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कोयले की खदान बनी हरा-भरा जंगल: अडानी ने सरगुजा माइन को 16 लाख पेड़ों से संवारा

| Updated: June 6, 2026 17:59

खनन के बाद 568 हेक्टेयर बंजर ज़मीन को 16 लाख पेड़ों से संवारा गया, केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने पारिस्थितिक बहाली की इस पहल को बताया 'उल्लेखनीय' उदाहरण।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक कोयला खदान अब बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान के जरिए एक हरे-भरे परिदृश्य में तब्दील हो रही है। अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने परसा ईस्ट और कांता बासन (पीईकेबी) खदान में 568 हेक्टेयर भूमि पर 16 लाख से अधिक पेड़ और पौधे लगाए हैं।

कंपनी राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) के लिए माइन डेवलपर और ऑपरेटर के रूप में इस खदान का संचालन करती है। अधिकारियों के अनुसार, इस हरित परियोजना ने यह साबित कर दिया है कि कोयला निकालने के बाद खनन वाली भूमि को सफलतापूर्वक कैसे बहाल किया जा सकता है।

खदान क्षेत्र की भूमि को बहाल करने और जैव विविधता को बढ़ाने के प्रयासों के तहत एक बड़ा लक्ष्य रखा गया है। कंपनी की योजना इस दशक के अंत तक यहां पेड़ों की संख्या को बढ़ाकर 40 लाख (4 मिलियन) से अधिक करने की है।

Adani Surguja Mine
Adani Surguja Mine

इस कार्यक्रम के तहत खनन गतिविधियों के लिए हटाए गए प्रत्येक पेड़ के बदले 40 नए पेड़ लगाए जा रहे हैं। साल, महुआ, तेंदू, अमलतास और सिद्धा जैसी स्थानीय प्रजातियों को यहां फिर से रोपा गया है, और कंपनी के अनुसार इन पौधों के जीवित रहने की दर लगभग 88 प्रतिशत है।

केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट के जरिए पीईकेबी कोयला खदानों में इस पारिस्थितिक बहाली को प्रतिबद्धता का एक ‘उल्लेखनीय’ उदाहरण बताया है।

मंत्रालय ने कहा कि कोयला निकालने के बाद खदान का सफर खत्म नहीं होता, बल्कि यह पारिस्थितिक बहाली और स्थायी परिवर्तन की शुरुआत का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा में पीईकेबी खदान इस बात का एक शानदार उदाहरण बनकर उभरी है।

कभी एक सक्रिय खनन स्थल रहा यह क्षेत्र अब पूरी तरह से हरियाली से घिर चुका है। मंत्रालय के अनुसार यह इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जिम्मेदार खनन और पर्यावरण संरक्षण एक साथ चल सकते हैं, और खदान के बंद होने के बाद एक टिकाऊ भविष्य का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।

अडानी ने 3.5 हेक्टेयर क्षेत्र में एक नर्सरी भी विकसित की है, जिसमें लगभग पांच लाख (500,000) पौधे मौजूद हैं। इसके साथ ही कंपनी ने इस क्षेत्र में साल के जंगलों को सफलतापूर्वक पुनर्जीवित करने का लक्ष्य भी हासिल कर लिया है।

अधिकारियों ने बताया कि कंपनी ने सरगुजा, कोरिया, बलरामपुर और सूरजपुर वन प्रभागों में 4,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में प्रतिपूरक वनीकरण का कार्य किया है। वनरोपण, वन्यजीव प्रबंधन और अन्य पर्यावरणीय उपायों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के पास 259 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भी जमा की गई है।

यह पारिस्थितिक बहाली प्रयास एक व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है, जो खनन कार्यों को पर्यावरण पुनर्वास और सामुदायिक विकास से जोड़ता है। कंपनी सभी वन और पर्यावरण मंजूरी से जुड़ी आवश्यकताओं का कड़ाई से पालन करती है और नियमित रूप से राज्य व संघीय अधिकारियों को अपनी निगरानी रिपोर्ट सौंपती है।

इन सभी पर्यावरणीय पहलों के अतिरिक्त, अडानी नेचुरल रिसोर्सेज खनन क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका विकास पर केंद्रित कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय समुदायों का भी निरंतर समर्थन कर रहा है।

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