गुजरात उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक बेहद मानवीय और अनोखा आदेश पारित किया। अदालत ने सूरत शहर की पुलिस को निर्देश दिया है कि वह लाजपोर सेंट्रल जेल में बंद एक व्यक्ति को उसके पालतू कुत्ते के अंतिम संस्कार के लिए ले जाए। यह व्यक्ति अपनी पत्नी द्वारा दर्ज कराए गए धोखाधड़ी के मामले में न्यायिक हिरासत में है।
हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यू टी देसाई की पीठ इस सूरत निवासी की एक अर्जी पर सुनवाई कर रही थी। इस व्यक्ति पर उसकी अलग रह रही पत्नी ने एक निवेश पॉलिसी से 17 लाख रुपये की हेराफेरी करने का आरोप लगाया है। इसी मामले में आरोपी ने अस्थायी जमानत की गुहार लगाई थी।
चार्जशीट दायर होने से पहले ही इस व्यक्ति ने निचली अदालत में जमानत याचिका दाखिल की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उसने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शुक्रवार को जब हाई कोर्ट में उसकी अर्जी पर पहली सुनवाई हो रही थी, उसी दिन उसके पालतू जर्मन शेफर्ड कुत्ते की मौत हो गई।
आरोपी की ओर से पेश हुईं वकील क्रुति शाह ने अदालत से भावुक अपील की। उन्होंने हाई कोर्ट से अनुरोध किया कि उनके मुवक्किल को उसके पालतू कुत्ते की अंतिम विदाई में शामिल होने का अवसर दिया जाए। वकील की मौखिक दलीलों पर विचार करते हुए अदालत ने एक आदेश जारी किया।
इस आदेश में पुलिस कर्मियों को निर्देश दिया गया कि वे आवेदक को शुक्रवार को रात 8 बजे तक सूरत स्थित उसके घर ले जाएं। हाई कोर्ट ने अपने मौखिक आदेश में कहा कि आवेदक के पास पिछले 14 सालों से यह कुत्ता था। पालतू जानवर के साथ उसके गहरे लगाव को देखते हुए, उसे अंतिम संस्कार करने की अनुमति दी जाती है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि आवेदक को इस आदेश के मिलते ही पुलिस हिरासत में 13 मार्च 2026 की रात 8 बजे तक सूरत ले जाया जाए। साथ ही, यह भी निर्देश दिया गया कि पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में होंगे और इस दौरान पुलिस हिरासत का पूरा खर्च सरकार द्वारा उठाया जाएगा।
हाई कोर्ट ने इस आदेश की प्रति तुरंत संबंधित अदालत, पुलिस स्टेशन और सूरत की लाजपोर सेंट्रल जेल को ईमेल के जरिए भेजने का निर्देश दिया। इसके साथ ही यह भी साफ कर दिया गया कि रात 8 बजे के बाद आवेदक को वापस संबंधित जेल अधिकारियों की हिरासत में सौंप दिया जाना चाहिए।
धोखाधड़ी के इस मामले की जड़ें साल 2000 में हुई आरोपी की शादी से जुड़ी हैं। पत्नी का आरोप है कि पति ने फर्जी हस्ताक्षर करके और पॉलिसी के दस्तावेजों में छेड़छाड़ करके खुद को नॉमिनी बना लिया, जबकि असल नॉमिनी पत्नी के पिता थे।
साल 2025 में जब यह पॉलिसी मैच्योर हुई, तो आरोपी ने कथित तौर पर 17 लाख रुपये की रकम अपनी पत्नी के साथ वाले एक जॉइंट अकाउंट में ट्रांसफर कर दी। इसके बाद उसने यह पैसा अपनी बेटी के साथ साझा किए गए एक अन्य जॉइंट अकाउंट में भेज दिया। शुक्रवार को आवेदक के वकील ने अदालत को यह पूरी जानकारी दी।
सुनवाई के दौरान आवेदक ने अदालत के सामने यह भी प्रस्ताव रखा कि वह अपनी पत्नी को 17 लाख रुपये वापस करने के लिए तैयार है। वकील शाह ने तर्क दिया कि यह पूरा मामला मूल रूप से एक वैवाहिक विवाद का नतीजा है।
बचाव पक्ष के अनुसार, यह रकम बेटी के खाते में इसलिए भेजी गई थी क्योंकि वह विदेश में पढ़ाई कर रही है। हालांकि, अदालत ने आवेदक को अस्थायी जमानत देने से तो इनकार कर दिया, लेकिन जस्टिस देसाई ने मानवीय आधार पर उसे पुलिस हिरासत में अपने कुत्ते के अंतिम संस्कार में शामिल होने की सुविधा प्रदान की।
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