अहमदाबाद: साहित्य केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला एक मशाल है। इसी भावना को चरितार्थ करते हुए, गुजरात यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ बॉटनी (बायोइन्फॉर्मेटिक्स) में ‘સ્ત્રીઆર્થ’ (Striaarth) के 7वें वॉल्यूम का विमोचन समारोह एक भव्य और साहित्यिक वातावरण में संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक पुस्तक विमोचन तक सीमित नहीं था, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण और उनकी रचनात्मकता का एक उत्सव बन गया।
एक दशक, 338 कहानियां और एक सशक्त मंच
‘સ્ત્રીઆર્થ’ अब केवल एक पुस्तक शृंखला नहीं रही, बल्कि यह महिलाओं की आवाज को बुलंद करने वाला एक शक्तिशाली साहित्यिक आंदोलन बन चुका है। ‘Striaarth’ शब्द और इसकी परिकल्पना का श्रेय इसकी सूत्रधार प्रतिभा ठक्कर को जाता है। उन्होंने पिछले 10 वर्षों में दुनिया भर की गुजराती महिला लेखिकाओं को एक मंच पर लाने का भागीरथ प्रयास किया है।

इस सफर की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वॉल्यूम 1 से 7 तक कुल 338 कहानियां प्रकाशित हो चुकी हैं। हाल ही में लॉन्च हुए वॉल्यूम-7 में 54 प्रभावशाली कहानियों को शामिल किया गया है। ये कहानियां महज किस्से नहीं हैं; ये लघु, विचारोत्तेजक और प्रगतिशील हैं, जो लैंगिक समानता (Gender Equality) की पुरजोर वकालत करती हैं।
विविधता ही है ‘Striaarth’ की पहचान
इस संग्रह की सबसे बड़ी खूबी इसकी विषयगत और शैलीगत विविधता है। इसमें सामाजिक ताने-बाने, मनोवैज्ञानिक विश्लेषण, हास्य, विज्ञान कथा (Sci-fi), थ्रिलर और चौंका देने वाले मोड़ (Twists) वाली कहानियां शामिल हैं। हर कहानी अपने आप में एक संकल्प और गहरा संदेश लिए हुए है।

साहित्य जगत के दिग्गजों की उपस्थिति
इस साहित्यिक शाम की गरिमा बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध कथाकार राघवजी माधड़, प्रगतिशील कवयित्री सरूप ध्रुव और वरिष्ठ पत्रकार व कलाकार मुकुंद पंड्या विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन आरजे मेघा ने अपनी सधी हुई शैली में किया। पुस्तक का अनावरण ‘Striaarth’ की सूत्रधार प्रतिभा ठक्कर और भाग-7 की सभी लेखिकाओं की उपस्थिति में किया गया।
कला और संस्कृति का अनूठा संगम
समारोह स्थल की सजावट भी कलात्मकता का परिचय दे रही थी। ऊंझा की स्वीटी शाह और ‘Striaarth’ कोर टीम की सदस्य नंदिनी शाह मेहता द्वारा बनाई गई फूलों की रंगोली आकर्षण का केंद्र रही। वहीं, वंदना मंगीदकर और उनकी टीम ने ‘Striaarth’ की थीम पर आधारित अपनी कलाकृतियां प्रस्तुत कीं।
कार्यक्रम की शुरुआत भरूच की लेखिका डॉ. रुष्वी टेलर के आत्मीय स्वागत भाषण से हुई। परम्परा को आगे बढ़ाते हुए, सेजल बारोट और उनकी टीम ने समूह स्वर में ‘Striaarth’ का नया थीम सॉन्ग प्रस्तुत किया: “एक सीधी सादी नगरी ज्यां जग्या अति मोकली, जावुं पेले पार ज्यां Striaarth नामे नगरी…” इस गीत ने दर्शकों में नई ऊर्जा का संचार कर दिया।

मंच पर जीवंत हुईं संवेदनाएं
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने शाम को और रंगीन बना दिया। तार्शवी अयाना त्रिवेदी ने नारीवादी गीतों के मेडले पर एक दमदार कथक प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों की खूब तालियां मिलीं।
साहित्यिक सत्र में प्रख्यात लेखक राज गोस्वामी द्वारा ‘Striaarth’ को समर्पित एक विशेष कविता का पाठ अमी ठक्कर ने किया। वडोदरा की लेखिका कल्पना शशिकांत और पोरबंदर की रिद्धि ओडेद्रा ने अपनी कहानियों का पाठ कर माहौल को संजीदा बना दिया।
वहीं, मनोवैज्ञानिक और स्तंभकार डॉ. मेघा जोशी द्वारा प्रस्तुत शक्तिशाली एकपात्र अभिनय (Monologue) ने दर्शकों को इतना प्रभावित किया कि उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन (खड़े होकर सम्मान) दिया गया।
लेखिकाओं का महाकुंभ
कार्यक्रम के अंत में, एडवोकेट प्रतिभा ठक्कर ने ‘Striaarth’ की अब तक की यात्रा को बड़े ही जोश के साथ साझा किया। अतिथि सरूप ध्रुव ने लेखिकाओं के साथ एक इंटरैक्टिव सत्र में संवाद किया। अंत में जागू पटेल ने आभार प्रदर्शन (Vote of thanks) कर कार्यक्रम का समापन किया।
‘Striaarth’ का मूल मंत्र स्पष्ट है—महिलाओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता, उन्हें सुना जाना चाहिए। उनकी यह दहाड़ गूंजने की हकदार है। वॉल्यूम-7 की 54 कहानियां इसी मजबूत नजरिए का प्रमाण हैं। यह पुस्तक गुजराती पाठकों और साहित्य प्रेमियों के लिए एक विचारशील और सार्थक उपहार है।
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