गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार को गुजरात लोक सेवा आयोग (जीपीएससी) की परीक्षा में मात्र एक अंक से चयन प्रक्रिया के अगले चरण से बाहर हुई एक उम्मीदवार को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ से जुड़े एक विवादित प्रश्न के मामले में आयोग को सख्त निर्देश दिया है कि वह इस परीक्षार्थी को उसका जायज अंक प्रदान करे।
न्यायालय ने अपने फैसले में माना कि उम्मीदवार आरती रंगपरिया द्वारा दिया गया उत्तर पूरी तरह से सही था, क्योंकि इसे एनसीईआरटी (NCERT) और जीसीईआरटी (GCERT) की आधिकारिक पाठ्यपुस्तकों का समर्थन प्राप्त था। वहीं, दूसरी तरफ अदालत ने इस प्रश्न को तैयार करने के लिए जीपीएससी द्वारा इस्तेमाल किए गए स्रोत को पूरी तरह से “अप्रमाणित” करार दिया।
यह पूरा विवाद पिछले साल आयोजित हुई जीपीएससी परीक्षा के प्रश्न संख्या 147 से जुड़ा हुआ था। इस सवाल में उम्मीदवारों को कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ के संबंध में दो कथनों की सत्यता जांचने के लिए कहा गया था। पहला कथन यह था कि यह पुस्तक संस्कृत में लिखी गई है और दूसरा यह कि यह अर्थशास्त्र पर आधारित किताब है। परीक्षार्थी आरती रंगपरिया ने अपने जवाब में इन दोनों ही कथनों को सही बताया था।
हालांकि, जीपीएससी लगातार अपनी इस दलील पर अड़ा रहा कि केवल पहला कथन ही सही है। आयोग का तर्क था कि ‘अर्थशास्त्र’ केवल आर्थिक विषयों से ही नहीं, बल्कि राजनीति और प्रशासन से भी संबंधित है। आयोग के इस रवैये के कारण उम्मीदवार का एक अंक काट लिया गया, जिससे वह क्वालीफाइंग कट-ऑफ पार करने से महज एक अंक पीछे रह गई।
सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रश्न के लिए इस्तेमाल की गई स्रोत सामग्री को लेकर जीपीएससी से बार-बार तीखे सवाल किए। यह सामने आया कि आयोग ने एक राजनीतिक दल की वेबसाइट पर मौजूद ‘अर्थशास्त्र’ के 1915 के अनुवादित संस्करण की एक पीडीएफ फाइल पर भरोसा किया था। यह दस्तावेज उम्मीदवारों के लिए कहीं से भी उपलब्ध नहीं था और स्पष्ट निर्देश के बावजूद आयोग अदालत में इसका मूल संस्करण पेश करने में पूरी तरह विफल रहा।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील मेघा जानी और मित ठक्कर ने अदालत में मजबूती से अपना पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि उम्मीदवार का जवाब गुजरात शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा निर्धारित पाठ्यपुस्तकों पर आधारित है, जो कि पूरी तरह से प्रामाणिक हैं।
याचिका को स्वीकार करते हुए जस्टिस निर्झर देसाई ने स्पष्ट किया कि प्रतिवादियों को उम्मीदवार द्वारा दिए गए उत्तर को सही मानना ही होगा। उन्होंने कहा कि जिस सामग्री के आधार पर यह सवाल पूछा गया था, उसकी प्रामाणिकता ही संदिग्ध थी। अदालत ने कहा कि जीसीईआरटी और एनसीईआरटी की किताबों में भी स्पष्ट रूप से यह बताया गया है कि कौटिल्य का अर्थशास्त्र आर्थिक विषयों से भी जुड़ा है, इसलिए उम्मीदवार का जवाब बिल्कुल सही है।
अदालत ने जीपीएससी को निर्देश दिया कि वह विवादित अंक में कोई कटौती न करे और जवाब को सही मानते हुए उम्मीदवार के स्कोर की दोबारा गणना करे। इसके साथ ही, संशोधित स्कोर के आधार पर सभी परिणामी लाभ देने का भी आदेश दिया गया है।
हाईकोर्ट ने अपने इस आदेश पर चार सप्ताह की रोक लगाने के राज्य सरकार के अनुरोध को भी सिरे से खारिज कर दिया। कार्यवाही के दौरान सरकार ने अदालत को यह भी जानकारी दी कि इस भर्ती प्रक्रिया में फिलहाल एक सीट खाली रखी गई है।
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