अयोध्या। राम जन्मभूमि परिसर में रामलला के 27 वर्षों के लंबे संघर्ष और टेंट से लेकर भव्य गर्भगृह तक की ऐतिहासिक यात्रा को संजोने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक विशेष ‘स्मृति मंदिर’ का निर्माण पूरा कर लिया है। यह अनूठा स्मारक उसी स्थान पर स्थापित किया गया है, जहां मुख्य मंदिर निर्माण के दौरान रामलला की मूर्ति को अस्थाई मंदिर में विराजित किया गया था।
उल्लेखनीय है कि 25 मार्च 2020 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्य मंदिर का निर्माण कार्य शुरू होने से पहले रामलला के विग्रह को इसी अस्थाई मंदिर में स्थानांतरित किया था। अब यह पूरा परिसर राम मंदिर आंदोलन के त्याग और इतिहास की जीवंत गवाही के रूप में जनसामान्य के लिए खुलने को तैयार है।
मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के अनुसार, अस्थाई मंदिर स्थल और उसके पास बने स्मारक का निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न हो चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक दौर और त्याग को संजोने के प्रतीक स्वरूप इसे शीघ्र ही श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिया जाएगा।
इस स्मृति मंदिर की वास्तुकला बेहद खास है। इसे नक्काशीदार सागौन की लकड़ी से तराशा गया है, जबकि इसके बाहरी स्वरूप को मुख्य मंदिर की तरह ही लाल बलुआ पत्थर के मेल से ढाला गया है।
मंदिर के ठीक मध्य में एक विशेष इलेक्ट्रिक ‘अखंड ज्योति’ स्थापित की गई है, जो राम जन्मभूमि संघर्ष की अटूट स्मृति का प्रतीक है। नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि चूंकि यह पूरा ढांचा लकड़ी का बना है, इसलिए किसी भी संभावित दुर्घटना या आग के खतरे को टालने के लिए बिना तपिश वाली इलेक्ट्रिक लौ का चयन किया गया है।
श्रद्धालुओं को इस मंदिर में वह ऐतिहासिक टेंट भी मोड़ने योग्य (फोल्डेबल) स्वरूप में देखने को मिलेगा, जिसमें वर्षों तक रामलला विराजमान रहे थे। इसके अलावा, यहां भगवान हनुमान की वह प्राचीन प्रतिमा भी स्थापित रहेगी, जिसे रामलला के साथ टेंट में ही रखा गया था। भव्य मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद रामलला तो अपने मुख्य गर्भगृह में विराजमान हो चुके हैं, लेकिन हनुमान जी की यह प्रतिमा इसी स्मृति मंदिर में ही रहेगी।
स्मृति मंदिर के पास ही दशकों लंबे राम मंदिर आंदोलन में अपने प्राण न्योछावर करने वाले हुतात्माओं की स्मृति में एक भव्य ‘स्मृति स्तंभ’ भी तैयार किया गया है। इस स्तंभ के शीर्ष पर सूर्य की आकृति बनाई गई है, जिस पर भगवान श्री राम का चित्रांकन और ट्रस्ट का ध्येय वाक्य ‘रामो विग्रहवान् धर्मः’ (श्रीराम धर्म के साक्षात स्वरूप हैं) अंकित है।
तीर्थयात्री सुविधा केंद्र के पास सप्तऋषि मंदिर के समीप स्थित इस स्मृति मंदिर को आम जनता के लिए खोलने की अंतिम तिथि का निर्णय ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) करेंगे। फिलहाल ट्रस्ट मुख्य मंदिर में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है, जिसके बाद इसे औपचारिक रूप से दर्शनार्थियों के लिए खोल दिया जाएगा।
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