गुजरात के मतदाताओं, विशेषकर शहरी वर्ग ने एक बार फिर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर अपना अटूट विश्वास जताया है। राज्य के नगर निगम चुनावों में भाजपा ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए कुल मतदान का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा अपने नाम कर लिया। भाजपा ने अपनी पूरी ताकत दिखाते हुए शहरी क्षेत्रों में 59.36 प्रतिशत वोट हासिल किए।
वहीं, कांग्रेस 26.46 प्रतिशत वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि बड़े शहरों में आम आदमी पार्टी (आप) को 10.27 प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन प्राप्त हुआ।
अगर सभी स्थानीय निकायों के आंकड़ों को मिला दिया जाए, तो भाजपा का औसत वोट शेयर 53.78 प्रतिशत के मजबूत स्तर पर रहा। एक तरफ जहां नगर निगमों में पार्टी का प्रभुत्व स्पष्ट है, वहीं तालुका और जिला पंचायतों जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में भी भाजपा का वोट शेयर 51 प्रतिशत से 52.5 प्रतिशत के बीच बना रहा। समग्र रूप से देखा जाए तो कांग्रेस का कुल वोट शेयर 30.93 प्रतिशत और ‘आप’ का 10.08 प्रतिशत दर्ज किया गया।
मंगलवार को घोषित हुए नगर निगम के नतीजे स्थानीय सरकार के सभी स्तरों पर भाजपा के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को दर्शाते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्य में 9 नए नगर निगम बनाने का पार्टी का फैसला मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ।
भाजपा ने न सिर्फ इन सभी 9 नए नगर निगमों में जीत का परचम लहराया, बल्कि पुराने नगर निगमों में भी 31 अतिरिक्त सीटें अपनी झोली में डालीं। इसमें सूरत का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा, जहां भाजपा ने अकेले 23 अतिरिक्त सीटों पर कब्जा जमाया।
अन्य नागरिक निकायों जैसे नगर पालिकाओं, जिला पंचायतों और तालुका पंचायतों में भी भाजपा ने निर्णायक बढ़त बनाए रखी। तालुका पंचायत चुनावों में भाजपा ने 51 प्रतिशत वोट हासिल किए, जो कांग्रेस के 32.89 प्रतिशत और ‘आप’ के 12.67 प्रतिशत वोट शेयर से काफी आगे है। इसी तरह, चुनाव में गईं 34 जिला पंचायतों में भाजपा का वोट शेयर 52.37 प्रतिशत, कांग्रेस का 33.7 प्रतिशत और ‘आप’ का 12.4 प्रतिशत रहा।
नगर पालिकाओं के परिणाम भी लगभग ऐसे ही रहे। यहां भाजपा ने 52.51 प्रतिशत वोटों पर कब्जा किया, जबकि कांग्रेस 30.68 प्रतिशत के साथ दूसरे नंबर पर रही।
दिलचस्प बात यह है कि इस हिस्से में आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन सबसे खराब रहा और उसे नगर पालिकाओं में केवल 4.89 प्रतिशत वोट ही मिल सके। पूरे राज्य में कांग्रेस का वोट शेयर ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में लगभग 30 से 33.7 प्रतिशत के बीच स्थिर रहा, लेकिन नगर निगमों में वह भाजपा से काफी पीछे छूट गई।
साल 2026 के इन चुनावों में आम आदमी पार्टी का उभार सबसे ज्यादा राज्य के ग्रामीण इलाकों में देखने को मिला है। हाल ही में संपन्न हुए तालुका पंचायत चुनावों में ‘आप’ ने 2021 के मुकाबले 17.18 लाख ज्यादा वोट हासिल किए।
राज्य की 260 तालुका पंचायतों में ‘आप’ को कुल 21.48 लाख वोट मिले, जिनमें से अकेले नर्मदा जिले की छह तालुका पंचायतों में उसे 1.18 लाख वोट प्राप्त हुए। तालुका पंचायतों में पार्टी का वोट शेयर 2021 के 2.61 प्रतिशत से भारी उछाल के साथ 2026 में 12.67 प्रतिशत हो गया।
जिला पंचायत चुनावों की बात करें तो आम आदमी पार्टी को कुल 17.1 लाख वोट मिले, जिसका औसत प्रति जिला 62,645 वोट बैठता है। नर्मदा जिला पंचायत में तो पार्टी ने जोरदार जीत के साथ सत्ता ही हासिल कर ली, जहां उसे 1.29 लाख वोट मिले।
यह आंकड़ा अन्य जिलों के औसत वोटों से दोगुना है। इन नतीजों को देखकर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ग्रामीण गुजरात में ‘आप’ ने खुद को तीसरे मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश कर दिया है।
इन चुनावी नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश भाजपा प्रवक्ता प्रशांत वाला ने इसे सत्ता समर्थक (प्रो-इन्कम्बेंसी) जनादेश करार दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों में दो दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बावजूद पार्टी का वोट शेयर और सीटें बढ़ी हैं।
उन्होंने इसे राष्ट्रीय नेतृत्व में जनता के भरोसे और विश्वास का सीधा प्रमाण बताया।
दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस मीडिया संयोजक मनीष दोशी ने भाजपा और ‘आप’ के बीच सांठगांठ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा की रणनीति सत्ता विरोधी वोटों को बांटने की थी जिसमें वह कुछ हद तक सफल रही।
हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस ने हर जगह अपनी सीटों की संख्या बढ़ाई है और पार्टी 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए पूरे जोश के साथ तैयार है।
आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल इटालिया ने अपनी पार्टी के प्रदर्शन को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 2021 में सभी स्थानीय निकायों में महज 72 सीटें जीतने वाली ‘आप’ ने इस बार एक जिला पंचायत और 13 तालुका पंचायतों में जीत दर्ज की है।
इटालिया ने कहा कि यह नतीजे इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि राज्य की जनता हमारी पार्टी के आदर्शों को खुले दिल से अपना रही है।
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