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सीजे रॉय, कॉन्फिडेंट ग्रुप और 30 जनवरी की वो घटना: एक साम्राज्य, एक छापा और फिर दुखद अंत

| Updated: January 31, 2026 12:16

IT छापे के बीच गूंजी गोली की आवाज: Confident Group के चेयरमैन CJ Roy की मौत से रियल एस्टेट जगत स्तब्ध

बेंगलुरु: 30 जनवरी 2026 की दोपहर, भारतीय रियल एस्टेट जगत के लिए एक ऐसी खबर लेकर आई, जिस पर यकीन करना मुश्किल था। बेंगलुरु स्थित दिग्गज कंपनी ‘कॉन्फिडेंट ग्रुप’ (Confident Group) के संस्थापक और चेयरमैन, 57 वर्षीय डॉ. चिरियांकंदाथ जोसेफ रॉय (CJ Roy) ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। यह दुखद घटना उस वक्त हुई जब आयकर विभाग (Income Tax Department) की टीम उनके रिचमंड रोड स्थित कार्यालय में तलाशी अभियान चला रही थी।

खबरों के मुताबिक, यह घटना दोपहर लगभग 3.15 बजे घटी। यह पूरा मामला जितना चौंकाने वाला था, उतना ही सार्वजनिक भी—एक हाई-प्रोफाइल उद्यमी, जिनसे जांच के दौरान पूछताछ की जा रही थी, उन्होंने दस्तावेज लाने के लिए अपने निजी कमरे में जाने की इजाजत मांगी। इसके बाद गोली चलने की आवाज आई, उन्हें बचाने की अफरा-तफरी मची, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

इस त्रासदी ने अपने पीछे न केवल गहरा शोक छोड़ा है, बल्कि प्रवर्तन एजेंसियों के तरीकों, लंबी जांच-पड़ताल के तनाव और हाई-प्रोफाइल व्यवसायों के साथ आने वाले मानसिक दबाव को लेकर कई अनुत्तरित सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

ब्रांड के पीछे का इंसान: सीजे रॉय का सफर

रॉय की निजी कहानी उदारीकरण के बाद की भारतीय सफलता की मिसाल थी। कोच्चि में जन्मे और बेंगलुरु में पले-बढ़े रॉय ने सेंट जोसेफ इंडियन हाई स्कूल से पढ़ाई की थी।

अपने करियर की शुरुआत उन्होंने बीपीएल (BPL), टीवीएस इलेक्ट्रॉनिक्स और बाद में हेवलेट-पैकार्ड (HP) जैसी नामी कंपनियों के साथ की, जहाँ उन्होंने प्रिंटर और टेस्ट इक्विपमेंट डिवीजनों में योजना बनाने की भूमिका निभाई। 1997 में, जब वे तरक्की की राह पर थे, उन्होंने कॉर्पोरेट जगत की स्थिरता छोड़कर अनिश्चितता भरा रास्ता चुना और इस्तीफा दे दिया।

एमबीए पूरा करने के बाद, उन्होंने रियल एस्टेट में कदम रखा। 2001 में, जब डॉट-कॉम क्रैश (Dot-com crash) के कारण बाजार में सावधानी का माहौल था, उन्होंने सरजापुर में जमीन खरीदी। उस समय यह इलाका बेंगलुरु के मुख्य शहर से काफी दूर माना जाता था, लेकिन समय के साथ इसकी कीमतों में हुई जबरदस्त बढ़ोतरी ने ‘कॉन्फिडेंट ग्रुप’ की नींव रखने में मदद की।

रॉय ने अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान भी बनाई। उन्होंने ज्यूरिख के SBS बिजनेस स्कूल से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की और फ्रांस में भी अध्ययन किया। 2017 में उन्हें एक बड़ी राजनयिक उपलब्धि मिली, जब उन्हें कर्नाटक और केरल के अधिकार क्षेत्र के साथ स्लोवाक गणराज्य (Slovak Republic) का मानद वाणिज्य दूत (Honorary Consul) नियुक्त किया गया।

दौलत, शौक और एक भावुक पहलू

सीजे रॉय की सार्वजनिक छवि में महत्वाकांक्षा और शान-ओ-शौकत का मिश्रण था। इसका सबसे बड़ा सबूत उनका कारों का कलेक्शन था, जिसे अक्सर भारत के सबसे कीमती निजी गैरेज में गिना जाता था। उनके पास कई रोल्स-रॉयस (Rolls-Royce) और सुपरकार्स थीं, जिन्हें भारत और दुबई में रखा गया था।

लेकिन इन सबके बीच, एक छोटी सी याद ने लोगों का दिल जीत लिया था। रॉय ने अपनी पहली कार—1994 में खरीदी गई एक लाल मारुति 800—को ढूंढ निकाला और उसे वापस खरीदा। कहा जाता है कि उन्होंने इसे कबाड़ की हालत से वापस लाने के लिए इसकी मूल कीमत से कई गुना अधिक भुगतान किया।

यह दर्शाता था कि सफलता के शिखर पर पहुंचने के बावजूद, वे अपनी शुरुआती जिंदगी से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए थे।

