मुंबई: सत्र अदालत ने बुधवार को आईआईटी-बॉम्बे के छात्र अरमान खत्री के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। यह मामला साल 2023 में उनके सहपाठी दर्शन सोलंकी की मौत से जुड़ा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जी. जी. भंसाली ने आरोपी खत्री पर आत्महत्या के लिए उकसाने और आपराधिक धमकी देने के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत भी आरोप तय किए।
आरोप तय होने के बाद खत्री ने खुद को निर्दोष बताया है और अब उन्हें इस मामले में मुकदमे का सामना करना पड़ेगा। दर्शन सोलंकी बी.टेक (केमिकल) के प्रथम वर्ष के छात्र थे। कथित तौर पर 12 फरवरी 2023 को अपनी सेमेस्टर परीक्षा समाप्त होने के ठीक एक दिन बाद उन्होंने हॉस्टल की एक मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी थी।
इस दुखद घटना के तीन सप्ताह बाद, मुंबई पुलिस के एक विशेष जांच दल (SIT) को सोलंकी के कमरे से एक लाइन का नोट मिला था। इस नोट में कथित तौर पर मौत के लिए खत्री को जिम्मेदार ठहराया गया था।
इसी आधार पर पुलिस ने 9 अप्रैल को खत्री को भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने और आपराधिक धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। उन पर एट्रोसिटी एक्ट भी लगाया गया था और चार्जशीट में भी इन्हीं आरोपों को शामिल किया गया है।
बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में सहमति जताते हुए कहा कि आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। इसके बाद अदालत ने आरोपी को आरोपों की पूरी जानकारी दी, जिस पर खत्री ने ‘दोषी नहीं’ होने की दलील दी। अदालत ने उनका यह बयान दर्ज कर लिया है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 तय की गई है। यह सुनवाई आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 294 के अनुपालन के लिए रखी गई है।
यह धारा अभियोजन या आरोपी द्वारा दायर किए गए दस्तावेजों को बिना किसी औपचारिक प्रमाण के साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने की अनुमति देती है, बशर्ते उनकी सत्यता पर कोई विवाद न हो। इस प्रक्रिया से मुकदमों की सुनवाई में तेजी आती है।
वहीं, अभियोजन पक्ष का कहना है कि उन्होंने घटना से ठीक एक दिन पहले सोलंकी द्वारा आरोपी खत्री को भेजे गए कुछ संदेश भी कथित तौर पर बरामद किए हैं, जिन्हें मामले में अहम माना जा रहा है।
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