोकस करना है, क्योंकि वह ‘नो पेन, नो गेन’ (बिना दर्द के कुछ हासिल नहीं होता) में गहरा विश्वास रखते हैं। इसके लिए वह एक बेहद कठिन ’10-10-10′ तरीके का इस्तेमाल करते हैं:
- पहले 10 रैप्स (repetitions) करें।
- फिर 10 सेकंड के लिए वजन को होल्ड करके मांसपेशियों को सिकोड़ें (isometric squeeze)।
- और आखिर में ‘बर्न’ महसूस करने के लिए 10 और रैप्स करें।
बदलाव को अपनाने की सोच
जिम के इस सफर की शायद सबसे बड़ी सीख उनकी मानसिक दृढ़ता और बदलाव को स्वीकारने की क्षमता है। उनका जन्म एक ‘बीमार’ और कमजोर बच्चे के रूप में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपनी शुरुआत—या अपनी उम्र—को कभी अपनी मंजिल तय नहीं करने दी।
वह कहते हैं: “बॉडीबिल्डिंग का पूरा खेल खुद को ढालने (adaptation) का है। जो तरीका जीवन के एक पड़ाव पर आपके लिए काम करता है, जरूरी नहीं कि वह बाद में भी उतना ही कारगर हो।”
अपने शरीर की जरूरतों को सुनकर और एक ही जगह पर रुकने से इनकार करके, जिम हर एक रैप के साथ इंसानी उम्र की सीमाओं को नया रूप दे रहे हैं।
पाठकों के लिए नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है और इसे किसी पेशेवर चिकित्सा सलाह के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। किसी भी चिकित्सीय स्थिति या डाइट में बड़े बदलाव के संबंध में हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।
यह भी पढ़ें-
AI के ‘फर्जी’ फैसलों पर गुजरात हाईकोर्ट सख्त: कहा- बिना पढ़े जजमेंट देना एक ‘चिंताजनक ट्रेंड’











