अलवर के महाराजा के लिए खास तौर पर बनाई गई करीब एक सदी पुरानी कार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। अहमदाबाद की एक 99 साल पुरानी विंटेज कार ‘हिस्पानो-सुइजा’ ने फ्रांस में आयोजित एक प्रतिष्ठित विंटेज-कार कार्यक्रम में सर्वोच्च सम्मान अपने नाम किया है।
यह ऐतिहासिक 1927 एक्सटेंडेड-व्हीलबेस H6C कार अहमदाबाद के दास्तान ऑटोवर्ल्ड म्यूजियम में मौजूद प्राणलाल भोगीलाल के मशहूर कलेक्शन का हिस्सा है। इस शानदार शाही सवारी को फ्रांस के मुल्हाउस में ‘म्यूसी नेशनल डी एल’ऑटोमोबाइल – कलेक्शन शलम्पफ’ में आयोजित पहले ‘कॉन्कोर्स डी’एलिगेंस इंटरनेशनल’ में ‘बेस्ट ऑफ शो’ के खिताब से नवाजा गया है।
फ्रांस के मुल्हाउस में 27 से 28 जून तक इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस इवेंट के लिए अहमदाबाद के इस विशेष कलेक्शन से दो खास कारों को आमंत्रित किया गया था। अब यह हिस्पानो-सुइजा और दूसरी 1936 मर्सिडीज-बेंज 540K कार फ्रांस के इस राष्ट्रीय ऑटोमोबाइल म्यूजियम में दो महीने की एक प्रदर्शनी के लिए यहीं रहेंगी।
हिस्पानो-सुइजा को मूल रूप से अलवर के महाराजा जय सिंह प्रभाकर ने बनवाया था। बाद में यह विंटेज कार ऐतिहासिक यूरोपीय और अमेरिकी ऑटोमोबाइल के अहमदाबाद स्थित कलेक्शन की शान बन गई।
दास्तान ऑटोवर्ल्ड म्यूजियम की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, ये दोनों गाड़ियां एशिया की पहली ऐसी ऐतिहासिक कारें बन गई हैं जिन्हें फ्रांस के इस म्यूजियम में प्रदर्शित किया जा रहा है। यह उपलब्धि भारत की गौरवशाली मोटरिंग विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली एक बड़ी पहचान मानी जा रही है।
इन दोनों कारों का चयन उनके शाही इतिहास, दुर्लभता और उनके रेस्टोरेशन (मरम्मत) की अद्भुत कहानियों के आधार पर किया गया था। अलवर के महाराजा के लिए बनाई गई केवल दो एक्सटेंडेड-व्हीलबेस H6C कारों में से एक, इस हिस्पानो-सुइजा को महज 100 दिनों के भीतर नया रूप दिया गया था। प्राणलाल भोगीलाल कलेक्शन के कस्टोडियन ब्रिजेश चिनाई ने फ्रेंच हिस्पानो-सुइजा क्लब के अध्यक्ष से इस कार को वापस फ्रांस लाने का जो वादा किया था, यह उसी का नतीजा था।
वहीं दूसरी ओर, मर्सिडीज-बेंज 540K को कुछ मैकेनिकल काम के लिए पहले ही यूरोप भेजा गया था। पेरिस में ‘फीवा’ (FIVA) के रेट्रोमोबाइल स्टैंड पर इसे एक विशेष डिस्प्ले के तौर पर पेश किया गया था, जहां इस ऐतिहासिक कार ने अपना प्रतिष्ठित ‘फीवा आईडी कार्ड’ भी हासिल किया।
इस गौरवशाली यात्रा के दौरान अहमदाबाद म्यूजियम के प्रतिनिधियों ने फ्रांसीसी म्यूजियम के बोर्ड अध्यक्ष ब्रूनो फुच्स से खास मुलाकात की। आपको बता दें कि ब्रूनो फुच्स फ्रांस की नेशनल असेंबली की विदेशी मामलों की समिति के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी संभालते हैं।
इस अहम मुलाकात में दोनों पक्षों के बीच भारत और फ्रांस के ऑटोमोटिव व औद्योगिक संबंधों पर चर्चा हुई। इसके तहत ऐतिहासिक वाहनों के आदान-प्रदान और संयुक्त प्रदर्शनियों जैसी पहलों के माध्यम से आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। हालांकि, अभी तक किसी औपचारिक समझौते या इन प्रस्तावित कार्यक्रमों के निश्चित समय की घोषणा नहीं की गई है।
इस साझेदारी को लेकर ब्रिजेश चिनाई ने कहा कि यह उभरता हुआ गठजोड़ भारत की समृद्ध मोटरिंग विरासत को मिल रही वैश्विक मान्यता को दर्शाता है। यह ऐतिहासिक कारों के संरक्षण और अध्ययन के जरिए दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है।
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