अहमदाबाद स्थित गुजरात उच्च न्यायालय में सोमवार को एक हैरान करने वाला मामला सामने आया। अदालत ने आईआईटी गांधीनगर (IIT-Gn) की एक छात्रा को उसके कपड़ों को अनुचित मानते हुए कोर्ट रूम से बाहर जाने का निर्देश दिया। यह छात्रा अपने एक सेमेस्टर के निलंबन के खिलाफ याचिका दायर करने वहां पहुंची थी।
सुनवाई के दौरान छात्रा ने जींस और शर्ट पहनी हुई थी, जिसे अदालत ने कोर्ट रूम के लिहाज से सही नहीं माना। वह संस्थान द्वारा लगाए गए निलंबन के खिलाफ न्याय मांगने आई थी। आईआईटी प्रबंधन ने कथित तौर पर स्टाफ के साथ असभ्य व्यवहार और धमकी भरी भाषा के इस्तेमाल के कारण उसे निलंबित किया था। संस्थान ने अपने निलंबन आदेश में उसके आचरण को ‘आईआईटी-जीएन छात्र के लिए अशोभनीय’ करार दिया था।
छात्रा के वकील ने जब उसके पहनावे का बचाव करने की कोशिश की, तो जस्टिस निजार देसाई ने स्पष्ट शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हर किसी को अपनी पसंद के कपड़े पहनने का अधिकार है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति किस जगह जा रहा है। जज ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई अदालत आ रहा है, तो उसे उचित वेशभूषा में ही आना चाहिए।
सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायाधीश ने छात्रा के वकील से कहा कि वह अदालत को न्याय का मंदिर मानते हैं और लोगों को इसकी गरिमा बनाए रखनी चाहिए। इसके जवाब में वरिष्ठ वकील ने अदालत से इस पहनावे के मुद्दे को नजरअंदाज करने का आग्रह किया। वकील की दलील थी कि याचिकाकर्ता के कपड़ों का अदालत के विवेक और फैसले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
यह छात्रा सामाजिक विकास (सोशल डेवलपमेंट) में एमए के अंतिम सेमेस्टर की पढ़ाई कर रही है। उसके वकील ने अदालत को बताया कि विवाद की शुरुआत फील्डवर्क के लिए मिलने वाले अपर्याप्त अनुदान को लेकर हुई थी। एक अकाउंट्स अधिकारी के साथ हुई बहस और विरोध जताने के तरीके के कारण ही उस पर निलंबन की कार्रवाई की गई।
वकील ने यह भी दावा किया कि छात्रा के व्यवहार को लेकर संस्थान का नजरिया एक पुरानी घटना से भी प्रभावित है। दरअसल, पहले उस पर लड़कों के हॉस्टल में रुकने का आरोप लगा था, जिसके बाद उसे हॉस्टल से निकाल दिया गया था। याचिका के मुताबिक, उस घटना के बाद से ही वह कैंपस के बाहर रह रही है।
छात्रा की पढ़ाई पूरी हो सके, इसके लिए वकील ने हाई कोर्ट से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि संस्थान को एक नया माफीनामा सौंपा जाएगा। इससे पहले संस्थान ने यह कहते हुए उसका पुराना माफीनामा खारिज कर दिया था कि उसमें किसी भी तरह का पछतावा नहीं झलक रहा था।
पूरी सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने आईआईटी गांधीनगर को नोटिस जारी किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह नोटिस 29 अप्रैल, 2026 तक वापस किया जाना है। सामान्य और भौतिक सेवा के अलावा, ईमेल के माध्यम से भी सीधे नोटिस तामील करने की अनुमति दी गई है। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई अब बुधवार को तय की गई है।
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