परोपकार: एक समानांतर पहचान

रॉय की पहचान सिर्फ उनकी संपत्ति तक सीमित नहीं थी। वे परोपकार, विशेषकर केरल और कर्नाटक में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने ऐसे लोगों के इलाज का खर्च उठाया जो इसे वहन नहीं कर सकते थे और कई छात्रवृत्तियां प्रदान कीं।

2018 की केरल बाढ़ के बाद पुनर्वास के लिए उनकी मदद और एक मशहूर भारतीय एथलीट को घर उपहार में देने जैसे कार्यों ने उन्हें दक्षिण भारत में एक अलग सम्मान दिलाया था।

कॉन्फिडेंट ग्रुप: विस्तार और जीरो-डेट (Zero-Debt) का दावा

कॉन्फिडेंट ग्रुप की शुरुआत लगभग 2005-2006 में हुई थी। रॉय ने कंपनी का नाम ऐसा रखा जो विश्वसनीयता को दर्शाए। उनके साथ टी.ए. जोसेफ (T.A. Joseph) सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक के रूप में जुड़े, जिन्होंने व्यवसाय को बड़ा करने में अहम भूमिका निभाई।

दो दशकों में, ग्रुप ने बेंगलुरु, केरल, दुबई और अमेरिका तक अपनी पहुंच बनाई। कंपनी ने 150 से अधिक परियोजनाएं पूरी कीं और करोड़ों वर्ग फुट का विकास किया। उनका एक महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट कोलार के पास स्थित ‘ज़ायन हिल गोल्फ काउंटी’ (Zion Hill Golf County) था।

कॉन्फिडेंट ग्रुप की सबसे बड़ी खासियत उनका “शून्य-ऋण” (Zero-debt) मॉडल था। रॉय का मानना था कि कर्ज मुक्त होना ही असली मजबूती है। 31 मार्च 2025 तक, कंपनी की संपत्ति लगभग 2,039 करोड़ रुपये बताई गई थी, हालांकि एक निजी कंपनी होने के कारण पूर्ण वित्तीय तस्वीर हमेशा सीमित रही।

केरल में, कंपनी ने RERA अनुपालन में अग्रणी होने का दावा किया और ग्राहकों का भरोसा जीतने के लिए समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने पर जोर दिया।

मनोरंजन और विविधीकरण

रॉय ने केवल निर्माण क्षेत्र तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने हॉस्पिटालिटी और एविएशन में भी हाथ आजमाया। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उनके मनोरंजन जगत में प्रवेश की हुई। उन्होंने 2012 में बड़े बजट की मलयालम फिल्म ‘कैसानोवा’ (Casanovva) का निर्माण किया।

इसके अलावा, कॉन्फिडेंट ग्रुप ने टीवी रियलिटी शोज की स्पॉन्सरशिप के जरिए घर-घर में अपनी पहचान बनाई, जो उनकी मार्केटिंग रणनीति का एक अहम हिस्सा था।

अंतिम घंटे: उस दिन क्या हुआ?

30 जनवरी 2026 की घटनाओं के बारे में जो जानकारी सार्वजनिक है, उसके अनुसार आयकर विभाग की तलाशी सुबह शुरू हुई थी। रॉय दोपहर के आसपास पहुंचे और उनसे लगभग एक घंटे तक पूछताछ की गई। जांचकर्ताओं ने कुछ विशिष्ट दस्तावेज मांगे। रॉय ने उन दस्तावेजों को लाने के लिए अपने निजी चैंबर में जाने की अनुमति मांगी, जो उन्हें दे दी गई।

कमरे में अकेले जाने के कुछ ही देर बाद, वहां मौजूद लोगों ने गोली चलने की आवाज सुनी। उन्होंने अपनी लाइसेंसी पिस्तौल का इस्तेमाल किया था। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने अशोक नगर थाने में मामला दर्ज कर लिया है और फॉरेंसिक जांच जारी है।

परिवार के सदस्यों ने बाद में आरोप लगाया कि रॉय पिछले कुछ दिनों से भारी दबाव में थे। खबरों के मुताबिक, यह जांच आय से अधिक संपत्ति के मामले से जुड़ी थी।

आगे की राह और अनुत्तरित सवाल

सीजे रॉय की मौत ने कॉरपोरेट जगत और जांच एजेंसियों के सामने एक गंभीर बहस छेड़ दी है। भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र हमेशा से ही जांच के दायरे में रहा है, लेकिन जब प्रवर्तन की कार्रवाई और मानसिक तनाव एक साथ मिलते हैं, तो परिणाम भयावह हो सकते हैं।

कॉन्फिडेंट ग्रुप के लिए, रॉय का जाना नेतृत्व की एक बड़ी परीक्षा है। ग्राहकों के लिए प्रोजेक्ट्स का पूरा होना और कंपनी का भविष्य अब सवालों के घेरे में है। वहीं, कर प्रशासन के लिए यह घटना इस बात पर विचार करने का मौका है कि पूछताछ के दौरान मनोवैज्ञानिक दबाव को कैसे संभाला जाए।

सीजे रॉय का जाना एक सफल उद्यमी का दुखद अंत है। अब जांच जारी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल हम सबके लिए है: क्या यह मौत सिर्फ एक खबर बनकर रह जाएगी, या यह उन सुधारों की शुरुआत करेगी जो भविष्य में किसी और की जिंदगी को इस तरह खत्म होने से बचा सकें?

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